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ट्रेन का सफर था और मुझे अकेले ही जाना था इसलिए मेरे पति ने प्रथम श्रेणी एसी में मेरे लिए रिज़र्वेशन करवा दिया था. वह मुस्कुरा दी और कहा- तो सिर्फ आप कुँवारी लड़कियों को लिफ्ट देते हैं?मैंने कहा- नहीं! मैं हर खूबसूरत लड़की को लिफ्ट देता हूँ!मैंने उससे दो मिनट का समय माँगा और पिज्जा-हट कॉल करके दो वेज पिज्जा का आर्डर दे दिया. उसका एक हाथ मेरे सर पर था, वो मुझे ऐसे दबा रही थी कि मानो कह रही हो- मेरी चूत में घुस जाओ!इतनी कामुक लड़की मैंने अपनी जिंदगी में नहीं देखी!मैं कोमल के ऊपर आ गया.

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मैंने नीची नजरे करते हुए रिंकी से कहा- सॉरी! रात को मैं नशे में था इसलिए मैं रिश्तों को भूल गया. बारहवीं कक्षा पास करने के बाद जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया तो वहाँ नई सहेलियाँ बनीं.

मैंने अपनी जिन्दगी में पहली बार चूत को इतनी पास से देखा था। चूत पर छोटी छोटी झांटें….

कमरे में कोई भी नहीं था इसलिए मैंने कमरे का दरवाजा बंद किया और अपने कपड़े उतार दिए.

’मुझे आलोक का स्टाइल अच्छा लगा…मैंने भी एक सेक्सी स्माइल दी, अपनी एक टांग ऊपर करके दूसरे घुटने पर रख ली और कहा,’ओह. जैसे ही हम दोनों कमरे में पहुँचे तो मैंने देखा कि सभी दोस्त वहाँ पहले से ही खड़े थे और सभी मेरी तरफ देख कर हंस रहे थे. मेरी मेल आईडी है :[emailprotected]मेरे दोस्त राज को भी आपके मेल का इन्तजार रहेगा…उनकी आईडी तो पता है ना आपको…[emailprotected].

और मैं अक्सर छोटी मेम का छुप छुप कर दीदार किया करता था…छोटी मेम जूस पी लो…ओह्ह हो! राजू सोने दे ना…छोटी मेम हमेशा बड़ी बेखबर होकर सोती थी…उस दिन भी… उनकी नायटी थोड़ी ऊपर थी और उनकी लातों के बीच गांड के दरार बिल्कुल साफ़ नज़र आ रही थी, शायद अन्दर पैंटी नहीं पहनी है… उनकी गोरी गोरी. । क्या बताऊँ दोस्तो, उनकी नर्म-नर्म उँगलियाँ ऐसा जादू कर रहीं थी कि मुझे वैसी अनुभूति तब तक कभी भी किसी भी लड़की या औरत से नहीं मिली थी। जब तक मैंने उनके बदन को पौंछ कर सुखाया तब तक वो फिर से पूरी तरह से जोश में आ चुकीं थी…. सारे नजारे एक एक कर मेरी आँखों के सामने घूमकर खत्म होते ही मेरी नजर बबलू पर पड़ी उसकी निगाह मेरे ब्लाउज के ऊपर अटकी थी.

उस चीज के लगते ही उसके मुँह से एक जोर की सिसकारी- ईईईईईईए आआआआआम्मं स्स्स्सीईईई निकल गई.

राजू रीटा के घुटने मोड़ कर रीटा को कंधों से मिला दिये और बोला- जाती कहाँ है साली! माँ की लौड़ी, अभी तो तेरी मां की चूत भी मारनी है. जल्दी से आ आकर ले लो, वरना मैं कभी खुद को माफ़ नहीं कर पाऊँगा…!!!”इतना पढ़ते पढ़ते ही मेरी आँखों की नींद उड़ चुकी थी. शिखा अब मेरे साथ चुदाई का मजा लेने लगी और उछल-उछल कर मेरे धक्कों का जवाब देने लगी.

जीजू मुझे चूमने लगे, बोले- बहुत मजा दिया है तूने!मुझे भी अच्छा लगा जीजू!उसके बाद मैं वहाँ एक महीना रुकी और जब मौका मिलता हम एक हो जाते. दो दिन के बाद उसका एक फ़ोन आया और फिर जो हुआ वो आपको अगली कहानी में सब विस्तार से बताऊंगा…तब तक आप अपने विचार और सुझाव मुझे जरूर बताएँ !. पीड़ा के डर से आँखें भींच और थूक निगलती रीटा की टांगों ने घड़ी के दस बज कर दस बजा दिये.

बिल्कुल नहीं… अंकल मम्मी की फ़ुद्दी में लण्ड घुसा दो ना!” गौरी बेशर्म हो कर मम्मी की चुदाई देखना चाहती थी.

मुँह में भी दूँगा… अपना बच्चा भी तुझसे पैदा करवाऊँगा और यहाँ से नंगी तुझको उठाकर सबके सामने बाहर भी लेकर जाऊँगा…. इन अठारह सालों में मेरे पति ने साधारण तरीके से या कभी कभी मेरी दोनों टांगें अपने कंधे पर रख कर ही चोदा था.

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बाजी सिसकारी भरने लगी- ऊओह्ह्ह्ह आऽऽऽह आऽऽऽईऽऽय!!!बाज़ी ने राज का सर अपनी चूचियों के बीच में दबाया और बोली- साले! और तेज़ी से दबा! पी मेरा दूध! साले बहुत दिनों के बाद आज किसी ने मेरी चूची को दबाया है! मेरी चूची में बहुत दूध भरा हुआ है! जल्दी जल्दी से चूस मेरी चूची को!घबरा मत! आज तेरी चूची का सारा रस निचोड़ कर पी जायेंगे!उसके बाद राज अंकल बाजी की चूची को जोर जोर से पीने लगे.

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‘हाय… हट जाओ अब… बस दर्द नहीं है अब…’‘यहाँ नहीं तो इधर सीने में तो है…!’मैंने अब सीधे ही उसके सीने पर हाथ रख दिये… और उसकी चूचियाँ दबा दी. चुदती चूत ने ठेर सारा पानी उगल दिया, तो लण्ड बिना तकलीफ अंदर बाहर घचर पचर की मीठी मीठी आवाज के साथ चूत में अन्दर बाहर फिसलने लगा. मैंने उत्तर दिया- ब्रा एक तरह की बनियान होती है… अब और कुछ मत पूछियो इससे ज्यादा मुझे भी नहीं पता…वो बोला- इतना भड़क क्यों रही है.

मेरा टोपा अंदर था और फिर मैंने लंड को बाहर निकाला और एक झटके में पूरा उसकी चूत में डाल दिया। शाजिया की हल्की चीख निकल गई, मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।अब मेरा लंड और उसकी चूत आपस में एक दूसरे के साथ चुदाई का खेल खेल रहे थे। उसकी चूत कसी हुई थी क्योंकि उसने काफी दिनों या सालों से किसी के साथ कुछ किया नहीं था. हमारे स्कूल में तीन मुख्य हाल हैं… एक है प्रार्थना हाल, दूसरा साक्षात्कार हाल और तीसरा क्रियाकलाप हाल. मैंने जब भाभी से पूछा कि उस रात कौन था तो भाभी और उनके बॉस ने बताया कि उस रात भी भाभी और उनका बॉस ही थे.

फिर मैंने उसको उसकी कमर से खींचा अपनी तरफ! वो मेरी आँखों में झांकने लगी और मैं उसके आँखों में.

उसके बाद उसने टिकेट निकाल कर चेक किया और मेरी तरफ़ आँख मारते हुए बोला ‘आप खाना खा लीजिये. मैंने उसे बताया कि मैं इंदौर का रहने वाला हूँ और यहाँ मैं एक रूम-किचन का फ्लैट लेकर रहता हूँ. मैं भी आँखें बंद करके मजे लेने लगा…मुस्कान तो मेरे लंड को छोड़ ही नहीं रही थी…मैंने साथ में उन सबकी पैंटी भी उतार दी और चूत में ऊँगली डाल कर मसलने लगा…तीनों ने मुझे तब तक नहीं छोड़ा जब तक लंड का पानी बाहर नहीं आ गया.

तब तक में भी उसके पयजामे से उसका लण्ड बाहर निकाल चुकी थी… वो मुझे अपनी उंगलियों से काफी देर तक तड़पाता रहा… कभी अन्दर डालकर घुमा देता. मैंने उसके नर्म-नर्म होंठों को चूमना शुरू किया। यह मेरे ज़िन्दगी का सबसे यादगार चुम्बन था……. वो टिकेट उसकी ऊँगली से टकरा कर बिल्कुल मेरे निप्पल के ऊपर आ गया जिसे अब ब्रा में हाथ डाल कर ही निकाला जा सकता था.

’‘सच मेरे राजा… फिर तो लगा जमा कर… मां मेरी… उईईईई ईईइ’मैं अब पागलों की तरह अपनी चूत उछाल कर चुदवा रही थी. मैंने कहा- ठीक है! और उसके पैसे वापिस दे कर बोला- मैं तुम्हारी फ्रेंड से पैसे ले लूंगा पर तुमसे नहीं!वो मना करने लगी तो मैंने कहा- अगर तुम ये पैसे वापिस नहीं लोगी तो मैं फिर नहीं आंऊगा!तब उसने पैसे वापस ले लिए और मैं उसके होंठों पर किस कर के चला आया.

मेरी चूत उसके लण्ड के साथ-साथ थाप देने लगी, थप थप की आवाज आने लगी, मेरी चूत पिटने लगी. मुँह में भी दूँगा… अपना बच्चा भी तुझसे पैदा करवाऊँगा और यहाँ से नंगी तुझको उठाकर सबके सामने बाहर भी लेकर जाऊँगा…. तब तक तुम दोनों आपस में मस्ती करो…फिर दोनों बहनें आपस में एक दूसरे की चूत में हाथ डालने लगी…मैं पाँच मिनट बाद फिर से चोदने आ गया … फिर भाभी को झड़वा कर मीनाक्षी को मस्त चुदाई की.

मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं ऐसा कभी करुँगी… मैं सच कह रही हूँ।’‘लेकिन अच्छा लगा ना?’‘हाँ, बहुत अच्छा.

अच्छा चलो… तुम रीता पर लाइन मरो और मैं कामिनी पर… आप क्या कहती हैं… कामिनी जी… ” राहुल ने अंधेरे में तीर छोड़ा. ’मैंने उसे चूमते हुए कहा- कल जब पढ़ने आओ तो फ़िर से ऐसे ही चोदना… ‘वो हैरान होकर मुझे देखने लगा. किस देते देते मैं उसके स्तन भी दबा रहा था। अब वो गर्म हो चुकी थी। मैंने उसकी गांड दबाना शुरू किया।तभी अचानक घंटी बजी, मैं तो सीधे छत पर भाग गया और पतंग उड़ाने लगा।अगले दिन मकर संक्रान्ति थी.

इस बारे में और अपने बारे में ज्यादा बात ना करते हुए मैं अपनी कहानी को आगे बढ़ाता हूँ. और तुरंत अपने गन्दी कच्छी धो ले और स्कर्ट भी वरना निशान जायेंगे…!!!मेरे लिए तो एक और आफत आ गई.

‘अब बनो मत राजू, अपनी आँखें खोल दो!’‘चाची, बहुत मजा आ रहा है, धीरे धीरे खींच कर और मलो लण्ड को!’‘आ रहा है ना मजा, अब जरा अपनी ये चड्डी तो नीचे सरका!’‘चाची खींच दो ना आप… ‘‘अच्छा यह ले…’ और चाची ने मेरी तंग चड्डी नीचे खींच कर उतार दी. क्योंकि मैं डर रहा था इसलिये पहले मैंने पूरे घर का एक चक्कर लगाया यह कह कर कि पहले तुम्हारा घर तो देख लूँ. मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी ! मुझे जाने दो……पर सोमा ने मेरे होठों पर अपने होंठ भीच लिए और मेरी जीभ चूसने लगी……….

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’‘जीजू, आप तो मेरे मालिक हो… बस अब मुझे लूट लो… मेरी नीचे की दीवार फ़ाड़ डालो!’ मैं जैसे दीवानी हो गई थी.

कोमल को देख कर मुझे लगता था कि काश यह मुझे मिल जाती और मैं उसे खूब चोदता… पर फिर मुझे लगता कि यह पाप है… पर क्या करता… पुरुष मन था… और स्त्री के नाम पर कोमल ही थी जो कि मेरे पास थी. 5 इंच के लंड का प्रणाम … आशा करता हूँ कि सभी चूत और लौड़ों को मेरी यह कहानी भी पहले वाली कहानियों की तरह ही पसंद आएगी।आपने कुछ दिनों पहले मेरी और रक्षिता कीजयपुर में पतंगबाजीऔररक्षिता और उसकी भाभीपढ़ी होगी,आज मैं उसके आगे की कहानी वहाँ से शुरू करता हूँ जब रक्षिता की भाभी विशाखा ने कहा था कि रोहित तू कल आना में अपनी सहेलियों को बुला कर लाऊगी …. मेरी चीख निकलने वाली थी कि उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया… मेरे मुँह से आह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह की आवाजें निकल रही थी…पूरा लण्ड अन्दर धकेलने के बाद वो कुछ देर शांत रहा और फिर लण्ड अंदर-बाहर करने लगा.

ह्म्‍म्म्ममममम उम्म्म्मम जन्नन टच इट विद योर फिंगर प्लज़्ज़्ज़्ज़शशांक : फिर मैंने झीभ से ही उसे ऊपर मोड़ दिया, फिर नीचे…. उधर सुमन ने लण्ड पकड़ कर उसे मसलना चालू कर दिया था और बार-बार उसे अपनी चूत में घुसाने का प्रयत्न कर रही थी. कॉलेज वाली सेक्सी बीएफइधर मेरे लंड के हल्के हल्के धक्कों से रागिनी कराह रही थी- संजय बहुत भीतर घुस गया है.

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प्रेम गुरु और नीरू बेन को प्राप्त संदेशों पर आधारितप्रेषिका : स्लिम सीमामुझे आते देख कर वह जल्दी से खड़ा हो गया और मुझे बाहों में भर कर नीचे पटकने लगा।ओह.

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चूतड़ों के बीच में लंड डाल कर घिसने का मजा ही कुछ और है…उसके वापिस आते ही मैंने कहा ‘रागिनी मुझे तुम्हारे चूतड़ और गांड देखना है. यह कह कर वो मेरे लौड़े को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी और अपने हाथों से मेरा मुठ मारने लगी. !मैंने कहा- मुझे नहीं पहनना !तो वो हंस पड़ी और बोली- मत पहनो ! ऐसे ही अच्छे लगते हो !मैं भी हंस पड़ा !फिर हमने एक-दूसरे को पकड़ कर प्यार किया और उसने मेरी गोलियों को थोड़ा सा सहला दिया.

रीटा का स्कूल बैग साईकल के पीछे रख बहादुर ने रीटा की बगलों में हाथ डाल कर रीटा को उठा अगले डण्डे पर बैठाया. आखिर लण्ड और उंगलियों में कुछ तो फर्क होगा, तभी तो सब औरतें लण्ड की दीवानी होती हैं… वरना उँगलियाँ तो औरतों के पास भी हैं…!!!मैंने उसे कहा- तुम लेट जाओ. रुमाल ही लाओ ! पर दूर से दो !मेरा लंड मीनार हो चुका था, हगासी गांड चोदने का अपना मज़ा है।मैंने हाथ बढ़ाया, जैसे ही उसने रूमाल लेना चाहा…दूसरे भाग में पढ़ें कि क्या हुआ !.

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इसी में दोनों की भलाई है!’ कहते हुए मैंने उसे पकड़ा और उसके पेटीकोट का नाडा खींच दिया. और जोर से … आआअह्ह्ह्ह …मैंने अपने नाख़ून सोफे में घुसा दिए थे … मेरी चूत में पानी भर गया था और छप-छप की आवाज़ आ रही थी। मकान-मालिक ने एक ज़ोरदार धक्का मारा और मेरी चूत को अपने वीर्य से भर दिया। मैं भी कराह उठी …. इसी में दोनों की भलाई है!’ कहते हुए मैंने उसे पकड़ा और उसके पेटीकोट का नाडा खींच दिया.

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उसके बलिष्ठ प्रहारों को भी मैं कितना झेलता, कुछ ही मिनटों में मेरा वीर्य भी लण्ड से छलक पड़ा.

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बीएफ हीदी‘चलो अब, नाश्ता भी कर लो, बहुत हो गया!’‘उह चाची, इतना कुछ कर लिया अब एक बार मेरे नीचे तो आ जाओ!’‘चल हट रे चाची को चोदेगा क्या… पागल!’‘क्या चाची, एक तो आप मेरे लण्ड को रगड़ कर रख देती हो दूसरी और अपने आप को……!’मैं अपने पांव पटकता हुआ बाथरूम में चला गया. !”मैं दर्द के मारे कसमसाने लगी थी पर वो मेरी कमर पकड़े रहा और 2-3 धक्के और लगा दिए।मैं तो बिलबिलाती ही रह गई !आधा लण्ड अंदर चला गया था। उसने मुझे कस कर पकड़े रखा।ओह… जस्सी बहुत दर्द हो रहा है.

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कुछ बदमाश लड़के एक जगह बैठे थे और सिगरेट पी रहे थे। मैं उन्हें डांट लगाते हुए उधर गया तो देखा वो लोग छिप छिप कर दारू पी रहे थे. दर असल मेरे साथ पढ़ती थी !’‘फिर?’‘मैंने पढ़ाई छोड़ दी !’‘हम्म !!’‘अब वो मेरे साथ बात नहीं करती !’‘तुम्हारी इस हरकत का उसे पता चल गया तो और भी नाराज़ होगी !’‘उसे कैसे पता चलेगा?’‘क्या तुम्हें उसके नाम लिखी जगह पर सू सू करने में मज़ा आता है?’‘हाँ… ओह. हफ्तों से लण्ड के लिये तरसी रीटा ने बहादुर को अपनी गोरी गुदाज़ बाहों में लेकर बहादुर के कन्धे पर अपने दांत गड़ा कर खून निकाल दिया तो पीड़ा से बिलबिला कर और तैश में आकर बहादुर ने अपने एक हाथ से रीटा के फूल से दोनों हाथों को जबरदस्ती पकड़ लिया और अपने डण्डे से अकड़े लण्ड से रीटा के चेहरे को फटाक फटाक से पीट कर, रीटा का चेहरा गुलाबी कर दिया.

चिकने चूतड़ और ऊपर उठाते हुए मैंने उसके पैर उसकी चूचियों तक मोड़ दिए और लंड और गहराई में पेलने लगा. मैंने उसके लाख मना करने पर अपने लंड उसके गरम होंठों के अन्दर ठूंस दिया- अहह मेम और चूसो न. ” राहुल ने कहाहाय रे… यानि रीता साहिल के पास और मैं राहुल के पास… ” कामिनी ने आह भरते हुए कहा.

ले…पूरा ले मुँह में रांड……ले ले मेरे लौड़े को !” मैं बोला।उसके बाद हमने कपड़े पहने और फिर उसे उसके घर छोड़ दिया।इस घटना के बाद मैंने कई बार कोशिश की उससे मिलने की, मगर वो कहीं नहीं मिली………आप बताइए, आपको मेरी कहानी कैसी लगी?. एक बार मैं रात को अपने ही घर के पास घूम रहा था, तभी एक लड़की मेरे साइड से निकल कर गई, तब मेरे मन में क्या हुआ कि मैं उसके पीछे पीछे जाने लगा, दो तीन बार मुझे भी लगा कि वो लड़की लाइन दे रही है इसलिए मैं रुका नहीं और उसके पीछे पीछे जाता रहा. कम से कम मैंने अपना सब उसे सौंपा, जिससे मैं प्रेम करती हूँ और जो मुझ से प्रेम करता है.

कोमल… कोमल… इधर…आ…” मैंने कोमल के बाल पकड़ कर जल्दी से उसके मुँह को मेरे लण्ड पर रख दिया. हुम्म… आह!फिर मैंने उन्हें सोफे पर ही लिटा दिया और उनके पूरे शरीर को दबोचने लगा। चाची भी पूरे जोश में थी और मेरे बालों में तो कभी मेरे हाथों को सहलाती। अब चाची चुदने के लिये बिल्कुल तैयार हो चुकी थी, वो ऐसे तड़प रही थी जैसे सालों से भूखी हों।मैं उनकी नाईटी खोलने लगा कि अचानक दरवाज़े पर घण्टी बजी, घण्टी की आवाज़ सुनते ही हम दोनों घबरा गये और रुक गये। तभी हमरी नज़र सामने लगी घड़ी पर पड़ी, शाम के 5.

मैं एक दोस्त से विश्वासघात करने का दोषी था…कुछ साल बाद एक अच्छा रिश्ता देखके कशिश के घरवालों ने उसकी शादी कर दी…उसके पति का तबादला हो के वो लोग अब हमारे शहर में ही रह रहे हैं.

वो मेरे पूरे कपड़े उतार कर मेरे बराबर में लेट गई और अपने हाथों से मेरे पूरे बदन को सहलाने लगी. बीएफ सेक्सी चोदने वाली बीएफआयशा का आकार 32 के करीब था, कुंवारी चूत का क्या मजा होता है यह तो हम सभी जानते हैं जिस कारण से मैं भी काफी रोमांचित था. बीएफ फिल्म बताइए वीडियो मेंवो अभी बच्ची है !”अरे बच्ची कहाँ है ! पूरे अट्ठारह साल की तो हो गई है ? तुम्हें अपनी याद नहीं है क्या ? तुम तो केवल सोलह साल की ही थी जब हमारी शादी हुई थी और मैंने तो सुहागरात में ही तुम्हारी गांड भी मार ली थी !”हाँ ये तो सच है पर …. हाँ तैयार हूँ !फिर मैंने जोर का धक्का देकर लंड पिंकी के चूत में धकेल दिया। लंड चूत में जाते ही आऽऽ आऽ आहह्हह्ह ! पिंकी चिल्ला उठी।फिर थोड़ी देर बाद मैं लंड अंदर-बाहर करने लगा। पिंकी मदहोश होकर चुदाई का आनंद ले रही थी।पिंकी अब बस करो ! अब रेशमा को चोदने दो… वो तरस रही है !ठीक है ! पिंकी बोली और कविता के बगल में जा बैठी।रेशमा डार्लिंग आओ.

उसने डरते डरते मेरे लंड को पजामे के ऊपर हाथ में लिया तो मैं समझ गया कि वो पहली बार कर रही है और डर भी रही है…तो मैंने पजामा उतार के उसके हाथ को अपने से पकड़ के लौड़े को कस कस के मसलने लगा तो वो डर के बोली- इतनी ज़ोर से?तो मैंने कहा- मजा तो आ रहा है ना…?मैंने उसको बोला- चाँदनी, देख मैं तेरे सामने बिना कपड़ों के नंगा पड़ा हूँ तो तू भी तो कपड़े उतार के दिखा.

आयशा का आकार 32 के करीब था, कुंवारी चूत का क्या मजा होता है यह तो हम सभी जानते हैं जिस कारण से मैं भी काफी रोमांचित था. मैं बहुत ही दुबला पतला हूँ, मेरे शरीर पर नाम मात्र के बाल हैं। झांट और सर के बाल के अलावा छाती या हाथ पैर पर बाल नहीं हैं। मतलब यह है कि मैं अगर साड़ी में भी आ जाऊँ तो लोग मुझे पहचान नहीं पाएंगे, मेरी आवाज़ भी वैसी ही लड़कियों वाली है।खैर, दोस्तो, यह कहानी नहीं सच्ची घटना है. ”और पहले पेटीकोट उतार कर फेंक दिया। अब मेरे ऊपर आकर बैठ गई और अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाकर हल्के से ही चूत के मुँह पर स्पर्श किया था कि तुरंत अन्दर प्रवेश कर गया। इस बार ज्यादा मज़ा आ रहा था …… अब वो खुद ऊपर नीचे हो रही थीं।” मर गई रे……तू मेरा असली बेटा क्यूँ नहीं हुआ ! वर्ना तुझसे तो रोज़ चुदवाती….

मेरे नाखून उसे गड़ रहे थे। मेरा लंड पूरा उसकी गहराई तक जा रहा था। रागिनी अब मस्त हो चुकी थी. जीजू कभी कभी मुझसे भी दो धारी बातें कर लेते हैं… उन्हें टोकने पर उनका जवाब होता था- भई, साली तो आधी घरवाली होती है… साली से मजाक नहीं करेंगे तो फिर किस से करेंगे…?बस एक मीठी सी टीस दिल में घर कर जाती थी. एकदम गोरी-गोरी टाँगें, (एक पर बाल बचे थे पर मेरे ज्यादा बाल नहीं थे, लेकिन दूसरी टांग तो एकदम लड़कियों जैसी लग रही थी.

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डॉक्टर ने पापा को चेक किया और कहा की उनके रीढ़ की हड्डी में कुछ परेशानी है और उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है. लंड चूत में!मैंने उसे चूमते हुए कहा- आई लव यू रागिनी! मैं बहुत दिनों से तुम्हें पाना चाहता था!’वो मुस्कुराई और कहा- मैं यह तो नहीं कहूँगी कि मैं तुम्हें पाना चाहती थी. कांईं जात हो…?”मैंने उसे बताया तो वो हंस पड़ी, मुझे ऊपर से नीचे तक देखा, फिर वो बिना कुछ कहे भीतर चली गई.

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फाड़ डालो मेरी चूत को ! बहुत मज़ा आ रहा है ! आज जी भर के चोदो मुझे, सारी रात चोदो. वो आई तो मैंने पूछा- तुम मुझे देखती क्यों रहती हो?उसने कहा- तुम मुझे अच्छे लगते हो!मैंने भी कहा- मैं भी तुझे पसंद करता हूँ. सेक्सी नंगी चुदाई बीएफक्या तो… तू भी… ऐसे ही…?”हाँ पापा… मेरे मन में भी तो इच्छा होती है ना!”देखो तुम भी दुखी, मैं भी दुखी…” मैंने उसके मन की बात समझ ली… उसे भी चुदाई चाहिये थी… पर किससे चुदाती… बदनाम हो जाती… कहीं???… कहीं इसे मुझसे चुदना तो नहीं है… नहीं… नहीं… मैं तो इसका बाप की तरह हूँ… छी:… पर मन के किसी कोने में एक हूक उठ रही थी कि इसे चुदना ही है.

और अलग हो गई… हम दोनों एक दूसरे की आँखों से एक दूसरे का मन पढ़ रहे थे…!!!पढ़ते रहिए ![emailprotected]. मैं उसकी गांड को दबाते हुए उसके होंठो पर झुका और उससे कहा- रागिनी मेरा होने वाला है. मुझे देखो ना, कितनी बढ़िया चोदा है दोनों ने!’मैं उठ कर बैठ गई, गोमती मुझे लेकर बाथरूम में आ गई.

लोग गले तक जितने पानी में तैरने का मज़ा इस तरह उठाते हैं जैसे सागर तट उठाया जाता है।मैं भी बह चला…. अब वो सच कहते थे या अपने आपको और मुझे कल्पना की दुनिया में ले जा रहे थे यह तो नहीं मालूम लेकिन मैंने सोच लिया था कि अपने जिस्म की आग बुझाने का सबसे आसान और महफ़ूज़ ज़रिया यही है कि मैं अपने एक साल छोटे भाई के जिस्म को इस्तेमाल करूँ.

करीब 6-7 मिनट के बाद मैंने अनु का सर पकड़ कर उसकी स्पीड बढ़ा दी। अब मेरा हथियार अनु के गले तक जा रहा था। अनु की आँखे बाहर आने को तैयार हो गई।फिर मैंने उसे कहा- मेरा वीर्य छूटने वाला है.

”मेरा इशारा शायद उसने समझ लिया था। उसने अब मेरी योनि के बालों से खेलना शुरू कर दिया था।जोरों की खुजली हो रही है इन बालों में ! बेटा जरा कड़े हाथ से खुजा दे इनको…। ”चाची !”क्या है?” मैंने पूछा।तो वह बोला,”कहो तो इन बालों को मैं साफ़ कर दूं ?”इतनी रात गए? ठन्डे पास ही सो रहा है. मैंने शीशे में अपने आपको निहारा, हाय! क्या प्यारे प्यारे स्तन हैं मेरे! पतली कमर, चूत कमसिन सी, जिस पर रोयेदार बाल! घूमी तो दोनों चूतड़ क़यामत ढाते हुए!मैंने अपनी छोटी अंगुली चूत में घुसाना शुरू की तो चूत एकदम पनिया गई. उन तीन लोगों के अन्दर आते ही राजू ज़ोर से चहक कर बोला ‘आओ बॉस !! मैं आप लोगों का ही इंतज़ार कर रहा था.

हिंदी बीएफ भाभी के साथ सरसों का तेल और पानी की मल्लम से मैंने बबलू के सिर पर थोड़ी देर मालिश की और उसको ये बोल कर कि मैं थोड़ी देर के लिये पड़ोस में जा रही हूँ, तेरे चाचा यहीं हैं, लौट कर खाना बनाऊँगी…उसके कमरे दरवाजा खींच कर बाहर आई, किचन में जाकर तेल से सने हाथ को अपनी चूत पर साफ़ किया और हाथ साफ़ कर गेस्ट रूम गई. अब रीता और साहिल की सिस्कारियां बढती जा रही थी, जो राहुल और कामिनी के शरीर में आग भरने का काम कर रही थी.

तभी उसके मित्र ने मेरी कमर कस कर थाम ली और मुझे एक और लण्ड मेरी गाण्ड के छेद को फ़ोड़ता हुआ अन्दर घुस गया. मैं भी उसकी शादी में गया, खूब मज़े किए तथा जब जयमाला का वक़्त आया तो उसकी बीवी को देख कर आँखें खुली रह गई. मैं काफी देर तक सोनम को ऐसे ही देखता रहा, सोनम वैसे तो उस वक्त बुरके में ही थी मगर उसके चेहरे पर से नकाब हटा हुआ था.

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मैंने उसे मस्ती दिलाई।अब देर मत करो… प्लीज़ जल्दी डाल दो… चाट चाट कर गांड में खुजली कर दी है तुमने … प्लीज़ डालो ना. जीजू तो मेरी चूत की सील तोड़कर चले गए थे लेकिन उसके बाद मेरी क्या हालत हुई वो मैं आपको बताती हूँ. उसके बाद कुछ बीयर और पी और उसने स्कूल टाइम तक मुझे खूब चोदा और मुझे कच्ची कलि से फूल बना दिया, वो भी तीन बार चोद कर!मुझे चलने में मुश्किल हो रही थी.

वो रोती ही रही फिर उसे भी मजा आने लगा और वो अपने हाथ मेरी पीठ पर चलाने लगी और बोलने लगी- फाड़ दे मेरी चूत को! भोंसड़ी के! बड़ा तड़पाया है इस चूत ने आज तक! आ… आह्ह्ह ओह्ह्ह… मजे आ गया. आजकल सोशल साईट का जमाना है … मेरी प्रोफाइल पिक्चर देख कर सब लोग मेरे फ्रेंड बनना चाहते थे।मैं नाम से सेक्सी श्रेया आहूजा और फिगर तो पंजाबन वाली लम्बे बाल गोरा चिट्टा रंग …पीले रंग की टॉप में गोल गोल मम्मे और वक्ष-रेखा पर तिल! नीचे शॉर्ट-स्कर्ट.

मैंने घर पर फोन करके बता दिया कि मैं एक और महीने तक जयपुर रुकूँगा और भाभी उसके बाद नौकरी छोड़ देंगी और हमेशा घर पर ही रहेंगी.

मैंने उसका पूरा नमकीन पानी चाट कर साफ किया तब अमिता कहने लगी- क्यों तड़पा रहे हो? अब मुझे चोद दो!तो मैंने शालू से कहा- इसके मुँह पर अपनी चूत रख दो. अब उसके बाद मैंने उसके हाथों को पकड़ कर अपनी कमर पर रख दिया और उसकी कमर को अपनी तरफ और कस दिया और उसके होंठों को और चूसने लगा. !” लड़की ने इतनी तीखी उपेक्षा के साथ कहा कि मेरी भावुकता चटख गई। लगा कि एक लार्ज और पीना चाहिए।अपमान का दंश और शराब की इच्छा लिए, लेकिन मैं उठ खड़ा हुआ और रतन का हाथ थाम बाहर चला आया।पीछे, अंधेरे कोने वाली मेज पर, चिली चिकन की खाली प्लेट के नीचे सौ-सौ के तीन नोट देर तक फड़फड़ाते रहे- उस लड़की की तरह।बाहर आकर गाड़ी के भीतर घुसने पर मैंने पाया- उस लड़की की गंध भी मेरे साथ चली आई है।.

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मैं अकेली ही सोती हूँ।’‘प्लीज़! थोड़ी देर बैठो तो सही!’मैंने कुछ नहीं कहा और सोफे पर बैठ गई।वो जल्दी से कोल्डड्रिंक ले आया और मुझे देते हुए बोला- यह कोल्डड्रिंक ही पी लो फिर चली जाना।मैंने वो ड्रिंक ले लिया। वो मेरे पास बैठ गया और हम इधर उधर की बातें करने लगे।बातों ही बातों में वो मेरी तारीफ करने लगा।वो बोला- कोमल.

हिंदी में बीएफ सेक्सी दिखाइए: बाकी कहानी दूसरे भाग में!कहानी के बारे में अपनी राय कृपया मुझे मेल करें![emailprotected]कहानी का अगला भाग:बुआ की लड़की ने चूत दिलाई. बिस्तर पर… जांघों पर… मैं बुरी तरह प्यासी थी… मेरी अन्तर्वासना पूर्ण जागृत हो चुकी थी… और मर्दाने जिस्म की चाहत… जो सिर्फ एक लण्ड से बुझ सकती थी….

रीटा भी नम्बर एक की मां की लौड़ी थी, अपनी शर्ट के ऊपर से, अपने चुच्चे की चौंच पे उंगली लगाती बोली- बहादुर बिल्कुल यहाँ लगाना है, टिप पे, जरा जल्दी करो. आह ओर तेज या …” कनिका मस्त हुई बड़बड़ा रही थी।अब उसने अपने पैर ऊपर उठा कर मेरी कमर के गिर्द लपेट लिए थे। मैंने भी उसका सिर अपने हाथों में पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। जैसे ही मैं ऊपर उठता तो वो भी मेरे साथ ही थोड़ी सी ऊपर हो जाती और जब हम दोनों नीचे आते तो पहले उसके नितम्ब गद्दे पर टिकते और फिर गच्च से मेरा लंड उसकी चूत की गहराई में समां जाता। वो तो मस्त हुई आह उईई माँ. मैंने इशारे से कहा- क्या मुझे बुला रही है?आप अटे कई कर रिया हो?”आप मुझे जानती हो?”हीः… कई बाबू जी, मन्ने नहीं पहचानो? अरे मूं तो वई हूँ हवेली वाली, अरे वो पीपल का पेड़…”ओह, हाँ… हा… बड़ी सुन्दर लग रही हो इस कपड़ों में तो…”अरे बहू, काई करे है रे, चाल काम कर वटे, गैर मर्दां के साथ वाता करे है.

‘अब बनो मत राजू, अपनी आँखें खोल दो!’‘चाची, बहुत मजा आ रहा है, धीरे धीरे खींच कर और मलो लण्ड को!’‘आ रहा है ना मजा, अब जरा अपनी ये चड्डी तो नीचे सरका!’‘चाची खींच दो ना आप… ‘‘अच्छा यह ले…’ और चाची ने मेरी तंग चड्डी नीचे खींच कर उतार दी.

मगर एक बात की दाद देना चाहूँगा कि नीना ने बिल्कुल निडर होकर अपनी मस्ती की सच्चाई को कबूल कर लिया. ??मैं : गाली मत दे मेरे सामने…उसने जो किया उसका जवाब भी मैंने उसे दे दिया…वेदांत : क्या जवाब दिया तूने वो मैंने भी देखा. कम से कम मैंने अपना सब उसे सौंपा, जिससे मैं प्रेम करती हूँ और जो मुझ से प्रेम करता है.