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दीदी इस जोर के प्रहार से बिलबिला उठीं और बोली- आज आपको क्या हो गया है?परंतु जीजा जी ने कुछ सुना ही नहीं और पूरी ताकत से झटके मारने लगे.

मैंने सारे पर्दे डालकर कमरे में अंधेरा कर लिया और मैं चादर ओढ़ कर सो गया. तो उन्होंने कहा- हाँ तुम वाक़ई बहुत अच्छे हो तो वैसे अच्छे से बात करते हो. मेरे घर के लोग, जहां लाइन में खड़े थे, वहां पे मैं आ गई और उनके साथ बाजू में खड़ी हो गयी.

उसने मेरी छाती पर चूमना शुरू कर दिया और मैंने नीचे से हाथ ले जा कर उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर फिराना शुरू कर दिया. तभी साले अंकल ने मेरे बूब को काटा, मैं चिल्ला दी- उई अंकल आहह … ये क्या कर रहे हो … छोड़ो मुझे. चूसते-चूसते दीदी की ब्रा भीग गई तो दीदी बोली- मेरी ब्रा को क्यों खराब कर रहा है?मैंने दीदी की ब्रा को खोल दिया और चूचों को आजाद कर दिया। अब मैं बूब्स के निप्पल को चूसने लगा जैसे कोई बच्चा दूध पीता है।दीदी कहने लगी- भाई, इतनी ट्रेनिंग कहां से ले रखी है?मैं बोला- दीदी, मैं इस दिन का कब से इंतजार कर रहा था। आज जब आपके चूचे चूसने के लिए मिले हैं तो मैं कोई कमी नहीं छोडूंगा इनका दूध पीने में.

राधिका- अब मुझे समझ में आया कि तुम तब क्यों सोनल को छोड़कर दिशा को चोदने लगे थे.

तीसरी दीवार में दो दरवाज़े थे जिसमें एक मरदाना बाथरूम के लिए और दूसरा ज़नाना बाथरूम में जाने के लिए था. शादी के कुछ दिनों बाद ही हम लोगों ने शहर में ही एक किराये का अलग मकान लिया. लगभग कुछ मिनट बाद वो बाहर आई, तो उसे देख कर मैं फिर उत्तेजित हो गया.

अब तक मेरे मम्मों और चुत के मज़े ले रहे ससुर जी बोले- साली मेरी बहू तो मुझसे भी ज़्यादा तेज निकली. मैंने अपनी चुटकी में उसके निप्पलों को पकड़ कर मसला और वो चिहुंक गई- आह्ह … आराम से करो … दर्द हो रहा है. मैं वहीं पर खड़ा होकर उस लड़के का चेहरा देखने की कोशिश करने लगा लेकिन उसकी पीठ दरवाजे की तरफ थी.

इधर बिना किसी डर के, काल्पनिक नाम रख कर हम अपनी दिल की बात सभी के साझा कर सकते हैं.

कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि रात को सोते समय मेरी वासना ने मुझे मोनी के बदन को छूने के लिये मजबूर कर दिया. मैंने फ़ौरन वसुन्धरा के ब्लाऊज़ के हुक खोलने शुरू किये और दो क्षण में ही वसुन्धरा के ब्लाऊज़ दोनों पटल दाएं-बाएं खुले पड़े थे और अंदर लेसिज़ वाली डिज़ाईनर ब्रा में दो हंसों का जोड़ा अपनी झलक से वातावरण चकाचौंध करने लगा.

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भाई बहन चुदाई कहानी की पिछली कड़ी में आपने पढ़ा कि मेरी शादीशुदा दीदी हेतल अपने पति के साथ कुछ दिन के लिए हमारे साथ ही रहने के लिए आई. जीजा-साली दोनों ही एक दूसरे के जिस्म को ऐसे भोग रहे थे जैसे इससे पहले न तो जीजू ने किसी महिला को नंगी देखा हो और न ही मानसी ने किसी मर्द को नंगा देखा हो. तभी भाबी ने मुझे इतनी गंभीरता से खिड़की से नीचे झांकते हुए देखा, तो कहने लगीं- क्या हुआ देवर जी … तुम नीचे क्या देख रहे हो?मैं उनसे कुछ कहता, इससे पहले भाबी मेरे सिकुड़े हुए लंड की तरफ इशारा करते हुए कहने लगीं- और अपने इस औजार को तो देखो, कैसा चूहे सा सिकुड़ गया है.

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मेरा दोस्त ज्योति आंटी के मुंह में लंड डाल कर उनको अपना लंड चुसवाने लगा और मैंने आंटी की चूत की चुदाई शुरू कर दी.

वे अपनी आँखें बंद करके चुदाई की मस्ती में डूबी थी और मैं मन ही मन ये सोच रहा था कि आज रजिया फँस गयी है. कुछ दिन गुजर जाने के बाद आखिरकार वह दिन भी आ ही गया मेरी जिंदगी में. यूं समझिये कि शहर में जहाँ शाम को चाय का वक्त होता है मेरे नाना के गांव में उस वक्त डिनर का टाइम हो जाता था.

लेकिन फिर भी घर के अंदर ही मौका पाकर कभी उसके होंठों को चूस लेता और चूचों को दबा दिया करता था. उसका लगभग रोज का काम था कि शराब पीने के बाद हमेशा घर पर आकर झगड़ा करना. धक्का इतना ज़बरदस्त था कि रानी का बदन झनझना उठा और ऐसा लगा कि लंड ने बच्चेदानी पीछे की धकेल डाली हो.

मुझे भी चूत चाटने की ऐसी लत लगी कि मैं अब जब भी किसी को भी चोदता हूँ, तो पहले चूत चाट कर उसे 2 से 3 बार झड़ा देता हूँ, तभी लंड लगाता हूँ. मैंने भी तुरंत हामी भर दीशनिवार को मैंने अपनी बुआ से बोला- बुआ मेरी फ्रेंड स्वाति का आज बर्थ-डे है, उसने मुझे अपने घर बुलाया है.

मेरे भैया को ये बात पता भी नहीं थी कि उनका एक दोस्त उनसे मिलने आता है तो मुझे देखता रहता है. मुझे बहुत कस कर गुस्सा आया और मैंने उसको बोलने के लिए उसकी तरफ अपना सर उठाया, तो मेरा सारा गुस्सा गायब हो गया और मेरी गांड फट के हाथ में आ गई … क्योंकि ये पूजा नहीं थी कोई और थी … जो सिर्फ उसके कपड़ों को पहने हुए थी. मगर मैं जब भी आगरा जाऊंगा तो उस सेक्सी टीचर की चुदाई करके जरूर आऊंगा.

मैंने उसके दुपट्टे को उतार कर डेस्क पर डाल दिया और उसके सूट के ऊपर से उसके चूचों को दबाने लगा.

उसके मुँह की गर्मी के आगे मेरा लंड ज्यादा देर टिक नहीं सका और उसके मुँह में ही झड़ गया. मैंने पिन को उसके एक निप्पल पर धीरे से चुभो दी, तो वो आहें भरने लगी. मैंने कहा- चलो अभी उसकी चूचियां दबाओ और उसे नंगी करो … मैं देखती हूँ कि तुम्हारे साथ कैसे नहीं करती.

मैं आगे से चूत को चाट रहा था और पीछे गांड के छेद को उंगली से चोद रहा था. माँ बोलीं- क्या हुआ, आज नहीं चोदेंगे क्या?लेकिन मैंने फिर सोचा वैसे भी इनको कहां कुछ दिख रहा है … और मैंने मौके का फायदा उठाने का सोच लिया.

फिर कुछ कलर सिलेक्ट करने के बाद उसने एक दो लैगिंग ले ली और हम वापस आ गये. मैंने उसको वहीं सोफे पर लेटा दिया और जोर से उसके चूचों को दबाने लगा. मैं अपनी पूरी जीभ उसकी छोटी सी चूत में घुसा घुसा कर चाटता रहा और अन्दर बाहर करता रहा.

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दोस्तो, एक अकेली औरत अपने आपको कब तक चुदाई से रोक सकती है, जब वो घर में अकेली रहती हो … उसके बच्चे भी साथ न हों, तो खाली दिमाग शैतान का घर होता है.

मैं बी-टेक के फाइनल ईयर में था, तो मैंने सोचा क्यों ना पार्ट टाइम में कोई जॉब कर लिया जाए. हम लोग चुदाई करते करते हुए तीन पैग खत्म कर चुके थे, पर चुदाई खत्म नहीं हो रही थी. मेरी ईमेल आईडी है[emailprotected]मुझे आपके अमूल्य फीडबैक का इंतज़ार रहेगा.

मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने उसकी चूची को अपने हाथ में भर लिया और उसको दबाने लगा. अब इतनी देर में मैं भी उन दोनों से काफी फ्रेंडली हो चुकी थी, इसलिए वो भी बातों बातों में मुझे टच करने लगे थे. जंगल में सेक्सी वीडियो देहातीआज वो साउथ अफ्रीका में एक कंपनी में अच्छी पोस्ट पर सर्विस कर रहा है.

मैंने कहा- तो अब तुमको मुझ पर विश्वास हो गया या नहीं?वह बोली- हाँ, मुझे तुम पर विश्वास है. उसकी इस पहल से पहले तो मैं हड़बड़ाया, लेकिन तुरंत ही सम्भल गया और उसका साथ देने लगा.

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वो मस्त होने लगी और उसने अपने हाथ फैला दिए और अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया. क्या बताऊं मज़ा आ गया था … आज भी वो सीन याद आता है … तो बहुत तड़फ उठता हूँ. जब पूरी तरह से मेरी फुद्दी गीली और गर्म होकर फूल गई तो जीजा जी कहने लगे कि जान … थोड़ा सा दर्द हो सकता है पर मैं आराम से डालूँगा.

वैसे तो सारी कहानियां अपने-आप में सम्पूर्ण हैं, फिर भी पुरानी कहानियों पहले पढ़ लेने से आप को नयी कहानी का ज्यादा आनंद आयेगा, यूं नहीं भी पढ़ेंगे तो भी चलेगा.

बहुत दिनों से मेरा भी अपनी मन कर रहा था कि मैं भी अपनी कहानी लिखूँ. शायद उसे मजा आ रहा था। मैं उसके बदन की गर्मी को महसूस कर सकता था। उसका बदन एक दम तवे के माफिक गर्म था।मैंने उसे गर्दन पर किस करते हुए उसके हाथ की रस्सी खोली और मैं उसे इसी हालात मैं छोड़ कर किचन में गया। फ्रिज़ से मैं आइस ट्रे उठा लाया।प्रीति:मेरा रोम-रोम उत्तेजित था.

पार्टी में बहुत सारे लोगों को आना था, तो मैं सज धज कर जाने के लिए तैयार होने लगी. मैंने काजल से पूछा- क्या डाल दूँ?वो मुझसे कुछ गुस्से में और कुछ घिघियाते हुए सी बोली- जीजू प्लीज डाल दो ना … मज़ाक मत करो. मैंने भी भाभी की साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज को खोल कर ब्रा में फंसे उसके दूधिया मम्मों को देखने लगा.

मेरी पिछली कहानीकमसिन कम्मो की स्मार्ट चूतजो लगभग 6 महीने पहले प्रकाशित हुई थी, उसके बाद से कुछ नया लिखने का संयोग बना ही नहीं. कई बार भाभी की चूत चोदने के बाद उसने अपनी सहेलियों से भी मेरा परिचय करवाया. पढ़ते पढ़ते मेरी चूत गीली हो गयी और मैं अपनी चूत में उंगली घुसाने लगी.

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मेरी बात का जवाब देते हुए काजल ने मेरे अगले सवाल का मुंह ऊपर उठने से पहले ही उसको अपने जवाब की जूती से जैसे रौंद दिया क्योंकि मैं इसके बाद यही पूछने वाला था कि घर में कौन-कौन है!खैर, अब जब बात शुरू हो ही गयी थी तो आगे बढ़ानी भी जरूरी थी लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि और क्या बात करूं. मैं बिल्कुल धीरे-धीरे और आहिस्ता-आहिस्ता से ही मोनी के बदन को अपने शरीर से घिस रहा था.

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उसकी बात मान कर भाभी और मैंने पैग उठाया और एक एक सिप लेकर हम लोग काम पे लग गए. फिर उसने बुरके को ऊपर किया और मेरी लेगीस थोड़ा नीचे सरका के अन्दर हाथ डाल दिया और मेरी मुलायम गांड को दबाने लगा. कुछ देर के बाद जब मैंने पीछे मुड़ कर देखा, तो पाया कि आतिशा रूम के दरवाजे पर खड़ी होकर फिल्म देख रही थी.

वेलम्मा हिंदी कॉमिक्सहम दोनों लोग एक दूसरे के बारे में बहुत कुछ जान गए और पसंद-नापसंद के बारे में भी जान गए कि हम दोनों लोगों को क्या पसंद है और क्या नहीं. भाभी ने कहा- मैं तो तेरी भाभी हूँ, मुझसे कैसी शर्म … चल अपना औजार बाहर निकाल कर दिखा मुझे.

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मैंने दोनों को हैलो बोला और थोड़ी देर बात करने के बाद हम सब होटल में रूम लेने के लिए निकल गए. सुमन को सेक्स करने या सेक्स के दौरान होने वाली अनुभूतियों के बारे में कुछ भी नहीं पता था. क्योंकि ये तो वही साड़ी थी, जिसे मैंने चुदाई करते वक़्त खिड़की से देखा था.

मुझे कुछ सूझता, उससे पहले माँ ने मेरे पजामा में हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ लिया. नम्रता मेरी नाक पकड़ते हुए बोली- शरद अगर तेरी बात सही निकली, तो तुझे मेरे मर्द ने मेरी किस तरह चुदाई की, पूरी कहानी बताउंगी. मेरी आंखों से आंसू निकल गए, मेरी बुर फट चुकी थी और झिल्ली फटने से खून बहने लगा था.

फिर जब उसने मेरी चूची को दबाने के बाद मेरे निप्पल को दबाया तो मेरी सिसकारियाँ निकल गयीं. दो मिनट बाद मनमीता के मुंह से कामुक सीत्कार फूटने लगे और वो मुझे बांहों में भर कर प्यार करने लगी. मैं उसे ढूंढता हुआ घर के पीछे एक अलग सा गोदाम था जो सुनसान रहता था, उसमें गया.

आंटी बोली- ये सब क्या है सुमित?मैंने कहा- कुछ नहीं आंटी …इतने में ही वरूण ने पीछे से आकर आंटी को पकड़ लिया. मेरे होंठ उसकी कमर के नीचे चल रहे थे और मेरा एक हाथ उसकी चुचियां दबाने में लग गया.

राधिका ने मेरी पीठ पकड़ ली थी और वो गांड उठा कर अपनी चूत में लंड लेने लगी थी.

मम्मी के कंठ से आवाज निकलने लगी- ग्लोप … ग्लप … ग्लोप उम्ह म्म्मम् … वाह क्या टेस्ट है तुम्हारे लंड का … मजा आ गया … उऊ ओंम्म्म … सृलपप अअअह. सेक्सी ओपन बीपी मराठीसरिता एक कामुक मुस्कान के साथ बेड से उठी और एक मादक अंगड़ाई लेकर बोली- पापा आज किसी को पक्के में बुलाकर हम दोनों को मज़ा दिलवा दो … आप तो रोज़ ही कहते हैं. पुतले की सेक्सीमैंने देखा कि मेरी माँ के बूब्स बहुत ही मोटे थे और उसके निप्पल बिल्कुल भूरे रंग के थे. मैं जान गई कि उनका वीर्य दीदी की गांड में पिचकारी के रूप में भरने लगा है.

इसके बाद मैंने उसके होंठों पर किस किया और पूछा- क्या तुम्हारी सलवार भी निकाल दूँ?उसने मुझे चूमते हुए कहा- अब क्या दिक्कत है … निकाल ही दो बेबी.

फिर मैंने भी धीरे से करवट बदल कर अपना मुँह दूसरी तरफ‌ कर लिया और चुपचाप सोने की कोशिश करने लगा. कुछ ही देर में कूलर के सामने लेटने से मुझे नींद आने लगी और मैं सोने के लिए कहने लगा. अभी थोड़ा सा ही लंड अन्दर डाला था कि वो चीखने लगीं ‘आआय यीईई आह्ह्ह ओह्ह … मर गयी!’मैंने उनकी चिल्लपों पर ध्यान नहीं दिया.

उन्होंने मेरे दोनों बड़े बड़े दूध को दोनों हाथ से सम्हाला और मेरे गुलाबी निप्पल को चूसने लगे. दिन के समय दोपहर में मेरी बहन नहाने के बाद मेरा हाफ पैन्ट पहने हुई थी. मुझे डर था कि कहीं बनी बनाई बात बिगड़ न जाए … न जाने फिर मौक़ा आए न आए! यही सब दिमाग़ में था और मैं नहा कर वापस आया.

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अभी मैं लंड चूस ही रही थी कि पीछे से अजय हाथ में सिगरेट लेकर आया और बोला- साली कुतिया मादरचोदी … आराम से लंड खा … एक और भी लंड है तेरी गांड फाड़ने के लिए. उसके कोमल हाथों में जाकर बात मेरे लौड़े के काबू से बाहर हो गयी और मैंने उसकी सलवार को खोलकर नीचे गिरा दिया, घुटनों के बल मैं मनमीता की टांगों के बीच में बैठ गया. मैंने इधर की कामुक कहानियों को पढ़ कर सोचा कि क्यों न अन्तर्वासना के दूसरे पाठकों के साथ मैं अपनी कहानी को भी साझा करूं.

हाँ … हाँ यही बात है!” वसुन्धरा के बारे में सोचते हुए और ख्यालों में उलझे हुए मेरे मुंह से ये शब्द निकल गए.

तकरीबन चार पांच दिन बाद रक्षाबंधन था, तो उनके पति अपनी बहन के पास मुंबई चला गया.

मेरी पिछली कहानीकमसिन कम्मो की स्मार्ट चूतजो लगभग 6 महीने पहले प्रकाशित हुई थी, उसके बाद से कुछ नया लिखने का संयोग बना ही नहीं. तभी भाभी बोली- क्या हुआ कुछ गड़बड़ है क्या?मैंने कहा- नहीं भाभी … आप गजब लग रही हो. देहाती सेक्सी हिंदी चुदाईवो भी बेबाक हो कर बोली- वो चीज क्या … साफ़ बोलिए न?मैंने कहा- छोड़ … तू नहीं समझेगी, तू अभी छोटी है.

फिर एक दिन शाम को जब मैं लेटा हुआ था तो मेरे फोन पर एक अन्जान नम्बर से कॉल आया. बस फिर क्या था, चूत से हथेली ऐसी चिपकी कि जब तक उसकी चूत का माल बाहर नहीं आ गया, तब तक चूत की मसलाई होती रही. वो दर्द से बिलबिला उठी- आहह आहह आहह!मैंने उसके कानों में कहा- व्हाट आई सेड?? (मैंने क्या कहा था?)आहह आहहह सीईईई … नो … उम्म्मम क्लोथ्स मास्टर.

वसुन्धरा के वक्ष पर मचलती मेरी उँगलियों की जुम्बिश और वसुन्धरा के मुंह से निकलने वाली सिसकारियों की तेज़ी में ग़ज़ब का तारतम्य था. एक बार फिर से अपने अफ़साने के सच्चा-झूठा होने का फैसला मैंने अपने पाठकों के विवेक पर छोड़ दिया है, अगर आप का मन इस को सच मानता है तो इसे सच जानें, अगर आपका मन इसको काल्पनिक मानता है तो इसे काल्पनिक ही मानें.

अंकल जी ने मेरी हालत समझ प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेरा और मेरा गाल चूम के मुझे अन्दर लिवा ले गए और ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठा दिया और मेरी बगल में बैठ कर यूं ही हल्की फुल्की बातें करने लगे.

ये मुझे चोदने के लिए अपने शहर से आये हुए बैठे थे और मैं उनसे दूसरे ही ढंग से पेश आ रही थी. पांच मिनट की चुसाई में ही मैंने भी अपना माल उसके मुंह में निकाल दिया और कुछ देर तक लंड को उसके मुंह में ही फंसा कर रखा. फिर एक महीने बाद उसके घर से सब गेस्ट जा चुके थे, तो मैं रात को निहारिका के घर चला गया.

सरदारों की सेक्सी चुदाई मैंने आपको कोई और ही समझ बैठी!” मैंने खड़े होकर उन्हें नमस्कार किया और हाथ जोड़कर लजाते हुए उनसे माफ़ी मांगी. दो मिनट तक दीदी के होंठों को चूसने के बाद उसने मुझे अपने से अलग कर दिया.

बाद में जब वो मेरी चूत में अपना लंड डाल कर मेरी चूत को चोदने लगा, तो मेरी चूत में उसका लंड आसानी से अन्दर बाहर होने लगा. बुआ जी मेरे ताऊ की गांड को पकड़ कर दबा रही थी और उनका माल बाहर निकलवाने में मदद कर रही थी. कसम से मॉम के वो बड़े बड़े मम्मे और उनके ऊपर वो काले चूचे देखकर ऐसा लगता है कि बस उनको पकड़ कर चूस लो.

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मैंने वहां से अपना मुँह हटाया और उसकी चूत को उसी के ब्लाउज से साफ करके वापिस चूत को चाटने लगा. आहा … मैंने आंटी की चुत को अपने मुँह में भर लिया और जोर से दबाने लगा, काटने लगा. आपने मेरी पिछली तीन सेक्स स्टोरीजसाठा पे पाठा मेरे चाचा ससुरशादी में चूत चुदवा कर आई मैंशादी का मंडप और चुदाईको बहुत प्यार दिया, उसके लिए आपका धन्यवाद.

मैंने लण्ड पर क्रीम लगाकर उसकी चूत के लब खोले और ढीला ढाला लण्ड हाथ के सहारे से चूत में डाल दिया और धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा. फिर पूजा उस लड़की की तरफ देखा, तो वो भी अपना गाल पकड़ कर हां में अपना सर हिलाते हुए बोली कि तू ऐसे ही खड़ी रहेगी या कुछ कपड़े भी पहनेगी?ये बोल कर उसने आंख मार दी.

मैंने रात को ही अपने शरीर के सब बाल साफ कर लिए और अगले दिन ग्वालियर के लिए चल दी.

सभी मदमस्त चूत़ों को मेरे सांवले लंड का गुलाबी सलाम और सभी पाठकों को मेरा नमस्कार. मैं और मेरे पापा हमेशा एक ही टाइप का पजामा पहनते थे तो माँ को वैसे भी समझ नहीं आने वाला था कि वहां पे मैं सोया हूं, पापा नहीं. हम दोनों बहुत देर से एक दूसरे से बात कर रहे थे और अब तो हम लोग एक दूसरे से घुल मिल गए थे.

घर आकर मैं अपने रूम में चला गया और आंटी भी अपने काम में व्यस्त हो गईं. मेरी उम्र 28 साल है और अच्छी सेहत के साथ-साथ 6 इंच लम्बे और 2 इंच मोटे लंड का मालिक हूँ। यह मेरी सच्ची कहानी है जो 2 साल पहले एक भाभी के साथ घटित हुई थी। उस भाभी का नाम सायमा था. वक़्त के चलते मुझे ये भी समझ आ गया कि ये सब लोग आखिर मुझ लड़की को यों बेशर्मी से देखते क्यों हैं और मुझसे चाहते क्या हैं.

मुझे कुछ सूझता, उससे पहले माँ ने मेरे पजामा में हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ लिया.

यूसी बीएफ: कुल मिलाकर कामुक पुरुषों के लिए आँखें सेंकने वाली चीज हूं मैं!मैं विवाहिता हूं, दो बच्चे हैं दोनों अभी स्टूडेंट्स हैं, मेरे पति उच्च सरकारी सेवा में हैं और मैं स्वयं किसी बैंक में अधिकारी वर्ग में हूं. वो बोले- हमने सब सुन लिया है कि तुम बाप-बेटी यहां पर चुदाई कर रहे थे.

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मेरे ताऊ जी जिनकी उम्र 48 साल की है वो रंग के गोरे, शरीर के लम्बे और सेहतमंद इंसान हैं.

उसने कहा- मैं आज दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान हूँ, जो मुझे तुम जैसी अप्सरा को चोदने का सौभाग्य मिला. फिर भाई ने अपना लंड मेरी चूत से निकाला, तो देखा उसमें हल्का हल्का खून लगा हुआ था. अपने आगरा के मोहल्ले के उन दो लड़कों में से किसी एक लड़के से चुद कर खुजली मिटाने का मन ही रहा था.