देसी गांव का बीएफ

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ये कहते हुए मुझे बहुत दुख हो रहा है क्योंकि मैं इससे बहुत प्यार करता हूँ, पर किस्मत के आगे क्या कर सकते हैं. जपान सेक्स व्हिडिओअन्तर्वासना पर ये मेरी पहली सेक्स स्टोरी है गर्लफ्रेंड की चुदाई की.

उसने कहा- चड्डी के अन्दर क्या है?मैंने उसका लंड मसलते हुए कहा- इसको देखना है. राजपूतों की चुदाईमैंने उसको अपनी बांहों में भर लिया और उसे दोबारा से होंठों पर किस करने लगा.

मैं- अच्छा!सुरेश- क्या बोलती हो … एक बार और हो जाए? अभी समय भी बहुत है.देसी गांव का बीएफ: मैंने कहा- मगर मामी अगर आपको गर्भ ठहर गया तो?वो बोली- तो क्या हुआ? किसी को पता नहीं चलेगा कि मेरे पेट में किसका बीज है.

उसके जिस्म को खूब सहला सहला कर मैंने चुप करवाया और उसका मोबाइल लेकर मैंने अपने नम्बर पर रिंग करके उसका नम्बर ले लिया.मेरी उत्तेजना को उसने दोगुना बढ़ा दिया था और मैं उसे उत्साहित करने लगी.

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इसके बाद हम दोनों साथ में बेड पर आराम से बैठ गए, मैं पैर फैला कर बैठ गया और वो मेरे पास बैठ गई.तत्पश्चात् एक दो बार उर्वशी की चूत पर अपना लंड पटका और फिर उसके योनि मुख पर अपने गुलाबी सुपाड़े को सेट कर दिया.

उनकी बात पर मैंने पूछा- आपने क्या खास तैयारी की है?वो बोली- तुम खुद ही देख लेना. देसी गांव का बीएफ उसने दीदी की टांग को और फैला दिया और उसकी चूत में लंड को पेलने लगा.

पढ़ाई करते हुए मैंने नोटिस किया कि सोनू मेरी लोअर की तरफ आज ध्यान दे रही थी.

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लेकिन इसी बीच मेरे पति को शक होने लगा था कि मैं उनके जाने के बाद किसी से बात करती हूँ. उसे भी समझ आ गया होगा कि मैं इस कामक्रीड़ा के खेल में कितनी माहिर हूँ. ’ये अभी मेरे मन में चल ही रहा था कि अचानक उसने मुझसे पूछा कि तुम कहां से हो?मेरे मुँह से निकल गया- मस्त माल.

उसके बाद मैंने ऑनलाइन वेज बिरयानी मंगवाई और उसे खाकर घर की तरफ निकल आए. तब राजशेखर ने मुझसे कहा- जब तक निर्मला मुझे तैयार करती है, मुझे अपना दूध पिलाओ. उस समय तक हमने कभी सेक्स नहीं किया था लेकिन हम दोनों अपने पहले सेक्स के लिए उतावले हो रहे थे, चूत स्टोरी बनाने के लिए आतुर हो रहे थे.

मैं दोस्त को आवाज देने ही वाला था कि इतने में बाथरूम का दरवाजा खुला, मैंने देखा कि मेरे दोस्त की माँ मोनिषा मेरी आंखों के सामने सिर्फ टॉवेल लपेटे हुए थीं और वो टॉवेल भी बस मोनिषा आंटी को नाम मात्र ही ढक रहा था. क्योंकि मैंने स्ट्राबेरी फ्लेवर वाला कंडोम चढ़ाया था और उसको स्ट्राबेरी पसंद थी. सेक्सी आंटी की ये हॉट स्टोरी आपको कैसी लगी … मेरी इस सेक्स कहानी के लिए आप मुझे मेल करके बताएं.

अब मैं समझ चुका था कि लोहा गर्म हो गया है, हथौड़ा की जगह लौड़ा मार देने में ही कुशल मंगल है. पहली नजर में ही दिल से लेकर लौड़े तक को घायल कर गई थी वो गुदाज बदन की मल्लिका.

वो मॉम के पेटीकोट को ऊपर करके अपना लंड, मेरी मॉम की मोटी गांड में डालने लगा.

जब वो मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहला रही थी तो लगा कि जैसे मेरा वीर्य कुछ ही पल में निकल जायेगा.

मेरा लंड फिर से चूत की गहराइयों को नापने लगा और वो आनन्द के सागर में अन्छुई और अनदेखी गहराइयों को महसूस करने लगी. लेकिन मैं उसके साथ कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहता था, जिससे वो गुस्सा हो जाए. मैं उनके बिल्कुल पास गया और अपने लंड को हिलाते हुए बोला- मुझे तो सिर्फ एक चूत चाहिए थी मारने को, यहां तो दो दो हैं.

कोई दस मिनट की चुदाई के बाद मैंने भी अपना वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया. जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर गया तो मानो उसको करंट लग गया हो, वह उछल गयी और मुझसे लिपट गई।मैंने देर न करते हुए उसकी पेन्टी भी उतार दी और उसकी चूत को अपने हाथ से रगड़ने लगा, वह मदहोश हुए जा रही थी।फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और आ गया उसके ऊपर!मैंने अपने लण्ड पर कंडोम चढ़ाया, उससे पूछा- डाल दूँ?तो वो कहने लगी- देर मत लगाओ … बस जल्दी से डाल दो. सुनील को भी मेरी स्थिति के बारे में पता चल रहा था और वह भी गहरे धक्के लगाकर मुझे अपने चरम पर पहुंचाने मैं मदद करने लगा.

मैंने उसकी चूत को चोद चोद कर बहुत फैला दिया था … और अब उसे चोदने में पहले जैसा मजा नहीं आता था.

उसने दीदी की चूत पर लंड को लगाया और उसकी चूत में लंड को धीरे धीरे अंदर डालने लगा. उसकी मादक सिसकारियां निकल रही थीं और उसने चादर को कस कर पकड़ लिया था. मैं आपको अन्तर्वासना पर मेरी प्यासी जवानी की पहली सेक्स कहानी से आपके लंड और बुर को गीला करवाने का पूरा प्रयास करूंगा.

अब दीदी के मुंह से जोर जोर की आवाजें निकलने लगी थीं जो कमरे के बाहर तक आ रही थीं. मेरे हाथ उसके चूचों को दबाने लगा और उसकी बांहें मेरे गले में आकर पीछे से मेरे बालों को सहलाने लगीं. फिर दूसरे लड़के के बारे में बताते हुए भाभी ने कहा- मैं दूसरे को नहीं पहचान पायी.

फिर वह पीछे पड़ गई- मुझे चोद अभी चोद बहन के लोड़े! नहीं तो मैं तेरी जान ले लूंगी! अभी चोद मुझे … मैं तुझे छोडूंगी नहीं!और सच में उसने मंगल को कस के पकड़ लिया और पागलों की तरह उसे यहां-वहां काटने लगी.

हम दोनों कमरे के अन्दर गए और जाते ही मैंने अन्दर से गेट बंद कर लिया. जैसे जैसे मेरे हाथ उसकी जांघों को सहला रहे थे उसकी सांसों की गति भी बढ़ती जा रही थी.

देसी गांव का बीएफ मेरे दोस्त की बहन मुझे बेहद पसंद करती है और वो मेरे लिए कुछ भी कर सकती है। मैं भी वासना से उसे चोदने की चाह रखने लगा. पेपर्स की वजह से मेरी बहन की छुट्टी थी तो वह घर पे ही थी।जब देर तक मैं लंच करने नहीं गया तो वो मुझे देखने मेरे कमरे में आ गयी.

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वे समझ तो गए पर मुस्कुरा कर रह गए।बाहर यूरिनल में पेशाब करके लंड धोकर आए व सो गए.

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नीचे दी गई मेल आईडी आप पर मेल जरूर करें और चाचा की जवान बेटी की चुदाई की कहानी पर कमेंट करके भी अपनी प्रतिक्रिया दें. विभोर मेरी चूची को चूसने लगा और मेरी चूची को दबाने लगा और साथ में वो गाल को कभी कभी अपने दांतों से काट रहा था. आंटी ने एकदम आह भरी और बोलीं- बहुत जोर से करो …आंटी अब इतनी अधिक खुल चुकी थीं और बहुत प्यारी लग रही थीं.

पर पढ़ाई में मेरा बिल्कुल मन नहीं लग रहा था, मुझे तो बस आंटी ही दिखाई दे रही थी. उसने जैसे ही दरवाजा बंद किया, मैं उसको पीछे से कसके पकड़ कर उसके स्तन दबाने लगा. मैं जान बूझ कर लंड में झटके दे रहा था ताकि चाची मेरे लंड को देख कर उत्तेजित हो सके.

आंटी अपने कपड़े गहरे गले के पहनती थीं, इसलिए उनके मम्मों की दरार हमेशा साफ़ दिखती थी.

बुआ बाथरूम में जाकर अपनी चुत को साफ करके वापस आ गईं और चादर बदल कर हम दोनों सोने लगे. कुछ ही देर में सब नंगी हसीनाएं मंगल के नंगे जिस्म पर टूट पड़ी, उसे जगह-जगह चूमने लगी, किस करने लगी, काटने लगी और प्रीति जो कपड़े खोलने में शर्मा रही थी अब बेशर्म बनती हुई अपनी चूत को मंगल की जाँघों पर रगड़ने लगी. आकार में ऐसे उठे हुए थे जैसे कह रहे हों कि आकर हमें दबा कर पूरा दूध बूंद बूंद करके निचोड़ दो.

वो बार-बार बोल रही थी- डियर महेंद्र, मुझे अब और मत तड़पा … मुझे चोद ले महेंद्र … आआआह मेरी चूत में अपने लंड को डाउनलोड कर दे. उनको वासना का नशा चढ़ने लगा, कुछ ही देर में उन्होंने खुद अपना दुपट्टा निकाल दिया और अपना हाथ मेरे हाथ पर रख कर अपने मम्मों को दबवाने लगीं. मैंने उसके कंधे पर अपना सिर रखा और दोनों हाथ पीछे ले जाकर कपड़े खोलने लगा.

भाभी को भी पता चल गया कि मेरा लंड उसे सलामी दे रहा है, तो उसने कहा- तेरे लंड को अभी भी मेरी चूत चाहिए … देख कैसे इशारे कर रहा है. मैं उठ कर पोजीशन में आ गया और बुआ मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगीं.

उसकी चूची चुसाई से मेरे मुँह से कामुक आवाजें निकलने लगी- आंआह … उन्हह … उई … इस्स … धीरे … आह मैं मर गयी. मैंने उसकी बात को अनसुना कर दिया क्योंकि मुझे अभी उसको और गर्म करना था. लंड की तरफ ध्यान जाते ही बहू की गांड का अहसास पाते ही मेरे लंड में तनाव आना शुरू हो गया.

कभी कभी वह अपनी जीभ से मम्मी की चूत के दाने को छेड़ देता, तो मम्मी कसमसा जाती थीं.

मैंने भी लोअर ही पहनी हुई थी इसलिए लंड अलग से तना हुआ दिखने लगा था. वो बोली- अभी तो रात है … कोई नहीं देखेगा … और अगर देखता है, तो देखने दो. बस धक्के पर धक्के मारता है … और जब उसका माल निकल जाता है, तो बगल में घोड़े बेच कर सो जाता है … मैं उसी के बगल में ही मैं अपनी जीभ को अपने होंठों पर फेरती रह जाती हूँ.

वह एक साधारण, घरेलू, शादीशुदा औरत हैं। उसके पति सरकारी नौकरी करते हैं. मैंने बात का मर्म समझते हुए कहा- ठीक है … पर आप भी किसी को कुछ नहीं बताना.

उसको इस वक्त हल्का हल्का नशा होने लगा था, तो वो मेरे कंधे पर सर रख कर बैठी थी. मुझे भाभी के मुँह की गर्मी से अपने लंड की मालिश करवाना बड़ा अच्छा लग रहा था. मैं अपनी बुआ के बेटे के साथ यानि चचेरे भाई बहन की चुदाई का मजा लिया.

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मेरी चूत पर एक भी बाल नहीं था क्योंकि मैं हमेशा अपनी चूत के बाल को साफ़ करती रहती हूँ.

किस करने के थोड़ी देर बाद मोनिषा आंटी ने कहा- ओह नवीन, क्या सच में तुम मुझे इतना चाहते हो?मैंने कहा- हां मोनिषा आंटी, मैंने जब से आपके नंगे जिस्म को देखा है … मेरे लंड को चैन नहीं मिल रहा है. आंटी कह रही थीं- आह जोर से चोदो … और जोर से चोदो … मजा आ गया … उम्म्ह … अहह … हय … ओह … ऐसे ही चोदते रहो. मैंने एक हाथ समीज के अन्दर डाल कर उसकी एक चूची के निप्पल को पकड़ लिया और उसे थोड़ा घुमाकर ज़ोर दे दबा दिया.

मेरे बेटे को मुझसे बहुत डर लगता है क्योंकि जब मैं गुस्सा हो जाती हूं तो गंदी गालियां देती हूं. फिर एक जुलाई को दस्तूर ने बताया- मेरा कल बर्थडे है … क्या हम दोनों ईव्निंग में कहीं चल सकते हैं?मेरी तो जैसे मुँह माँगी मुराद पूरी हो गयी थी. रानी सेक्सी वीडियोदेर हो गई ध्यान ही न रहा।मामा जी मुस्करा रहे थे- तुमने तो कमाल कर दिया, लगभग पौन घंटा उसकी में पेले रहे.

फिर वो चादर सही करने के लिए झुकी, तो मैं उसके सामने वाली तरफ खड़ा देख रहा था. अब हमारा परिवार सुखी है, मेरी माँ की अन्तर्वासना को उनका हमसफ़र मिल चुका है.

मन कर रहा था कि अगर अभी मामी पास में होती तो उसकी चूत को चोद चोद कर फाड़ देता. मैं अपने हाथों से उसकी चूचियों को इतनी जोर से मसलने लगा जैसे आंटा गूंथ रहा था. क्यूं क्या हुआ? आप ऐसे क्यों पूछ रही हो?वो बोली- कुछ नहीं, बस ऐसे ही पूछ रही हूं.

चाची अपने हाथों से भैंस के थन दुह रही थीं और मैं अपनी आँखों से चाची के हिलते थनों को देखने में लगा था. जैसा कि हर मर्द जानता है कि उसे अधिक से अधिक आनन्द एक कामुक महिला ही दे सकती है, पर चरमसुख की तीव्रता अधिक महिलाएं नहीं दे पाती हैं. मैंने अपना कंट्रोल खो दिया और बुआ के पास जा कर उनकी चुत को चाटने लगा.

एक पल चुत की फांकों का जायजा लिया और धीरे से उंगली को चुत के अन्दर डालने लगा.

दोस्तो … जब उसने अपने सारे कपड़े उतारे तो बस मैं उसको ही देखता रहा. तीसरा उस कमरे में खुलता है जिसमें अनु मेरा लंड चूस रही थी और चौथा गेट मैडम के शयन कक्ष में खुलता है.

उसे रिकवर होने में और अपने पैरों पर खड़ा होने मैं एक साल लगा, पर वह पहले की तरह चल नहीं सकते था. वो बार बार मुझसे बात करने की कोशिश कर रही थी … लेकिन मेरा तो दिल ही टूट गया था. आपको मेरी पिछली कहानीमैंने हॉस्टल गर्ल की सील तोड़ीमें ज़रूर मजा आया होगा … उसके लिए आपके अनेकों मेल भी मिले.

इस बात से मैं बहुत ही टूट सा गया क्योंकि मेरे खड़े अरमानों पर पानी फिरा जा रहा था. वो टीवी को देखते हुए आगे बोली- मेरा पति तो साला कई दिनों और रातों तक बाहर रहता है … उस चूतिए को मेरी बिल्कुल परवाह नहीं रहती कि उसकी बीवी की भी कुछ तमन्ना है … उसे भी लंड का प्यार चाहिए. मामी ने मेरे लंड को पकड़ कर अपने कोमल हाथों से उसको सहलाना शुरू कर दिया.

देसी गांव का बीएफ क्योंकि मुझे नहीं पता था कि निर्मला स्त्रियों के साथ भी सक्रिय रूप से कामक्रीड़ा में माहिर थी. उन्होंने अपने घुटनों से अपनी छाती और चुत को छिपा रखा था, लेकिन तब भी वो बड़ी कामुक लग रही थीं.

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इस बार चुदाई करते हुए संजय ने बताया कि उसकी पत्नी अपने मायके गयी है. मेरे मुहल्ले के बहुत से लड़के मोनिषा आंटी के नाम की मुठ भी मारने लगे थे. फिर रास्ते में स्पीड ब्रेकर पर बाइक उछली तो उसकी बहन ने मेरी जांघ पर हाथ रख लिया.

प्रियंका ने कहा- हां, मैं जानती हूं, तभी तो अब तुम बिल्कुल नहीं शर्माते. मैंने आंटी की चुत पर थोड़ी देर लंड रगड़ने के बाद कहा- आप मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चुत पर रखो. सेक्सी पिक्चर हिंदी में गानानीचे लेगिंग्स जो हमेशा से मेरी कमज़ोरी है क्योंकि हर हसीन कुतिया लेगिंग्स में बम लगती है.

दस्तूर अपना आपा खोती जा रही थी और उसकी आंखों से लगातार आंसू आ रहे थे.

मैंने थोड़ा सा सरक कर मैडम के करीब आते हुए अपना हाथ उनके मम्मों पर रख दिया. देखते ही देखते प्रिंसीपल का लंड मेरी दीदी की चूत में अंदर तक चला गया.

एक तो रीता मेरे लंड को चूसने में लगी थी … और अब ये दूसरी मुझसे अपने चूचे चुसवाने लगी. मैडम एक तरफ हो गई थी लेकिन मेरे अंडरवियर में तने हुए लंड पर उनकी नजर वैसे ही गड़ी हुई थी. मेरी माँ बेटे की चुदाई की कहानी में पढ़ें कि वासना के वशीभूत हो मैं अपनी माँ के जिस्म को चाहने लगा था.

मेरे मुँह में उसकी झांटों के बाल आ रहे थे, लेकिन चुत चाटने में मज़ा भी बहुत आ रहा था.

वहां जाकर उसने नंग धड़ंग एकता को बिस्तर पर पटक दिया और फिर उसको घोड़ी बना दिया. मैंने अपना लंड उसकी चुत में से निकाला और कंडोम निकाल कर साइड में रख दिया. हम भाई-बहन की चुदाई में मुझे इतना मजा आयेगा मैंने कभी नहीं सोचा था.

तेरी बहन की छूटमैंने कहा- रुक जाओ, अकेले मेरा भी मन नहीं लगता … थोड़ी देर और बातें करते हैं. उसके इन मदमस्त चूचियों को देख कर मेरे लंड से सब्र ही नहीं हो रहा था.

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मैं समझ चुका था कि दीदी को अब चुदाई का चस्का लग गया था और सेक्स के साथ वो नशा भी करने लगी थी. पूरी ताकत से वो मेरी गांड में लंड पेल रहा था, मुझे मजा आ रहा था, वह पूरे दम से रगड़ रहा था, मुझे मजा आ रहा था. मूवी खत्म होने ही वाली थी कि मेरी मम्मी का फ़ोन आ गया कि वो लोग घर आ रहे हैं.

मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी … आप इतनी उदास क्यों हो?भाभी बोलीं- कुछ नहीं … बस ऐसे ही. फिर वो बोली- भाई, प्लीज़ अब डाल भी दो, वरना मैं मर जाऊँगी!उसी टाइम मैं तो थोड़ा और तड़पाना चाहता था, मैं कोई रिस्क भी नहीं लेना चाहता था तो मैंने उसको नीचे लिटा कर उसकी गाँड के नीचे दो तकिये लगाये और उसकी दोनों टाँगों को मेरे कंधे पर रख कर एक ही झटके में पूरा लंड चूत के अंदर डाल दिया. एक और बात भी थी कि मेरी मॉम पापा के न रहने पर नहाने से पहले मुझसे मसाज करवाती थीं.

उसके बाद मैंने भाभी को कुतिया बनाकर कहा- चल मेरी कुतिया रेडी हो जा … आज तेरी चूत नहीं गांड ही चोदूंगा. मैं उसके मम्मों को मसलता जा रहा था और वो मेरे होंठों से लगकर मेरे होंठ चूस रही थी. जब माँ अपनी नाईटी उठा कर दूध निकालने बैठतीं, तो उनकी कसी हुई नाईटी में उनके बैठने पर जिस्म की बड़ी गोल आकृति बनती.

वह मना करता ही रहा पर वे उसके ऊपर चढ़ बैठे और अपना आजमूदा हथियार चालू कर दिया, अंदर बाहर … अंदर बाहर!वे लगे हुए थे, मुझे उन देानों की आवाजें आ रहीं थीं, नींद खुल गई. जिस घटना के बारे में आपको बताने जा रही हूं उसको पढ़ कर आपको भी मेरी बात का यकीन हो जायेगा.

तो ये सारी बातें थीं, पर मेरे दिमाग में ये चल रहा था कि आखिर इतने सालों के बाद सुरेश ने मुझसे आज ये बात क्यों कही.

और वो दर्द की वजह से रोने लगी। थोड़ा सा लंड अंडर जाने लगता तो वो दर्द से कराह जाती और ‘रुको रुको …’ करके रोक देती. भाभी बोली- प्यार करो मुझेउसकी टाइट चूत को चोद कर मुझे भी आनंद आता है और हम दोनों खूब मस्ती करते हैं. भारत की ब्लू फिल्मथोड़ी देर बाद वो बोली- अब तुम अपने घर जाओ … बाकी का काम शाम में करेंगे. इस तरह से मैंने पहली बार अपनी बीवी के ब्यूटी पार्लर में सेक्स किया.

अब उन्होंने मुझे धक्का दिया और मेरे ऊपर आकर मुझसे कहने लगीं- अब मेरी चूत की चुदाई की बारी है … मुझे लंड खड़ा करने दो.

उसकी ख़ूबसूरती का ज़िक्र करने की कोई ज़रूरत नहीं … बस ये समझ लो कि उससे ख़ूबसूरत और सेक्सी फ़िगर मैंने कभी नहीं देखा।मैंने जिया से पूछा- क्या इनकी मसाज करनी है?मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे कि क्या मस्त माल आया है. इस घटना के बाद मेरी निगाह अपनी देसी बहन के खिलते हुए यौवन पर टिक गई. फिर उसके बाद मैंने साहब से कहा कि सारा काम खत्म हो गया है और अब मैं घर जा रही हूं.

वो भी कभी कभी रात को आते, या दिन में उस वक्त आ जाते, जब हम स्कूल गए होते. लगभग दस मिनट में भाभी कमरे में आ गयी और दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया. फिर मैं तपाक से बोला- यार दस्तूर, मैं मिस्त्री तो हूँ नहीं … लेकिन आपको आपके घर तक छोड़ सकता हूँ … इफ़ यू डोंट माइंड!दस्तूर बोली- यार, ये तो आपका एहसान होगा … पर कार का क्या होगा?मैंने उसे समझाया- ओके तुम परेशान मत हो … यहां पर आपकी कार सेफ है … फिर जब भी आपके भाई या पापा आएंगे, तो यहां पार्किंग से कार ले जाएंगे.

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मैंने उसके कड़क टनटनाते हुए लिंग को योनि की छेद में टिकाया और बैठ गयी. मौसी ने मेरे हाथ में एक लाख का पैकेट थमा दिया और कहा- अब तुम्हारी बीवी हमारी रंडी है. मैं तो जानता था कि मामी फोन के बारे में बात कर रही है लेकिन मेरा मकसद उसकी चुदाई करने से था क्योंकि मामी की बातों से मुझे पूरा यकीन हो चला था कि मामी की चूत की प्यास बार-बार उनको मुझे उनके पास बुलाने के लिए कह रही है.

मैं रुक गया और उसको किस करने लगा।जब वह थोड़ी नार्मल हुई तो मैंने आराम आराम से अंदर बाहर करना शुरू किया, फिर अचानक से ज़ोर का झटका मारा और पूरा लण्ड अंदर घुसा दिया, वह फिर से तड़पने लगी।फिर मैं आराम से अंदर बाहर करने लगा।अब उसको भी थोड़ा सुकून मिल गया था, उसको भी मज़ा आने लगा.

पूजा ने पूछा- और सुनाओ सब कैसा चल रहा है?मैंने कहा- सब सूखा पड़ा है यार … कई महीने से खाली हूँ … क्या तुम आज रात मिलोगी?उसने कहा- कहाँ?मैंने कहा- वहीं जहां से तुम्हें देख कर मेरा लंड बह गया था.

लेकिन जब उसने यह बताया और साबित भी किया के ये बोल नहीं सकता, और सब कुछ गोपनीय रहेगा तो सब रिलेक्स हुयी. सच कह रहा था सुरेश के संभोग किसी के भी साथ करने से नहीं होता, अपने ही तरह के साथी के होने से आनन्द और उत्साह बढ़ता है. लंड देखना हैअगले दिन मैंने जल्दी से सब काम निपटा दिया और घर पर, दोस्त के घर जाने की कहकर निकल गया.

उसके बाद साहब ने अपनी जेब से एक 2000 रूपये का नोट निकाला और दिखाते हुए बोले- अगर यह भी चाहिए तो चुपचाप मेरे कमरे में चलो. और मेरी बहन की गांड उसमें अलग ही हमले करती है दिलों पर।मेरी कुँवारी रसीली बहन की चुदाई कहानी जारी रहेगी. दस मिनट चोदने के बाद मैं औंधा होकर लेट गया और चच्चा ने मेरे पैर कन्धे पर ले लिए.

मुझे इस बीच कई बार लगा कि अब मैं फव्वारा छोड़ दूंगी, पर हर बार किसी तरह खुद को रोक लेती. दोस्तो, कैसे हैं आप लोग! उम्मीद करती हूं कि सब अच्छे होंगे। आज मैं आपको अपनी कहानी बताने जा रही हूं.

वो मेरे बालों की और मेरे होंठों की तारीफ करते करते मेरी चूचियों को देखते हुए रुक गया.

दस मिनट तक चुत की चुसाई करने के बाद मैंने बुआ के चूचों को जम कर चूसा. बाद में मैंने ज़रीना से फोन से पूछा- अब दर्द कैसा है?वो बोली- वो दर्द तो ठीक है, पर आपने दूसरा दर्द दे दिया है. वे अपनी दोनों उंगलियों को मेरी गांड में तेज तेज चलाते रहे, फिर गोल गोल घुमाने लगे.

छोटी लड़की का इंसान को तो मुठ मार के भी राहत मिल जाती है … बात तो संतुष्टि और पसंद की है. मेरी दीदी ने उसके कंधे पर पैर रख लिया था और अपनी चूत को चटवा रही थी.

कॉलेज प्लेसमेंट में ही मेरी जॉब एक प्राइवेट बैंक में लग गई और अच्छी बात ये थी कि मुझे घर के पास के एक शहर में पोस्टिंग मिल गई. पूजा ने मुझसे अगली सुबह तक का समय मांगा।उस रात में डरा हुआ भी था और रात यह सोचते हुए निकल गयी कि सुबह या तो मेरी पिटाई होगी या मेरी भी कोई गर्लफ्रैंड बनेगी।सुबह 5 बजे उसका ‘आई लव यू’ का मैसेज आया और उस वक्त मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब रोज़ाना एक दूसरे से बातें करने का दौर शुरू हो चुका था।पहले कुछ दिन तो हम दोनों के मध्य सामान्य सी बातें होने लगी. उसने मामी के चूचों को जोर से दबाना शुरू किया और फिर मामी के मोटे मोटे चूचों को मुंह में भर कर पीने लगे.

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उस रात में मैंने मैडम को चार बार चोदा और वैसे ही हम दोनों किस करते हुए कब सो गए, पता ही नहीं चला. मौसी बोली- बेटा, तेरी चूत से 20 लाख वसूल करने है … अभी काम कर, सुबह सो जाना. कुछ पल बाद मैंने उसको बेड पर सीधा लेटा दिया और अपनी टी-शर्ट उतार कर उसके ऊपर चढ़ गया.

एकदम किसी जासूस की तरह उसके मैसेज को कई कई बार पढ़ा और हर बार इस नतीजे पर पहुंचा कि नहीं … उसने मुझसे हां कहने के लिए ही मुझे बुलाया है. उसके मुँह से ये बातें सुनकर मैं बनावटी गुस्से में बोला- तुम कह क्या रहे हो?मेरे गुस्से को देखकर वो बोला- सुरेश तुम्हारी मॉम को आज भी शहर में जाकर चोदता है और अपने दोस्तों से भी चुदवाता है.

मैं अपने होंठों को उनके निप्पलों में घुमा रहा था और वो गर्म सिसकारियां ले रही थीं.

हम दोनों इतने उत्तेजित और गर्म थे कि हमने एक दूसरे का पूरा साथ दिया … हर दर्द पीड़ा को भूल कर एक दूसरे को आत्मसात करने की कोशिश कर रहे थे. एक बार बहाने से मैंने चाची को गर्म कर दिया और …मेरा नाम आर्यन है और मैं बिहार के जमुई जिले के पास में झाझा का रहने वाला हूं. मैंने तुरन्त उस शॉप से निकलने का सोचा और मम्मी से बहाना बनाकर उनके पीछे गयी.

मैं एकसेक्सी जवान लड़कीहूं और मेरे जिस्म को देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता है. काफी कुछ बैंक में जमा है, जिससे हम दोनों अपने घर को बड़ी मस्ती से चला रहे थे, किसी बात की कोई कमी नहीं थी. मैंने वहां पर एक कोचिंग क्लास जॉइन कर ली थी जो रविवार को हुआ करती थी.

जॉयश बोली- क्या बात है … अब लग रहा है कि हम सब नए जमाने की औरतें हैं.

देसी गांव का बीएफ: वो नंगी औरत बेड पर लेटी हुई अब कामुक अंदाज में सेक्सी आहें भर रही थी. अत्यधिक उत्तेजना के कारण भाभी को दस मिनट चोदने के बाद मैंने उनकी बुर में ही अपना पानी गिरा दिया.

मैंने कई बार उसको बोला लेकिन वोलंड चुसाईकरने के लिए तैयार नहीं हुई. सुशी का हाथ मेरे लंड को कपड़ों के ऊपर से ही मसला रहा था जिससे मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था।फिर आगे सुशी ने मेरे जीन्स और कपड़े को निकाला और नंगा कर दिया. भाभी मुझे थका हुआ देख कर बोलीं- कोई बात नहीं … आज मुझे उंगली से ही काम चलाना पड़ेगा.

जैसे ही भाभी ने मूतने के लिए अपनी साड़ी उठायी, तो उनकी गोरी गोरी गांड को देखकर मुँह से आह निकल गई.

मैं अपने हाथों कभी उसके मम्मों को सहलाता, कभी उसको किस करता हुआ मजा लेने लगा. मैंने देर ना करते हुए उनकी पेन्टी के ऊपर से ही चुत को चाटना शुरू कर दिया. उसके बाद मैंने भाभी को कुतिया बनाकर कहा- चल मेरी कुतिया रेडी हो जा … आज तेरी चूत नहीं गांड ही चोदूंगा.