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मैंने आंखें खोल दीं और हड़बड़ा कर जाग गया और अपनी मां के ऊपर से उठ गया. बिहार का देहाती बीएफफिर आज मुझ जैसे एक अनजान मर्द से उन सब बातों पर खुल कर बात ना करना चाहें.

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भाभी बोलीं- हां अनुज, मुझे भी बहुत बुरा लग रहा था, पर क्या कर सकती थी.फिर तीसरा कारण था कि मैंने दिन में भी चुदाई की थी, इस कारण भी जल्दी स्खलन नहीं हो रहा था.

चाची भी कभी अपना सिर ऊपर उठाती थी तो कभी दाएं बाएं झूला कर मारती रहती. बीएफ बीएफ ww2 system price चाची- तो फिर नीचे हाथ लगा न!मैंने तुरंत चाची की चूत को पैंटी के ऊपर से हाथ की मुट्ठी में भींच लिया.

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फिर मैंने भाभी से कहा- भाभी मैंने घर तो बोल दिया … मगर इसे कैसे शांत करूं?भाभी बोलीं- उसे मैं शांत कर दूंगी. हॉट मॉम सेक्स कहानी में पढ़ें कि जवान बेटी ने पहले अपने मम्मी पापा, पड़ोसी के साथ फिर मम्मी की चुदाई वीडियो देखी. इससे वो सिहर रही थी और बस पागलों की तरह ‘आअह उह अह …’ जल्दी जल्दी …’ की आवाजें निकाल रही थी.

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फिर उसने पूछा- मेरा ईनाम कहां है?मैंने पूछा- बोलो कितने पैसे हुए!उसने कहा- पागल हो क्या यार … तुझसे पैसे लूंगा. वह बिस्तर पर बिना कपड़ों के पसरी थी; अपनी मस्त चूचियों को अपने ही हाथों मसल रही थी. फिर मैंने उसे कहा कि अब हमारे बीच जिस्मानी रिश्ता बनने लगा है तो आज से तुम मेरे लिए अपनी चूत को बिल्कुल साफ सुथरी और चिकनी करके रखोगी.

एक बात और … हमारी गाली हम लड़कियों तक सीमित रहती है, वहीं लड़के अपनी गाली लड़कों तक इस्तेमाल करते हैं. शेखर मानो एकदम से मंत्रमुग्ध होकर स्क्रीन में ही खो गया; उसका हलक सूखने लगा.

अंततः मां की चुत का लावा फूट गया और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया, मैंने चुत रस पूरा अन्दर गटक लिया.

मैंने अपनी अंडरवियर उतारी और मेरा लिंग फुंफकारते हुए तन कर सावधान वाली मुद्रा में खड़ा हो गया.

उसके मुँह से आवाज निकलती, उससे पहले मैंने उसका मुँह हाथ से बंद कर दिया और लंड को चुत के अन्दर बाहर करने लगा. उसने मुस्कुरा कर कहा- पंकज सिर्फ देखने ही आए हो … या मेरा कुछ काम भी याद है?मैंने कहा- सॉरी यार तुम्हें देख कर तो मैं काम भूल ही गया था. ये बात जैसे ही सनी को पता चली तो सनी बोला- यार दीदी, मुझे रवीना की सील तोड़नी है.

आह ब्लैक नेट वाली ब्रा और पेंटी में क्या लग रहा था उसका बदन!मैंने उसकी केले के पेड़ के तने जैसी चिकनी जांघों और टांगों पर हाथ फेरा. वो दोनों भले ही पहचान के थे, लेकिन दोनों ही अभी अभी जवानी की दहलीज पर पहुंचे थे, तो शायद उन दोनों में कुछ गड़बड़ हो सकता था. यह सब सुन कर मेरे अन्दर नया जोश भर गया और मैंने दुगने जोश से फ़लक की चुदाई और शरीर की धुनाई शुरू कर दी.

पर इस सबमें सुकून की बात ये रही कि तेरे जीजा का मैंने इलाज करवा दिया और जब उन्होंने पूछा कि पैसा कहां से आया, तो मैंने उन्हें सब सच बता दिया.

भाभी बोली- रियली में आप हमसे प्यार करते हैं … कितना करते हैं! मेरे लिए आप क्या क्या कर सकते हैं?मैं बोला- आप जो बोलें. उस समय अकेले में मैं अपने मोबाइल में एडल्ट्स पिक्चर्स देखती रहती हूँ और अन्तर्वासना की गर्म सेक्स कहानियां पढ़ कर अपनी चूत में उंगली करके अपने आपको ठंडा कर लेती हूँ. ”सितारा जी, मैं बहुत सीरियस हूँ, अगर आप एक बार मिलने का मौका दीजिये तो मैं अपने दिल की बात कह दूँ.

उसने मुझे गले लगाने के लिए आगे आना चाहा, तो मैं खुद उसके पास जाकर उसके गले से लग गई. शेखर ने उस मद्धम सी रोशनी में अपनी दाहिनी ओर टटोलते हुए टेबल पर रखी उस पट्टी को ढूँढा. मैंने कहा- फ़लक, जो मैं कह रहा हूँ वही करो, जैसे भी हैं तुम बाहर आ जाओ, मैंने देखना है कि यह कितने छोटे हैं और तुम्हें कौन सा साइज चाहिए?फ़लक बोली- सर, इन कपड़ों के बटन ही बंद नहीं हो रहे हैं.

लगभग 20 मिनट चुदाई करने के बाद उसके झटके तेज हो गए तो मैं समझ गई कि विशाल अब झड़ने वाला है.

मैंने देखा चाची बाहर बरामदे में एक बड़ा सा बैग ले कर मम्मी के पास बैठी थी. भाभी बोलीं- चल झूठे … मैं मान ही नहीं सकती कि तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं है.

बीएफ बीएफ ww2 system price इस सब बीच में मुझे ये नहीं याद आया कि इन दोनों बाथरूम की दीवार एक ही है. भाभी की आह निकली और मुझे गाली देने लगीं- आह भैनचोद … आराम से डाल न भोसड़ी के!मैं बोला- भाभी, मैं बहनचोद नहीं हूँ.

बीएफ बीएफ ww2 system price और जब मेरी आंख सुबह चार बजे खुली तो शहज़ाद मेरे दूध को पकड़ कर सो रहा था. तभी धारा ने एक मैसेज भेजा- तो आपका नाम शेखर है?शेखर चौंक गया!उसने ललित को अपना परिचय दिया था यानि सिर्फ़ ललित को ही पता था कि उसका असली नाम शेखर है, वरना उसकी आइ.

उसने मेरी टांगों को फैला दिया और उनके बीच में बैठ कर मेरी चूत चाटने लगा.

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साथ ही अब उसने धारा के गले और उसके कान की लौ को अपने होंठों से चुभलाना शुरू किया. उस समय मेरे पापा मम्मी को कोई जरूरी काम था और वो कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर गए हुए थे. अब वो भी मेरी जीभ को अपने मुँह में खींच कर चूसने लगी थीं और साथ देने लगी थीं.

मैं फ़लक की चूचियों को काटने और चूसने लगा, नीचे से चूत में लण्ड सरासर अंदर बाहर हो रहा था. जब तक वो खुद को संभाल पातीं, तब तक दूसरी पिचकारी उनके होंठों को छूती हुई उनके गले और मेरे पेट पर गिर चुकी थी. इस सबके बीच एक बार फिर से शेखर और धारा के होंठ आपस में मिल चुके थे और दोनों एक दूसरे की जीभ आपस में लड़ा कर इस पल का भरपूर आनंद ले रहे थे.

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भैया ने कहा- दीपक, मैं 15 दिन के लिए कम्पनी के काम से बाहर जा रहा हूँ. थोड़ी देर चुदाई करने के बाद अबकी बार मैं और सुनीता दोनों ही अपने मुकाम पर पहुंचने वाले थे. ये देख कर गगन ने विक्रम, जो चमेली का ब्वॉयफ्रेंड था और अभिजीत, जो गगन की गर्लफ्रेंड का भाई भी था, उन दोनों को बुलाया और चमेली को चोदने के लिए कह दिया.

पापा ने एक प्लम्बर को दोपहर तक भेजा, तो उसने नल को देख कर कहा कि इसका नल बदलना पड़ेगा. दोस्तो … क्या नज़ारा था वो!मामी की गांड बिलकुल गोरी और चिकनी थी। जिसकी दरार के बीच एक छोटा सा गुलाबी छेद … मन तो कर रहा था कि उसी छेद मे अपना लंड डाल दूँ!पर सोचा इतनी प्यारी सी गांड है … इसे फिर कभी बड़ी तसल्ली से चोदूंगा. चरम पर जाकर स्खलित होने का अद्भुत नशा जिसे मैंने और नेहा ने मिलकर महसूस किया था।दो दिन तक मैं उनके घर पर उनके साथ रहा.

सुबह 8:00 बजे के करीब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि चारों लड़के अभी भी नंगे ऐसे ही सोए हुए हैं. मानस बिना किसी परेशानी के उस गोरी मैडम की गीली चुत, उसकी पैंटी के ऊपर से चाटने लगा.

भाबी मेरे सामान को बड़े गौर से देख रही थीं, जिसमें मेरे सामान की मोटाई साफ साफ दिख रही थी. वो नंगे ही मेरे ऊपर चढ़ गए और अपने घुटनों से उन्होंने मेरी जांघें चौड़ी कर दीं।फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और कहा- शबनम, बहनचोद! लंड घुसवाने के लिए तैयार हो जा रंडी।मैं बोली- जेठ जी प्लीज धीरे धीरे घुसाना. उर्वशी की चूत थोड़ी टाइट हो चुकी थी क्योंकि एक तो उसने काफी समय से सेक्स नहीं किया था और दूसरी बात ये कि मेरे लंड का साईज कुछ ज्यादा बड़ा है.

भाभी- नहीं … समझता क्या है तू अपने आप को … मादरचोद!इतने में भाभी ने मेरी ठुड्डी पकड़ कर मेरे सूखे होंठों को अपने दोनों होंठों से ढक दिया.

भाभी की चुत में फुच्छ फुच्छ करके रस टपका देते हैं, उन्हें भाभी की गर्मी शांत करने से कोई लेना देना नहीं था. तभी सैम ने कहा- अच्छा रात को मैं जिस हथियार से आपको खुश करूंगा … उसको आप अभी देखना चाहोगी?मेरी मां जब तक कुछ कहतीं … सैम ने अपने पैंट की जिप खोल दी और वो अपना मोटा लंड बाहर निकाल कर मेरी मां के सामने लहराने लगा. घर आने के बाद घर खाली था क्योंकि मेरे पति एक हफ्ते के बाद आने वाले थे.

ले देख कैसे निचोड़ा है तेरी बहन को!ये कह कर मैंने पूरी बेशर्मी के साथ अपना गाउन उतार दिया और बोली- देख तेरे दोनों जीजाओं ने तेरी जिज्जी को हर तरफ अच्छे से चोद कर निचोड़ दिया है. वो बोलीं- मैं तुम पर भरोसा कर रही हूँ, तुम मेरी इज्जत का ख्याल रखना.

भाभी उस दिन बला की खूबसूरत लग रही थीं, उन्होंने काली साड़ी पहनी हुई थी और वो बहुत सेक्सी लग रही थीं. फिर मयंक ने संगीता की गांड के छेद पर थूका ताकि छेद चिकना हो जाए और लंड को घुसाने में आसानी हो. इतने में भाभी अपने पल्लू को जैसे ही सम्भालने लगीं, तो उनकी तिरछी नजर मुझ पर पड़ी और वो जल्दी से उठ गईं.

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दस मिनट बाद मैंने उससे पूछा- तुमको मेरे मैसेज से कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है.

उसने मुझे घर में अन्दर बुलाया और बोली- आप पहले बाथरूम में जाइए और नहा कर आइए, फिर बैठिए. मयंक ने संगीता के चूतड़ों पर थप्पड़ लगाए तो संगीता के मुँह से आहह आह्ह आहह की आवाजें निकलने लगी थीं. तब जो दिल में दिमाग में हो वही आदमी हकीकत में भी करने से पीछे नहीं हटता है.

इतना कहते ही नीतू का चेहरा शर्म से लाल हो गया।मैंने नीतू का हाथ पकड़ा और कहा- चलो कमरे में चलते हैं. मैं थोड़ी गुस्से में बोली- ये क्या बकवास कर रहे हो?गौतम बोला- प्लीज़ दीदी बस एक बार!मैं बोली- दीदी भी बोलते हो और ऐसी सोच रखते हो. बीएफ सेक्सी चूत वालीइसमें आपको क्या अच्छा लगा और क्या बुरा लगा, वो जरूर बताना ताकि मेरी अगली कहानी इससे भी ज्यादा दिलचस्प हो.

पांच मिनट की चुदाई के बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैं बेहाल हो गयी. भाभी मदहोशी में गालियां दे रही थीं और गांड उठा उठा कर लंड लेने की कोशिश कर रही थीं.

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मैंने उससे पूछा कि तुम मुझे बुलाने में देर क्यों कर रही थी?उसने हंस कर कहा- मैं सेफ दिन के इंतजार में थी. मैं- फिर तुम्हारी गर्दन पर अपनी जीभ से गुदगुदी करूंगा और अपनी गर्म सांसें फेकूंगा. मैंने हिम्मत करके कुछ दिन के बाद फिर से मैसेज किया, फिर कोई जवाब नहीं आया.

उसने फिर से मानस की चुम्मी लेकर कहा- हां मेरे शेरू … अब तो तू जहां मुझे ले जाएगा, मैं तेरे पीछे भाग भाग कर आऊंगी.

मीरा ने निखिल से पूछा- कैसा लगा बेटा अपनी मौसी की चुत और गांड का स्वाद?निखिल बोला- आज बहुत मज़ा आया, अगर पहले पता होता कि मेरी मौसी इतनी रसीली है, तो मैं कब का आपकी चुत और गांड का बाजा बजा चुका होता. अब मैंने लंड फिर से चुत में चलाना शुरू किया, तो भाभी मुझे रोकने लगीं.

काफी दिनों तक मेरी निगाहों ने भाभी को वासना की दृष्टि से देखा तो भाभी समझ चुकी थीं कि मैं उनके शरीर को घूरता हूं. तभी गौतम ने मेरी ब्रा के हुक्स खोल दिए, जिससे मेरे दोनों पहाड़ पूरी तरह से आजाद हो गए. एक तरफ़ उसे धारा से मिलने और रोमांच से भरे वासना का खेल का जोश था तो दूसरी तरफ़ एक अनजाने डर से भी चिंतित था.

उसकी उठती गांड देख कर मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और उसको जोर जोर से चोदने लगा. आंटी की इस उम्र में भी उनकीचूत बहुत टाईट थीक्योंकि अंकल का लंड छोटा था और वो आंटी को कभी कभी चोदते थे. मैं तो हर वक्त बस यही सोचता रहता था कि आखिर ये भाबी बिना सेक्स के इतने इतने दिन तक कैसे रहती होंगी.

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फिर मैंने सोचा कि चुदना ही है, तो अपने जेठ से चुद कर थोड़े पैसे क्यों लूं? किसी अमीर आदमी के नीचे आकर ज़्यादा पैसे लूंगी. हॉट चैट स्टोरी में पढ़ें कि ऑनलाइन बने दोस्त ने अपनी बीवी से सेक्स की बात की तो वो भी बेचैन हो गया अपने सेक्स जीवन में कुछ नया करने के लिए. मैंने पूछा- शालू मजा आया!वो बोली- दादू पूछो मत … आज बहुत दिन बाद मजा मिला.

वो वासना से सिसकारियां भरने लगी और ‘आह आहह …’ करके गर्मी पैदा करने लगी. निखिल तेल की बोतल लेकर आया तो मीरा ने उससे पूछा- पहले कभी गांड मारी है?निखिल ने कहा- नहीं आपकी गांड पहली बार मारूंगा. सेक्सी बीएफ जानवरएक दिन मोनू, जो उनकी बेटी का नाम था … मेरे पास खेल रही थी, अचानक से वो रोने लगी.

चाचा ने हाथ बढ़ा कर चाची का एक निप्पल पकड़ा और मसलने लगे- साली तेरे निप्पल तो बढ़ते जा रहे … मेरी गैर हाजिरी में किसको चुसवा देती है.

मैंने खुश होकर तुरंत उसको फ़ोन किया और थोड़ा डांटा- इतने दिन लगा दिए … तुम्हारे बिना मेरा दिल ही लग रहा था. मैंने शीना को सोफे पर बिठाया और बोला- कोई बात नहीं शीना, सॉरी बोलने की कोई जरूरत नहीं है.

लेकिन कुछ टाइम बाद एक अंकल मकान की तलाश में आए और मेरे पिताजी ने उनको ऊपर का फ्लोर किराए पर दे दिया. तभी मैं उसके पास गई और उसके होंठों पर एक जोर का किस किया और कहा- जाकर चुपचाप अपनी जगह पर लेट जाओ. मगर जो कोई भी चूसता था, झड़ने के वक्त पर मुंह से बाहर निकाल देता था मगर रोहन ने ऐसा नहीं किया.

भाभी उस दिन बला की खूबसूरत लग रही थीं, उन्होंने काली साड़ी पहनी हुई थी और वो बहुत सेक्सी लग रही थीं.

उनसे बात खत्म करने के बाद उन्होंने मुझसे पूछा- अरुणिमा आप क्या कर रही हो?इससे पहले मैं कुछ बोल पाती, मेरी मम्मी ने बोल दिया कि इस टाइम ये कुछ नहीं कर रही है. इस बार की जो सच्ची लॉकडाउन सेक्स कहानी है, मुझे आशा है कि वो आपको पसंद आएगी. सभी पाठकों और पाठिकाओं का मुझे जैसा प्यार पहले मिलता रहा था, वैसे ही प्यार मेरी इस कहानी को भी मिलेगा, इस बात का मुझे पूरा यकीन है.

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वह मेरी चूत में अपनी जीभ अंदर तक डालकर अपनी जीभ से मेरी चूत को चोद रहा था. धीरे धीरे निखिल के लंड की चाहत को भी मीरा समझ गयी थी क्योंकि जब भी वो ऐसी कोई हरकत करती तो निखिल का लंड फूल कर उसकी इस क्रिया का अभिवादन करने लगता था. फिर भाबी ने मेरे विकराल लंड को अपने मुँह में ले लिया और मस्ती से लंड चूसने लगीं.

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अगर उस पल ‘एक लड़की को देखा, तो ऐसा लगा …’ वाला गाना सुनने को मिल जाता, तो जो होता … समझो मेरी वही दशा हो गई थी. मैं भाभी को फर्श पर लिटा कर उनके ऊपर चढ़ गया और अपने कपड़े खोल कर मैंने लंड को सीधे चुत की फांकों में घिसना शुरू कर दिया. उनके हस्बैंड सी आर पी एफ में थे, तो 7-8 महीने में एक बार ही कुछ दिनों के लिए आ पाते थे.

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मयंक के तेज धक्कों के कारण संगीता के चूतड़ मयंक की जांघ पर फट फट पटपट की आवाजें निकाल रहे थे और नीचे चूत में से फच फच पूच पूच की आवाज आ रही थी.

मौसी- अच्छा जी, क्या होगा देख कर?मैं- जानू तुम्हें चूत के रस का रंग ने कैसे गीला किया है, पैंटी को कैसे भिगोया हुआ है और कितना बड़ा धब्बा लगा है … ये देखना है. आंटी गांड उठाते हुए बोलीं- मैं तो तुझे बच्चा समझ रही थी, पर तू तो सच में बड़ा मादरचोद निकला … आह साले चोद अपनी आंटी को चोद हरामजादे … अन्दर तक पेल. चाची की बीएफ फिल्मबस मैंने कॉल कर दिया कि भाभी जी कहीं गई हो क्या … एक आदमी आया था, पता नहीं कौन था.

उस दिन वो शाम तक एकदम मेरे जिस्म से चिपका रहा, मौका तो था कुछ करने का लेकिन घर में मेरे शौहर थे … इसी लिए उस दिन मैंने कोई बात आगे नहीं बढ़ाई. काफी देर तक मैं कविता के ऊपर लेटकर उसे चूमता रहा, मेरा लण्ड उसकी चूत में ही धँसा हुआ था. अब उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा, मेरा लंड तो पहले से ही रॉड बना हुआ था.

फरियाल काफी दिन बाद चुद रही थी तो उसकी चुत की कसावट मेरे मोटे लंड को कुंवारी चुत सा मजा दे रही थी. ममता- चलें भैया, आप क्या सोचने लगे?अभय- अं … हं … हां … तुम चलो, कार में बैठो.

मैसेज पढ़ने पर पाया कि पहले मेरी बेटी ने ही शहज़ाद से बात शुरू किया था और उससे खुद से अपने प्यार का इज़हार किया था.

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उसी वक्त चाची ने अपनी दोनों टांगों की कैंची बनाकर मेरी कमर पर लपेट ली और बेहताशा मेरे गालों, होंठों और मेरी आंखों को चूमती रही. आशारा ने जब मुझे उठाया तो मैंने आशारा को अपनी बांहों में खींच लिया. पूरी मस्ती से भाभी आंखें बंद करे बड़बड़ा रही थीं- आह क्यों तड़पा रहा है … मादरचोद ऊऊऊ ईई या जोर से कर उंगली … विराज भड़वे … आआआ हहह पानीईई निकला रे!भाभी की मादक आवाजें मुझे और ज्यादा तड़पाने लगी थीं.

उसके मुँह से आह आहआह आःह्ह हम्म्म महाह आह की कामुक आवाजें फिर से तेज हो रही थीं. मैंने कुछ नहीं कहा और मैं रूम में चला गया, उर्वशी भी कमरे में आ गई.

मैं हंस कर बोली- ऐसा कर तू भी रवीना के साथ चला जा … और जब भी मौका मिले, चौका लगा देना.

मैं उसके पीछे गयी तो वो एक तबेले से होते हुए एक छोटी सी झोपड़ी के बाहर रुक गया. उसने तुरंत ही नहीं बोलते हुए कह दिया- मेरे साथ गंदी-शंदी बात मत किया करो. लगभग 10 मिनट तक लगातार लंड चूसती रहने के बाद भाबी मस्त होकर मेरी आंखों में वासना से देखने लगीं.

मैंने लंड को चूत के मुहाने पर लंड टिका कर उसकी कमर को कसके पकड़ कर जोर का धक्का मारा. अब रुचि अपनी चुत के बाजू में उंगली फेर रही थी और मैं उसे ताबड़तोड़ चोद रहा था. अब मैंने स्मृति के दोनों पैरों के बीच में आकर अपने लण्ड को स्मृति की चूत पर लगाया और हल्का सा अंदर को धक्का लगाया।लण्ड का अभी टोपा ही अंदर गया था कि स्मृति दर्द से चिल्ला उठी और कहने लगी- आह्ह मर गयी, बहुत दर्द हो रहा है।उसने शायद पहले चुदाई नहीं करवाई थी.

इसके बाद मैंने भाभी के अलावा दो और भाभी व एक मौसी को भी चोदा, वो सब मैं अगली सेक्स कहानी में लिखूंगा.

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मगर कहते हैं ना कि कोई किसी कांड को करने का मन बना लो तो सब खुद ब खुद हो जाता है. शादी करोगी मुझसे?” मैं अपने लंड को उनकी चूत पर फेरते हुए पूछने लगा. अभी तो मेरी चूत और गांड बाकी हैं!मेरे प्यारे पाठको, कैसी लग रही है मेरी फीमेल डोमिनेटिंग सेक्स स्टोरी?आप अपने विचार मुझे[emailprotected]पर मेल करें.

ममता अपने कमरे में आकर मन में सोचने लगी कि भाई का लंड अब मैं अपनी चूत में लेकर रहूँगी, चाहे कुछ भी हो जाए … इतना मस्त लंड तो मेरी चूत की शोभा बढ़ाएगा.

जीभ चुत पर लगी, तो वो तेजी से ‘आह्ह ईईईई उहहह …’ की आवाजें भरने लगी थी. गजब की चुसाई की उसने!मेरी तो आंखें बंद होने लगीं!मैं बोला- तन्नू! छोड़ो मेरा निकल जायेगा!उसने मुंह से लंड निकाला और बोली- आपने भी तो यही किया था!और फिर से चूसने लगी,मैं- तन्नू…जा…न!कहते-कहते मैं उसके मुंह में झड़ गया!वो लंड को होंठों में दबाकर सारा जूस पी गयी; एक कतरा भी नहीं छोड़ा. मुझे उसकी हरकत थोड़ी अजीब लगी, वो दरवाजे पर गयी तो देखा कि एक गबरू जवान लड़का खड़ा था.