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जिसकी वजह से उसके लण्ड में हरकत सी हो रही थी। मैं इस बात को बिना किसी रुकावट के महसूस कर रही थी।जैसे ही एक पार्क के पास फैजान ने बाइक रोकी.और कहाँ?मैं उठकर बाथरूम की तरफ गया, देखा कि दरवाजा खुला था, मैं अन्दर गया तो देखा कि भाभी पैंटी के ऊपर पेटीकोट पहन कर मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थीं।ऊपर उन्होंने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी जिसका हुक खुला था, भाभी बोलीं- निखिल मेरी ब्रा का हुक लगा दो प्लीज.

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दूसरे फ्लोर पर जीने के साथ ही मेरा पहला कमरा था। एक फ्लोर में 5 कमरे थे व चारों फ्लोर किराएदारों से भरे थे. ? अब तक पापा ने मुझे ढूंढने को एफआईआर भी करवा ही दिया होगा।ऐसे ही कितने ही सवाल मुझे घेरने लग गए थे।तभी मैंने निशा की आवाज़ सुनी- ओये जल्दी आ। यहीं रुकने का इरादा है क्या?मैं फिर भागता हुआ टैक्सी तक पहुँचा और फिर हम चल दिए अपने फ्लैट की तरफ।मुंबई शहर…जैसा सुना था और जैसा फिल्मों में देखा था. उसने एक-एक बूँद चाट लिया।अब मैंने उसकी नीचे गिरी हुई पूरी साड़ी को उसके तन से अलग कर दिया और उसके लहंगे का नाड़ा खींच दिया।ओह.

और उसके पैर ऊपर उठा कर बीच में बैठ गया और चूत के दरवाजे खोल कर जीभ अन्दर डाल दी। मैं उसकी चूत को पूरे मनोयोग से चाटने लगा। दो ही मिनट में ही उसकी चूत से झरने जैसा पानी बाहर निकल आया।मेरा मुँह पूरा भर गया. और वैसे भी हमारे देश मे एक महिला कुछ भी शिकायत करे तो दोषी तो मर्द को ही पाया जाता है।मैंने इधर-उधर देखा. मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ, मैं अन्तर्वासना को करीबन आठ साल से पढ़ रहा हूँ।अब तक मैंने जितनों के साथ सोया हूँ मुझे उन सबके नाम याद हैं। कुछ के साथ मेरे रिश्ते एक दिन के थे और कुछ के साथ महीनों तक चले। कुछ के साथ सालों के भी रहे और किसी के साथ शायद जन्मों का रिश्ता होगा.

यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !वो हँसते हुए पीछे का दरवाज़ा बंद करके आई और पर्दे के पीछे से अपनी मैक्सी ऊपर करके उसने मुझे चूत दिखाई. नहीं तो अब तक तो बबाल हो जाता।अब माया इतनी तेज़ गति से उछाल मार रही थी कि मेरा अंग-अंग भी बिस्तर के साथ हिल रहा था ‘अह्ह्ह ह्ह्ह्ह.

क्या घर पर कोई नहीं है क्या?तो वो बोली- विनोद भैया माँ से लिस्ट लेकर घर का कुछ समान लेने गए है और माँ रसोई में नाश्ता तैयार कर रही हैं।मैं बोला- बस यही तो मेरी परेशानी की वजह है.

मेरा लण्ड निशाने से फिसल गया।दूसरी बार फिर से लगा कर धक्का मारा तो लण्ड का सुपाड़ा अन्दर चला गया और वो दर्द से कराहने लगी। मैं थोड़ा रुका ओर उसके होंठों और मम्मों को चूसने लगा।कुछ देर बाद वो सामान्य हुई.

’ की आवाज आ रही थी।मैं तो जैसे जन्नत में मस्ती ले रहा था। फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। भाभी पूरी ताकत से मेरा लंड चूस रही थीं और मैं पूरी मस्ती से भाभी की बुर चाट रहा था।कुछ देर बाद भाभी की टांगों का दबाव मेरी गर्दन पर बढ़ने लगा और भाभी चिल्लाते हुए मेरे मुँह पर झड़ गईं।फिर मैंने भाभी को सीधा करके लिटाया और फिर उनकी बुर चाटने लगा। भाभी बोलीं- अरे मेरे राजा. तो वो शर्मा कर भाग जाती थी।फिर मैंने उसके घर आना-जाना शुरू किया और फिर उसके मम्मी-पापा भी मेरे आने-जाने को लेकर कुछ नहीं कहते थे। मगर उसकी एक चाची थी. मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे ताकि वो ज़ोर से चिल्ला ना सके।मैं समझ गया था कि वो सच में कुँवारी ही है।अब मैंने अपनी कमर को सख़्त किया और लंड को ताक़त के साथ अन्दर धकेला.

मेरी तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि ये मेरे साथ क्या हो रहा है?यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !फिर उनकी आवाज़ ने मेरी खामोशी को तोड़ा और बोला- यहीं खड़े-खड़े सोचते ही रहोगे. मुझे लगा मजाक कर रही हैं।तो मैंने ‘हाँ’ कर दी कि मेरी गर्लफ्रेंड है।फिर थोड़ी देर वे बाद पूछने लगीं- बात कहाँ तक पहुँची?मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैंने पूछा- क्या मतलब?तो भाभी बोलीं- अरे बुद्धू. मैं- अगर रिज़ल्ट आने पर आपने मना किया तो?भाभी आगे बढ़ीं और मेरे गाल पर एक सेक्सी सा चुम्बन किया।भाभी- ये ले साले तेरी टोकन मनी.

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फिर हमने 5 मिनट तक एक-दूसरे के लण्ड-चूत को खूब चूसा।अब उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी।मेरा लंड भी उसके चूसने से पूरा गीला हो गया था।वो चुदासी सी बोली- अब तो डाल दो. इतना कहते ही भाभी ने मेरी चड्डी निकाल दी और मेरा लंड देखते ही बोल पड़ीं- आज तो तू पक्का मेरी चूत फाड़ ही देगा. ’दोस्तो, बड़े शहरों की लड़कियाँ जंक फ़ूड खाते-खाते मोटी होती जा रही हैं। मोटी लड़कियां कितना भी मेकअप करें.

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’फिर मैं लौड़े को चूत में सैट करके धक्के लगाने लगा और कुछ ही देर में मैं पूरी स्पीड में धक्के मारने लगा।अब वो भी अब मजे ले कर अपनी गाण्ड उठा-उठा कर चुदवाने लगीं।वे चुदाई की मस्ती में बोल भी रही थीं- और तेज़. जो कि अपनी गाढ़ेपन की वजह से उस जगह पर जमा हुआ था और आगे नहीं बह रहा था।जाहिरा की कुँवारी चूत के क़तरे की चमक से मेरी आँखें भी चमक उठीं और मैं वो करने पर मजबूर हो गई.

सेक्सी बीएफ जीजा साली बुरा तो नहीं मानोगी?मालकिन- पूछो क्यों बुरा मानूँगी भला?मैं- भाभी तुम दिन व दिन जवान और खूबसूरत होती जा रही हो. मेरा गला सूखता जा रहा था और आँखें भरने लगी थीं।दरवाज़ा खुला और सबसे पहले मम्मी पर नज़र पड़ी, फिर सब लोग आ गए।मम्मी ने मुझे अपने सीने से लगाते हुए कहा- क्या हाल बना रखा है अपना.

सेक्सी बीएफ जीजा साली तो सीधा मैंने अपना लण्ड लगा दिया और फिर उसकी चूत में धक्के मारने लगा।करीब 20-25 धक्कों के बाद मेरा माल निकलने वाला हुआ. ममता धीरे से बिस्तर के पास गई और राधे के लौड़े को सहलाने लगी। कुछ ही देर में सोया हुआ साँप जाग उठा और अपना फन फैलाने लगा।ममता अपने होंठों पर जीभ फेरने लगी.

ताकि उसे अपनी बहन के जिस्म से आँखें सेंकने का मौका मिल सके। उधर फैजान का भी यही हाल था कि जब भी मैं जाहिरा को क्रीम लगाती.

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मैं कॉलेज से घर वापिस जल्दी आ गया।मुझे देख कर वह मेरे पास आई और बोली- मेरे मोबाइल का बैलेंस खत्म हो गया है. वो भी मुझ पर झपट पड़ीं और मुझे सीधा लिटा दिया। अब तो मेरी सोचने की शक्ति भी जवाब देने लगी थी। मैं क्या करूँ. अब दोबारा क्यों तड़पा रही हो।मीरा उसके सीने पर सोई हुई थी और राधे का मुँह उसके कान के पास था।तो उसकी बातों से मीरा की नींद टूट गई और जब उसने आँखें खोलीं.

तृषा को टिश्यू पेपर पर अपना नाम लिख कर दे चुका था और उम्मीद कर रहा था कि कामवाली के नीचे मुझे देखने से पहले तृषा दरवाज़ा खोल दे।मस्ती. और फिर वो मुझे उठाकर एक लम्बी चुम्मी करते हुए बेड पर अपनी चूत खोल कर लेट गईं और टाँगें फैला कर अपनी चूत पर चॉकलेट लगाकर मुझे चूत चाटने का कहा. देखो उसी खुजली के मारे तेरा लंड भी पैन्ट में तंबू बनाये खड़ा है।मैं एकदम से शरमा कर अपना लंड छुपाने लगा।खुशबू बोली- छुपाते कहाँ हो? मैं तो कब से तेरे तने हुए लंड को देख रही हूँ.

तो वो लपक कर फिर से लौड़े को मुँह में लेने लगी।अब मैंने भी उसके बालों को पीछे की ओर खींचते हुए अपनी कमर उठा-उठा कर उसके मुँह को चोदने लगा और बीच में उसकी जुबान से लौड़े को भी चटवाता था.

मैंने उनकी चुदास को भांपते हुए उनके मम्मों पर हाथ रख दिया।यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !तो फिर उन्होंने कहा- तुम्हारा इरादा क्या है?मैं बोला- आंटी आपको क्या लगता है?वो हँस पड़ीं. लेकिन कई बार किक मारने के बाद भी उनकी स्कूटी स्टार्ट नहीं हो रही थी। फिर आंटी थक कर इधर-उधर देखने लगीं और फिर उन्होंने मुझे आने का इशारा किया।मैं- क्या हुआ आंटी?आंटी: पता नहीं. पर मेरा आधा लंड ही आंटी की चूत में गया और आंटी की चीख निकल पड़ी।उम्र के हिसाब से आंटी की चूत काफी टाइट थी। उन्होंने अपने पैरों को मेरी कमर पर कस लिया और तभी मैंने एक और ज़ोरदार शॉट मारा और मेरा पूरा लंड आंटी की चूत को चीरता हुआ अन्दर तक चला गया।आंटी की आँखों से आँसू निकल आए लेकिन चेहरे पर ख़ुशी झलक रही थी। दो मिनट बाद जब आंटी नीचे से कमर हिलाने लगीं.

जानेमन आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूँगा।मुझे उनकी यह भाषा समझ में नहीं आई।फिर उन्होंने मेरी मम्मी को बोला- शोभा अब घोड़ी बन जा. मतलब आधा काम हो गया और लाइन का पहला सिग्नल क्लियर हुआ।उससे बात करते करते मैंने पूछा- वेयर आर यू फ्रॉम. सो आप चले जाओ।मैं अन्दर गया तो सारा गोदाम खाली पड़ा था। मैं मुड़ने ही वाला था कि एक कमरे से आवाज़ें आ रही थीं- आह.

जो वहाँ वो अपना एक्ट दिखा रहा था और मैं अपने मन ही मन इमेजिन करने लगा था कि वहाँ वो नहीं बल्कि मेरे पसंदीदा कॉमेडी कलाकार ये एक्ट दिखा रहा है।तभी मेरी नज़र पैनल पर गई। उस कमरे में सबके सब मुझे घूरे जा रहें थे। पैनल में से एक ने मुझसे पूछा- आपको क्या हुआ जनाब? यह एक्ट देखकर हंसी आ रही थी।मैं- मैं एक्टिंग के बारे में एक बात जानता हूँ. और अपने दाने को मसलने लगी। थोड़ी ऊँगली भी चूत में अन्दर डाली और हाथ से खुद को शांत किया।वासना की आग को कुछ हद तक कुछ पलों के लिए शांत किया.

पर उसने जबरन उसे भी उतरवा दिया।मैं उसके सामने निर्वस्त्र खड़ा था और वो मेरे सामने पहले ही नंगी हो चुकी थी।अभी मुझे शर्म सी आ ही रही थी कि उसने मुझे अपने बाहुपाश में जकड़ के बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया। वो इस तरह मुझे चूम रही थी. यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !लेडीज या लड़कियों को देखते ही सबसे पहले मैं यही देखता हूँ. फिर मैंने थोड़ी हिम्मत की और करवट लेने के बहाने अपने हाथ को उनके चूचों पर रख दिए।शायद उनको भी महसूस हो गया था कि मैं सोने का नाटक कर रहा हूँ। उन्होंने मेरे हाथ के ऊपर से अपने हाथ से रखा और अपने चूचों को मसलवाने लगीं।थोड़ी देर मसलवाने के बाद मेरे हाथ से वो अपनी चूत को मसलवाने लगीं। मैं बता नहीं सकता भाई लोगों कि उनकी बुर कितनी गरम थी। मैंने पहली बार किसी औरत की बुर को छुआ था.

वो मिल कर ही हो सकती है।मैंने पूछा- तुम मेरी मदद क्यों करना चाहते हो?तो उसने कहा- क्योंकि इसमें मेरा भी कुछ फायदा है।मैंने उससे उसका पता लेकर टाइम ले लिया.

लेकिन मैंने तुरन्त ही उसको कस कर पकड़ लिया और उसके ऊपर लेट गया।अब मेरे लंड में कुछ लसलसा सा चिपकने लगा जो कि उसके सील फटने की निशानी थी।सुप्रिया के मुँह से कुछ आवाज नहीं आ रही थी. वो उतना साथ नहीं दे रही थी। लेकिन उसके मुँह से निकलती आवाज़ और उसका मासूम सा चेहरा और उसकी बन्द आँखें देख कर मुझे एहसास हो रहा था कि उसे भी मज़ा आ रहा है।जब उसका दर्द पूरी तरह चला गया. कि मुझे लगा कि मेरे पूरा जिस्म किसी दहकती हुई भट्टी से छू गया हो।फिर भी मैंने बुर के छेद पर लंड को सैट किया और धक्का लगा दिया.

मैं कुछ देर रुक कर फिर उसे चूमने और सहलाने लगा जब वो कुछ रिलेक्स हुई तो मैं धक्का देने लगा।अब वो थोड़ा मस्ती में आ चुकी थी- ‘अआआ. इसलिए कोई भी विरोध नहीं किया और उसका साथ देनी लगी।जैसे ही मैंने उसके लण्ड पर हाथ रखा तो मुझे वो पहले से ही तैयार मिला.

वो दो बच्चो की माँ थी। उसके दोनों बच्चे अपनी नानी के घर रहते थे और दोना मियां-बीबी सरकारी नौकरी में होने के कारण अलग-अलग रहते थे इसलिए वह ज्यादातर लण्ड की प्यासी ही बनी रहती थी।जब वह मेरे कमरे में आई. भांजा सो चुका था इसलिए दरवाज़े पर दस्तक देकर उसे जगाना मुनासिब नहीं समझा। लेकिन ऐसा लगा कि दरवाज़ा पूरी तरह से बन्द नहीं था. तो वो गहरी नींद में थी। मैंने आहिस्ता से उसे करवट दी तो वो घूम कर बिस्तर पर मेरी वाली जगह पर अपने भाई फैजान के क़रीब आ गई।मैं मुस्कराई और जाहिरा को अपनी जगह पर करके खुद उसकी वाली जगह पर लेट गई।अब मुझे सोना नहीं था बल्कि आगे जो होने वाला था.

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लेकिन असल में मैं उनकी गाण्ड बहुत ही बेदर्दी से मारना चाहता था।फिर मैं तेल की सीसी ले आया और मौसी की गाण्ड पर पूरा डाल कर मालिस करने लगा और जब उनका जिस्म पूरा चिकना हो गया.

इतना कह कर अमन ने अपनी टी-शर्ट उतार दी। उस का गठीला बदन मुझे उसकी तरफ खींच कर ले गया। मैंने उसके होंठों को चूस कर उसकी छाती पर खूब चुम्बन किए। फिर हाथ नीचे ले जा कर उसके लंड को सहलाना शुरू किया. पर थोड़ा अन्दर गया कि उसकी चीख निकल गई। क्योंकि पहले कभी वो किसी से नहीं चुदी थी।फिर मैंने उसके मुँह पर अपना हाथ रख दिया और एक ज़ोर का झटका मारा। मैंने हाथ भी रखा था. वो भी नीचे से कूल्हे उठा-उठाकर चुदवाने लगी।मैं भी उसे खूब जोर से चोदे जा रहा था और वो दस मिनट में झड़ गई।फिर मैंने उसे उल्टा करके कुतिया की तरह चोदा और वो दो बार फिर झड़ चुकी थी।मैंने उसे बहुत देर तक चोदा।अब मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने तगड़े झटके मारकर उसकी चूत में ही झड़ गया।फिर कुछ देर तक उसके ऊपर ही लेट गया। आज चुदास बढ़ गई थी तो.

तो क्यों ना कुछ ट्राइ कर ही लूँ?मैं आंटी के कमरे की तरफ गया तो देखा वो आँख बंद करके लेटी हुई थी। मैं समझ गया कि वो सोने का नाटक कर रही है।मैं उसके पास आया और उसे गौर से देखने लगा। उसकी सामने से खुलने वाली नाईटी जाँघ के ऊपर थी और पेट से भी खुली हुई थी।मुझे उसकी नुकीली चूचियां. मैं दवाई ले लूँगी)अब अमन मेरे ऊपर आ गया। मेरे होंठों में अपने होंठ लिए।मैंने नीचे हाथ करके उसका लंड अपनी चूत पर सैट किया। अमन ने धीरे से धक्का लगाया और मेरी गीली चूत में उसका लंड घुस गया।मेरे मुँह से सिसकारी निकलने लगी. xxx.com बीएफ हिंदी मेंमैं उसकी चिकनी रानों तथा चूचों को सहलाता गया और चूत में धक्के मारता गया।अब मैंने उसको दूसरी तरफ मुँह करके लिटाया.

वो भी मुझ पर झपट पड़ीं और मुझे सीधा लिटा दिया। अब तो मेरी सोचने की शक्ति भी जवाब देने लगी थी। मैं क्या करूँ. क्या बस पूछा है।मैंने क्या- करना क्या है उसका?वो बोली- मुझे उसका कुछ नहीं करना है तुमसे करवाना है।‘क्या करवाना है.

तो उस वक्त वो मुझसे थोड़ा हँसी-मज़ाक कर लेती थी।मैं भी इसे सामान्य तौर पर लेता था। इसी तरह से तीन महीने बीत गए. मैं ये काम नहीं करूँगी और सब कुछ कर लूँगी।मैंने उसके जिस्म पर हाथ फेर कर उसकी चूत को जगा दिया और अपना लण्ड उसके हाथ में थमा कर बोला- लो ये आपके लिए ही है. मैं तुम्हें कभी कॉन्टेक्ट नहीं करूँगा।वो इतना सुनते ही ज़ोर से मेरे गले लग गई और हम दोनों ने गहरा चुम्बन लिया एक-दूसरे के होंठों को मुँह में ले लिया और जीभ को चाटने लगे।फिर मैं वहाँ से चला गया.

फिर उसने अपनी नजरें झुका ली।थोड़ी देर बाद छुट्टी हो गई।अगले दिन उसने मुझसे कोई बात नहीं की।एक सप्ताह बीत गया।फिर मैं उसके पास गया और उससे बातचीत शुरू करने की कोशिश की- क्या मैंने कोई जानबूझ कर ऐसा सपना देखा था?सुमन बिना कुछ बोले आगे बढ़ने लगी। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।सुमन- देखो. जो कि फरीदाबाद में है। मेरी उम्र 20 साल है।आज मैं आप सबको अपनी पहली चुदाई के अनुभव के बारे में बताने जा रहा हूँ। यह स्टोरी मेरी और मेरे फ्रेंड की मॉम और उनकी एक ग्राहक की है। आंटी का नाम मंजू है (बदला हुआ नाम) जो कि एक बुटीक चलाती हैं। आंटी का फिगर एकदम मस्त है। आंटी की उम्र 42 साल है और दिखने में बिल्कुल हीरोइन लगती है।यह बात आज से 1 महीने पहले की है जब मैं फरीदाबाद से घर आया था. मैं रात को दस बजे वापस आऊँगी।’मैंने सोचा आज तो यार मेरे तो दोनों हाथों में लड्डू हैं। जब चाहे जिसका मजा ले लूँ।अब आगे.

आज मैं तेरा सारा जादू उतार दूँगा।फिर मैंने उसको दीवार से चिपका दिया और फिर उसके होंठों को चूसने लगा और एक हाथ से उसके एक चूचे को मसलने और दबाने लगा।फिर मैं उसको बेतहाशा चूमने लगा.

तो मेरा दिल करता है कि मैं तुम्हारे ही जिस्म में समा जाऊँ।मैं उनके रस को उनकी जांघों से और चूत से पोंछ रहा था और बीच-बीच में उनके चूत के दाने को रगड़ भी देता था जिससे उनके बदन में ‘अह्ह्ह. और उधर से चॉकलेट ले आईं।अब उन्होंने अपनी अनुभवी ठरक दिखाई और मुझे पूरा नंगा करके मेरे लण्ड पर आधी चॉकलेट गिराकर चूसने लगीं.

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दोस्तो, मेरा नाम प्रदीप है। मैं मध्य प्रदेश का रहने वाला हूँ। मैं यहाँ मेरी पहली और सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। जिस घटना के बारे में मैं लिख रहा हूँ उस वक्त मेरी उम्र 21 की थी। मैं एक इंजीनियरिंग का छात्र हूँ। मेरी हाइट 5’9″ है और मेरा लंड 8″ का है। मैं भोपाल में रह कर अपनी पढ़ाई करता था।मेरी गर्लफ्रेंड भी हमारे घर से कुछ ही दूर पर रहती थी. और जैसे ही सामने देखा तो सामने भाभी के भीगे हुए कपड़े पड़े थे। मैंने साड़ी उठाई तो नीचे ब्रा-पैन्टी भी पड़ी थी। मेरी धड़कनें तेज हो गईं।मैंने पहले ब्रा उठाई और उस पर लेबल देखा 36 सी. क्यों न अपनी उंगली भी इनकी चूत में डाल कर मज़े को दोगुना किया जाए।तो मैंने वैसा ही किया और दोनों सागर रूपी तरंगों की तरह लहराते हुए मज़े से एक-दूसरे को मज़ा देते हुए पसीने-पसीने हो गए।फिर एक लंबी ‘आहह्ह्ह्ह.

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फिर वो गरम होने के कारण जल्दी से मान भी गई और फिर हम दोनों चूमा-चाटी करने लगे।मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया और दूध दबा कर पीने लगा।अब वो मुझे जोरदार किस करने लगी थी. इस चुदाई के बाद हम दोनों को किसी के आने का डर भी था सो जल्दी से अपने कपड़े पहने और निकल गए।जब मैं बाहर निकला तो मुझे कुछ आहट सुनाई दी… मैंने देखा कि वहाँ कोई लड़की थी। वो हमारी लैब असिस्टेंट के साथ हमारी फ्रेण्ड भी थी. एक्स एक्स एक्स वीडियो फिल्म दिखाइएतो उसने पानी छोड़ दिया।अब उसे दर्द हो रहा था।सपना- राज तुमने मेरी नस-नस हिला कर रख दी। मेरा तो बुरा हाल हो गया है। अब नहीं चुद सकती.

वहाँ आंटी खड़ी थीं।मैं डर गया और अपने हाथों से अपने लंड को छुपाने लगा।आंटी बोली- ये सब क्या हो रहा है?मैं बोला- क.

सारा पानी वो पी गई।अब हम दोनों ने कपड़े पहन लिए और उसने मुझसे कहा- तुमने मुझे जन्नत के नज़ारे करा दिए. वो तो अपनी मर्दानगी को बिस्तर के गद्दे से ज़ोरों से रगड़ कर रति सुख पा रहा था।इसी से बिस्तर हिल रहा था और आवाज़ आ रही थी। शायद वो औरत के साथ सेक्स करने पर होने वाले अनुभव को महसूस कर रहा था।किताब में क्या लिखा है.

उसने एक हाथ से मेरे बालों को पकड़ा और दूसरे हाथ से गाण्ड पर लगातार झापड़ मारने लगा और चोदने लगा।मैं तो बहुत पागल हो गई और मजे में तेज़-तेज़ चिल्लाने लगी।इतने मैं ही हम दोनों झड़ गए। हमें चुदाई करते-करते सुबह के चार बज गए थे।मैं वहीं सो गई. और गिरते-गिरते बचीं।अब उन्होंने भी मुझे पीछे धक्का दिया और बोलीं- पागल हो गया है क्या तू?वे मुझ पर गुस्सा होने लगीं. चला जाता हूँ। उस समय वैसे भी कॉलेज की तो छुट्टी चल रही थी। उसका क्लास भी मेरे घर से कुछ 5-7 मिनट की दूरी पर था।मैंने दोपहर को लंच किया और साइकिल ले कर चल पड़ा। उसका कुछ छोटा-मोटा काम होगा.

लाजिमी है कि वो अपनी बहन के आने का इन्तजार कर रहा होगा।कमरे में आकर मैंने दरवाजा बन्द किया और बिस्तर पर जाने की बजाए टॉयलेट में चली गई.

पकड़ कर मसलने लगा।फिर कुछ देर बाद उन्हें मैं डॉगी स्टाइल में चोदने लगा।अब तक आंटी का दो बार पानी निकल चुका था और अब मैं भी झड़ने वाला था।मैंने आंटी से बोला. ?आपा- हाँ, तुम्हारे जीजू रोज मुझे चोदते हैं, कम से कम एक orgasm होने तक, कभी कभी दो orgasm भी करवाते हैं। तूने अब तक चुदावाया नहीं है क्या?मैं- नहीं!आपा- वहाँ अपनी चूत में उंगली करती हो?मैं- हाँ !आपा- मज़ा आता है?मैं- जब जब वो छोटे दाने से touch होता है ना!आपा- वो छोटे दाने को clitoris क्लिटोरिस कहते हैं… आदमी के लण्ड मुकाबले का अंग है वो. तो वो नीचे बैठ गईं और लण्ड को जोर से चूसने लगीं।मेरा लण्ड पूरी मस्ती में था और जल्दी ही सारा रस भाभी के मुँह में बहने लगा.

लडकी नंगीबेडरूम में जाते ही मैंने उसको मेरी बाँहों में कस कर जकड़ लिया।अब मैं उसे ज़ोर-ज़ोर से अपने सीने से चिपका कर चूम रहा था, मैं खुद पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था. तो उसके बावजूद भी उसने अपने भाई के साथ लेटना क़बूल कर लिया था। शायद उसे भी इस खेल में कुछ मज़ा आने लगा था।ज़ाहिर है कि वो एक नौजवान झूबसूरत लड़की थी.

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मुंबई आते ही चोदने का जुगाड़ हो गया।मैंने शबाना से कहा- क्या तुम कुछ लोगी?शबाना- जी?मैंने फिर कहा- क्या लोगी. वो अपने हाथ से मेरे हाथ को पकड़ कर काम करवा रही थी और मुझे बताती जा रही थी।मैंने कहा- आप सलवार खोल दो. वो भी कुछ ही पलों के बाद मज़े में आ गई थी।थोड़ी देर बाद हम दोनों का ‘एंडिंग पॉइंट’ आ गया।फिर हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे को बाँहों मे लेकर सो गए.

एक हाथ से उसके चूचों को मसलना शुरू कर दिया। ओर दूसरा हाथ उसकी चूत पर ले गया। ओर उसकी चूत को सहलाने लगा और उसकी जांघों को भी सहलाना शुरू कर दिया।वो ऊहहहह. हम लोग आपस में काफ़ी खुल गए थे।अक्सर ऐसा होता था कि रात में नज़दीक होने की वजह से मैं उनका टॉयलेट इस्तेमाल कर लेता था।उसके पति जिनका नाम अशोक सक्सेना था. मुझे नहीं पता था कि उस समय वरुण कहाँ है, वो मुझे काफी देर से दिखाई नहीं दे रहे थे। मैंने दिमाग पर जोर डाला.

और शर्ट की लम्बाई भी सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी हाफ जाँघों तक होती थी।मैंने उसकी रुटीन से हट कर उसके गले को भी थोड़ा डीप और लो नेक करवा दिया था। गला ज्यादा डीप नहीं था. ’ इतना कह कर मैडम अपने चूतड़ मटकाते-मटकाते क्लास से बाहर चल दीं।मैं मन ही मन बहुत खुश हो रहा था। मेरे लंड से पानी निकल रहा था. इतना मज़ा आ रहा था जैसे कि लण्ड को चूत की जगह मुँह के अन्दर भर जा रहा हूँ।मैं इतनी अधिक उत्तेजना महसूस कर रहा था कि कुछ ही देर में मैं उसके मुँह में झड़ गया और वो मेरा सारा वीर्य पी गई।पर मेरा लण्ड इतनी जल्दी शांत होने वाला कहाँ था.

मैंने उनकी टाँगें और फैलाईं और अपना एकदम टाइट 5 इंच का लण्ड उनकी चूत पर रख कर एक ज़ोरदार धक्का मारा।वो मेरे मोटे लौड़े की चोट को सहन नहीं कर पाई और तड़पने लगी. ये सब शादी के बाद ज़्यादा अच्छा रहेगा।दूसरे शहर जाकर भी मीरा और राधे ममता को भूले नहीं थे। वो उसका हाल जानने के लिए कभी-कभी उससे फ़ोन पर बात कर लेते थे।ममता ने भी सोच लिया था कि अगर बेटा होगा तो उसका नाम राधे और बेटी होगी तो नाम मीरा रखेगी।बस दोस्तो.

मेरी बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी।उसकी शादी में अब दो दिन बचे थे। शादी के गीतों का शोर अब मेरे बंद कमरे के अन्दर भी सुनाई देने लगा था।मैं पापा के कमरे में गया और वहाँ उनकी आधी खाली शराब की बोतल ले छत पर आ गया।रात के 8:30 बजे थे.

तो मैंने लण्ड को चूत की दीवारों पर रगड़ना शुरू कर दिया। जल्दी ही वो गरम हो गई और बिस्तर पर फिर तूफान आ गया।अब भाभी गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थीं।मैं- भाभी कहाँ गिराऊँ. सेक्स वीडियो बीएफ वीडियो बीएफमैंने दे दी।इसी तरह धीरे-धीरे हम एक-दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए।अब बारी आई फोन नम्बर साझा करने की. चोदा चोदा सेक्सीतो मैं आख बंद कर के सोने का नाटक करने लगा।मेरी पत्नी बाथरूम गई और आकर सो गई। मैं कुछ देर लेटा रहा फिर उसके बाद मैं उठा और चांदनी की एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।अब तक वो गरम हो चुकी थी और उसने मेरे लोअर के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी।मुझे समझ आ गया था कि ये भी चुदासी हो उठी है. मोमबत्ती जला लेते हैं।वो बोली- देखना क्या है?मैंने बोला- देख कर चोदने में ज़्यादा मज़ा आता है।वो बोली- फिर मुझे शर्म आएगी.

इस सबको जानने के लिए कहानी का अगला भाग अवश्य पढ़िएगा।आपके ईमेल के इन्तजार में आपका प्यारा अबी नाथ।कहानी जारी है।[emailprotected].

रोमा ने वादा किया और दोनों वहाँ से निकल गए। नीरज ने अपनी पहली चाल में रोमा को फँसा लिया था। उससे दोबारा मिलने का वादा लेकर नीरज उसे घर के पास छोड़ आया।चलो यहाँ तो कुछ नहीं हुआ. तुम रोज़ टयूशन के बाद एक घंटा इधर आ जाया करो और राहुल को रिवीजन करा दिया करो।रमेश पूरा लाल हो गया और उसने हाँ कर दी. इस बात का?मैंने बात बदलते हुए कहा- वो मैं आपके हुस्न की तारीफ़ कर रहा था। तुम्हें क्या लगा?तृषा- कुछ नहीं।पर उसकी आँखें कह रही थीं कि वो मेरे इशारे समझ गई है।‘तुम्हें अपनी नई दोस्त से मिलने नहीं जाना है क्या?’मैं उसे अपनी ओर खींचते हुए कहने लगा- क्यूँ.

और चूस-चूस कर उनके मम्मों को लाल कर दिया।उन्हें भी काफ़ी मज़ा आ रहा था।अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था। मैंने कहा- मैम. आज का दिन तू कभी नहीं भूल पाएगी।मैं उत्साहित हो कर आधी खड़ी हो गई। उसने कस कर मेरे होंठों को चूम लिया. पर शायद पहली बार किसी नंगी लड़की का अपने सामने मुलायम बदन देख सबके साथ यही होता है।मैंने हार नहीं मानी और इस बार बाथरूम में जाकर ‘सू.

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तब तक तुम मेरी सहेली का ख्याल रखना।मैंने कहा- भाभी आप जाइए मैं इनका इनके पति से भी ज्यादा ख्याल रखूँगा। वो हर चीज दूँगा. फिर मैंने फ़ोन कट कर दिया और खाना खा कर सो गया।अगले दिन मैंने मम्मी से कहा- मैं दोस्त के घर पढ़ने जा रहा हूँ. मैं बोला- अभी एक मिनट के बाद तुम्हें जन्नत में होने का अहसास मिलेगा।मैं धीरे-धीरे अपने लंड को आगे-पीछे करने लगा। अब उसे मज़ा आने लगा था और वो बोलने लगी- जीजाजी करते रहिए ना.

तो बेचारी मेरे लवड़े को चूत के मुँह पर रगड़-रगड़ कर ही काम चला रही थीं।थोड़ी देर काफी प्रयास करने के बाद भी जब लंड उनकी चूत को नहीं मिला.

सिर्फ दो मिनट में मेरा पप्पू दुबारा खड़ा हो गया और इस बार उसका रूप पहले से भी ज्यादा भीषण लग रहा था।मैंने इस बार उसे बिस्तर पर लिटाया और खुद नीचे खड़ा हो गया। उसके दोनों पैरों को उठा कर अपने कंधे पर रखा और बेरहम शिकारी बन कर अपना लंड उसकी चूत पर टिका दिया।अब एक जोर का धक्का मारा.

पर मैंने उसे कसके पकड़ रखा था।मैंने झुक कर उसके चूचों को पकड़ लिया और जोर-जोर से उसकी चूत पर लंड रगड़ता रहा. उसको तो और बहुत सी कुँवारी लड़कियों को चोदना है।दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी. इंग्लिश टू बीएफमैं एक दिन कॉलेज़ नहीं गया था और घर में ही पोर्न फिल्म देख रहा था। तभी अचानक डोर-बेल बजी।मैंने सोचा कोई पड़ोसी होगा इसलिए मैं मूवी को पॉज़ करके डोर खोलने चला गया.

मैं भी तुम्हें टक्कर मार दूँ।और उसने एकदम से उठ कर अपने सीने से मेरे सीने पर एक जोरदार टक्कर मार दी।मुझे बहुत बुरा लगा. समय से पहले ही पहुँच गया।जैसा कि उसने मुझे बताया कि वो गुलाबी टी-शर्ट और नीला जींस पहन कर आएगी और बगीचे में एक पेड़ के नीचे मेरा इंतजार करेगी।अब चूंकि मैं वक्त से पहले पहुँच गया था. लेकिन तभी वह चिल्ला उठी- आआआाहहहह… मैं गई… और तेज़ करो…मैं भी अब ख़ुद पर नियंत्रण पा चुका था और लगातार चोदे जा रहा था।थोड़ी देर के बाद वह कहने लगी- अब मुझे छोड़ दो.

फिर मैं अपने घर जाने लगा तो बुआ जी ने कहा- तू रास्ते में अंजलि को भी ड्राप कर देना।मैं और खुश हो गया और अंजलि को लेकर वहाँ से निकल गया। मैंने अंजलि को उसके घर ड्राप किया. उसकी तो समझो कि लॉटरी ही निकल पड़ेगी।जाहिरा मेरी बात सुन कर शर्मा गई। मैं ऐसी बातें इसलिए कर रही थी ताकि अगर फैजान सो नहीं रहा है.

जिसकी वजह से वो आँखें मूंदे लेटी हुई थी।फैजान मेरे क़रीब आया और नीचे फर्श पर से मूव उठा कर मेरी तरफ बढ़ाई लेकिन मैंने अपनी स्कीम की मुताबिक़ बिना उसकी तरफ देखते हुए कहा- थोड़ी सी यहाँ पर लगा दो.

मैं झटके पर झटका मारने में लगा हुआ था। फिर मैंने उनको उठाया और अपनी गोद में उठा लिया और उनकी चूत को अपने लंड पर पटकने लगा। वो मेरी गोदी में उछल-उछल कर मज़े ले रही थीं।अब मेरी हालत भी खराब हो गई थी. सुमन कुछ न बोली।मैं- क्या तुम मुझे माफ भी नहीं कर सकती?सुमन- मैंने तुम्हारे बारे में ऐसा कभी नहीं सोचा था।मैं- मैंने भी तुम्हारे बारे में ऐसा कभी नहीं सोचा था।सुमन- मैंने हमेशा तुम्हें अपना दोस्त माना. वरुण का हाथ उसके घुंघराले बालों में था और श्रुति का हाथ वरुण की शर्ट के अन्दर उनके सीने पर घूम रहा था।यह दृश्य देख कर मेरी आँखों में आंसू आ गए। मैं वहाँ से भागते हुए पीछे की तरफ जहाँ वाशरूम थे.

बाबा रामदेव बीज मेरा दूसरा हाथ अभी भी फैजान की पैन्ट के ऊपर उसके लण्ड पर ही था। मैं महसूस कर रही थी कि जैसे-जैसे मैं और जाहिरा धीरे-धीरे बातें कर रही थीं. जब गार्डन में गाड़ी लाकर खड़ी की और दीदी से कहा- अब आप चलाओ।तो दीदी ने कहा- गार्डन छोटा है और मेरे से ब्रेक नहीं लगे तो?‘तो फिर क्या करना है दीदी?’तो वो शरमा कर बोलीं- कल जैसे बैठे थे.

हम कभी अंसल गार्डन में या बुद्धा गार्डन जाकर किस करते और काफ़ी टाइम तक मोबाइल पर बातें करते।इस तरह से काफ़ी दिन गुजर गए. मैंने अपनी छत के दरवाज़े को बंद किया और किनारे की दीवार के सहारे जमीन पर बैठ गया।जब-जब शराब की हर घूंट जब मेरे सीने को जलाती हुई अन्दर जाती. तो वो अपना बायाँ पैर नीचे ज़मीन पर नहीं रख पा रही थी। बड़ी ही मुश्किल से वो अपना एक पैर ऊपर उठा कर मेरी और अपने भैया की सहारे पर लंगड़ाती हुई टीवी लाउंज में पहुँची।इतने से रास्ते में भी वो कराहती रही- भाभी नहीं चला जा रहा है.

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मैं नाप लेता हूँ।मैंने इंची टेप लिया और उसका नाप लेना शुरू कर दिया। पहले मैंने उसके पेट पर इंची टेप लगाकर उसकी कमर का साइज़ लिया।हय. दोनों गाड़ी में बैठ गए। नीरज बस अपने झूठे प्यार को लेकर इधर-उधर की बातें करने लगा और रोमा चुपचाप उसकी बातों को गौर से सुन रही थी, उसका दिल भर आया था।गाड़ी बस चली जा रही थी. मैंने उन्हें पलंग पर चित्त लिटा कर अपना सुपारा उनकी पहले से ही भीगी चूत के दरवाजे के ऊपर रखा और धीरे से कमर हिला कर सिर्फ़ सुपारे को ही अन्दर किया।मेहर भाभी ने मेरे फ़ूले हुए सुपारे को अपनी चूत में घुसते ही अपनी कमर को झटका दिया और मेरा आठ इन्च का लण्ड पूरा का पूरा उनकी चूत में घुस गया।तब भाभी ने एक ‘आह’ सी भरी और बोली- आह.

तभी देखते-देखते ही मेरा लण्ड और मैं दोनों ही उत्तेजित होने लगे।वो इस तरह से लण्ड को चूस रही थी कि जैसे पता नहीं कितने दिनों की प्यासी हो।उसने मेरे लण्ड को करीब बीस मिनट तक चूसा. मैं सीधी लेटी हुई ऊपर पंखे की तरफ देखते हुए ये सोचने लगी कि जो मैंने आज किया वो सही है या गलत है?तो दोस्तो.

इसी के साथ वे झड़ गईं।मैंने उनका सारा रस पी लिया और फिर उन्हें किस करने लग गया।अब आंटी मेरे ऊपर आ गईं और मेरे लण्ड को मसलने लगीं। उन्होंने मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लग गईं।मैं तो जैसे जन्नत के मज़े ले रहा था।फिर आंटी ज़ोर-ज़ोर से मेरा लण्ड हिलाने लगीं और मैं झड़ गया.

बस उसे चोदने के बारे में ही सोचता रहता था। वो थी ही इतनी हॉट और सेक्सी उसका फिगर 32-30-34 का था।एक दिन मैंने मौका देख कर उसे प्रपोज़ कर दिया. किन्तु चुप थीं।करीब 20 मिनट मालिश करने के बाद मैंने पूछा- अब आराम है?तो भाभी ने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया।अब मैं भाभी की परीक्षा ले रहा था. उन चुस्त कपड़ों में… ऐसा लग रहा था मानो स्वर्ग से कोई अप्सरा धरती पर उतर आई हो।उसका मस्त फिगर किसी भी लड़के का लण्ड खड़ा करने के लिए बहुत था।मैं लगातार उसे देखे जा रहा था। उसकी खूबसूरती को देखकर मैं पागल सा हो गया था।मैं समझ गया था कि यही पूजा है लेकिन तब भी पक्का होने के लिए मैंने उसे फोन लगाया.

तो मैंने अपने लंड को लगभग गरी के तेल में डु्बो दिया।मेरी इस हरकत को देखकर सुप्रिया ने मुझसे पूछा- तुमने अपने उस (लंड) पर तेल क्यों लगाया?मैंने अपनी उँगली से उसकी बुर की ओर इशारा करते हुए कहा- ताकि तुम्हारी बुर में ये आसानी से चला जाए।‘हाय. तुम यहाँ घर में अकेली रहती हो तो पड़ोस में किसी की नज़र नहीं पड़ी क्या?वो बोली- मेरे साथ मेरी सास भी रहती है. मेरा दाहिना हाथ उसके बांए मम्मे को मजा दे रहा था और बांया हाथ उसकी कमर पर था।अभी तक हम नंगे नहीं हुए थे। मैंने सुमन की कमीज उतारी। उसने सफेद समीज पहनी थी। उसके स्तन पूरे तन गए थे।वो पूरी तरह गरम हो चुकी थी।समीज उतारते ही मैं मदहोश हो गया इतने सुन्दर स्तन देख कर मेरा लवड़ा खड़ा हो गया था।दूध भरे मम्मों पर चॉकलेटी निप्पल.

मैं अपनी बहन के पास लुधियाना में रहता था और वहीं काम करता था।वहाँ घर के सामने एक बहुत ही सेक्सी पड़ोसन रहती थी.

सेक्सी बीएफ जीजा साली: रोमा ने वादा किया और दोनों वहाँ से निकल गए। नीरज ने अपनी पहली चाल में रोमा को फँसा लिया था। उससे दोबारा मिलने का वादा लेकर नीरज उसे घर के पास छोड़ आया।चलो यहाँ तो कुछ नहीं हुआ. आपके ये गुस्सा होने का अंदाज़ हमारी जान जरुर ले लेगा।यह कहते हुए फिर से उसने मेरे होंठों को चूम लिया।मुझे गुस्सा आ रहा था और उसे ये सब मज़ाक लग रहा था। मैंने उससे कहा- मुझे अब घुटन सी हो रही है, प्लीज मुझे थोड़ी देर अकेला छोड़ दो। मैं अभी यहाँ नहीं रह सकता।तृषा- ठीक है तो फिर कल मिलने का वादा करो।मैं- ठीक है.

उसका इंतज़ार करना था।आप सब इस कहानी के बारे में अपने ख्यालात इस कहानी के सम्पादक की ईमेल तक भेज सकते हैं।अभी वाकिया बदस्तूर है।[emailprotected]. कहीं बाद में दिक्कत ना आए?मैंने कहा- ठीक है, आप ऊपर चले जाइए और कोई दिक्कत हो तो आवाज़ दे देना।वो कपड़े लेकर तीसरे फ्लोर पर चली गई। थोड़ी देर बाद उसकी आवाज़ आई. वो रूचि से ही प्राप्त हुआ था।अब आगे इसी तरह मैंने चुम्बन करते हुए उसके गालों और आँखों के ऊपर भी चुम्बन किया और जैसे ही उसकी गर्दन में मैंने अपनी जुबान फेरी.

इस सबको जानने के लिए कहानी का अगला भाग अवश्य पढ़िएगा।आपके ईमेल के इन्तजार में आपका प्यारा अबी नाथ।कहानी जारी है।[emailprotected].

।उस वक़्त मेरे मुँह से केवल ‘वाह’ के अलावा कुछ नहीं निकला।मैं अपने आपको बहुत ही खुशनसीब मान रहा था और सपने की तरह उसे देख रहा था कि अचानक उसने ही मुझे नींद से जगाया।अब आप सोच रहे होंगे कि मैंने उसे और उसने मुझे पहचाना कैसे?अरे इस आधुनिक युग में सब कुछ हो सकता है. तो कभी टोपे पर जीभ फिरा कर मज़ा दे देतीं।अब मैंने भी मामी को और तड़पाने का सोचा और उनकी चूत पर मालिश करना शुरू कर दिया।मामी मचल उठीं और मेरे लौड़े को छोड़ मेरे मुँह पर आकर बैठ गईं. इस बार वो मेरा पूरा साथ दे रही थी। अब मैंने उसकी ब्रा और पेंटी भी निकाल दिए।cमैं उस दिन पहली बार किसी लौंडिया को नंगी देख रहा था, उसकी गुलाबी बुर पर बहुत ही हल्की हल्की झांटें थीं.