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फिर जॉन ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे बूब्स को आज़ाद कर दिया. कुछ ही देर में मेरी चूत से पानी निकलने लगा और मेरी चूत चिकनी हो गयी. ‘अब तुम तीनों अपने हाथों से हमारा सफेद पानी अपने जिस्म पे खास खास जगह अच्छे से लगाओ.

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मैं उस धक्के से जोर से कराह उठी और बोल पड़ी- ओह माँ … सरदार जी इतनी जोर न मारो … बच्चेदानी तक जा रहा है.

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जबकि अमर की बीवी को एक लड़की हो चुकी थी और जल्दी ही एक और बेबी होने को था.

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थोड़ी देर तक जब मैंने कोई हरकत नहीं की, तो उन्होंने अपनी आंखें खोलीं. शायद मोनी का पति उसके साथ ना तो ठीक‌ से कुछ करता था और ना ही वो उसको‌ बच्चा दे पा रहा था, इसलिये ही मोनी ने मुझे अब कॉन्डोम पहनने से मना किया था और इसलिये ही शायद वो आज खुद मेरे पास आकर सोयी थी. माना कि साफ़ साफ़ ‘हाँ’ नहीं थी लेकिन साफ़ साफ़ ‘न’ तो बिल्कुल भी नहीं थी और आधी-अधूरी ‘न’ तो नखरे वाली ‘हाँ’ ही होती है … यह मैं जानता था.

इससे पहले मैं अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़कर मुट्ठ मार लेता था मगर आज तो साक्षात चूत मुझे अपने पास बुलाने का न्यौता दे रही थी. वहां सूट कटिंग सीखी, फिर अपने कस्बे में तो केवल सूट से काम नहीं चलता, तो लेडीज के ब्लाउज, फ्रॉक, सलवार, कुर्ते, पैंट शर्ट, सब काम आता है. पर उन्होंने ये सब करने से मना कर दिया क्योंकि उनको इसकी आदत नहीं थी.

पापा के लंड से चुदाई का आनंद लेते हुए मैं भी कामुक स्वरों से पापा का जोश बढ़ाने लगी थी.

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एक बार जब मैं उनके घर गया, तो वहां न तो बंटी दिखा और न ही सलोनी मौसी दिखीं. चूत चुदाई की प्यासी मेरे दोस्त की बीवीअब तक आपने पढ़ा था कि रात को ग्यारह बजे सरिता मेरे पास चुदने के लिए आ गई थी. सच कहता हूं दोस्तो, मन तो किया कि अभी दरवाजा खोल कर अन्दर चला जाऊं और मौसी को वहीं बाथरूम में चोदने लगूं, पर ऐसा मुमकिन नहीं था, क्योंकि मौसी ने शायद दरवाजा अन्दर से लॉक किया था.

मैंने रोहित को कुछ नहीं कहा और न ही उसे यह पता लगने दिया कि मैं जाग रही हूँ. मैंने मन ही मन कहा कि पापा मैं तो कली से फूल पहले ही बन चुकी हूँ मगर आपको नहीं पता है इस बारे में.

दिन भर की भागदौड़ के बाद रात में जब सब लोग अपने कमरों में चले गए, तो सभी सालियां और बहनें मिल कर मुझे मेरे कमरे में ले गयी. वहां हम एक लेडी गारमेंट्स की शॉप में गये और फिर वहां से मैंने मेरे लिये कुछ ड्रेसेस लीं। फिर रोहन मुझे एक लेडी अंडरगार्मेंट्स की शॉप में ले गए. प्रेक्टिकल्स में वो ही सब टेस्ट वगैरह करता था, तो मुझे ज्यादा टेंशन नहीं होती थी.

लंड का पानी झड़ जाने के बाद मुझे राहत मिली और मैं वापस अपने बेड पर आ गया.

मैं चड्डी में खड़ा था मेरे सिक्स पैक और खड़ा लंड देखकर वो देखती ही रह गयी. फिर कुछ सोच कर अपने चारों तरफ देखा कि कोई मुझे देख तो नहीं रहा है ना और मैं चुपके से स्टोर की तरफ जाने लगा. दिन भर की भागदौड़ के बाद रात में जब सब लोग अपने कमरों में चले गए, तो सभी सालियां और बहनें मिल कर मुझे मेरे कमरे में ले गयी.

कार में घर जाते वक्त या उसके घर में कुछ वक्त रुकने के समय वो जब तब मुझे टच कर देती थी. अंकल ने मुझसे पूछा- बेटा आजकल कहाँ हो, दिखते नहीं हो?मैंने कहा- अंकल, काम में बिज़ी था इसलिए तो आज स्पेशल टाइम निकाल कर घर पे आया हूँ.

जब मैं रूम में गया तो मायरा ने एकदम झीनी नाइटी पहनी हुई थी जिससे उसके बूब्स और चुत दोनों झलक रही थीं. मैंने उसके पीछे से उसकी चूत के अन्दर से अपने लौड़े को डाल दिया और उसकी चूचियों को पकड़ कर पीछे से इंजन स्टार्ट कर झटके मारने लगा. मम्मी-पापा, एक भाई, जो कि मुझसे एक साल छोटा है और एक बहन है, वो मुझसे दो साल छोटी है.

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चूंकि मेरा काम मसाज का था इसलिए मेरे जमीर ने मुझको उनकी मसाज करने को भी अन्दर ही अन्दर मना कर दिया था.

अन्दर देखा तो भईया पूरे ऊपर से नीचे रंग में नहाए हुए भांग और दारू के नशे में धुत्त पड़े सो रहे थे. मुझे रिया बहुत पसंद थी पर मैं अपनी दिल की बात उसे बात नहीं पाता था. दो पल बाद मैंने अपना लंड बीवी की चुत से बाहर निकाला, तो मेरे लंड के साथ थोड़ा सा सफेद गाढ़ा वीर्य भी बहकर बाहर आ गया.

और जैसे ही मैं अपने लिंग को तेज़ी से उसकी योनि में अंदर को धकेलता, वसुन्धरा भी अपनी कमर के ख़म को सीधा कर के अपनी योनि ऊपर को धकेलती. मैं- नहीं देना तो कोई बात नहीं, आपने मेरी मर्जी गिफ्ट देने को कहा था, तो मांग लिया. सेक्सी पाठवामैं अपनी गांड की खुजली खत्म करने के लिए किसी अजनबी लंड को ढूँढने लगा और एक गे साइट में जाकर मैंने फिर से एक नया अकाउंट बना लिया.

बस इतने से ही मेरा पूरा बदन उत्तेजना से थरथरा गया, मेरी गर्दन के पीछे पता नहीं ऐसा क्या था कि वहां उनके होंठ लगते ही मैं आनन्द के सागर में डूबने उतराने लगी. मैंने माया भाभी को खड़ा किया और उसकी पजामी और पैंटी दोनों एक साथ निकाल दी.

मेरा हर ब्लाउज डीप गले का ही होता है, इस वजह से स्तनों के बीच की घाटी साफ साफ दिख रही थी. वो बहुत गोरी है, उसके बूब्स ज्यादा बड़े नहीं हैं, बस 30 या 32 के होंगे लेकिन उसकी गांड बहुत बड़ी थी. वह भी तब, जब मैं अट्ठाईस साल का जवां मर्द था, लम्बा तगड़ा पुराना गांडू था.

चूंकि हल्की चांदनी रोशनी थी और इस छत से आस पास किसी को कुछ दिखता नहीं था. जब मुझे लगा वो सारा माल पेट के अन्दर ले चुकी है, तभी मैंने लंड बाहर निकाला. फिर मैंने भी सुषी से पूछा कि क्या उसने कभी किसी के साथ कुछ किया है? सुषी ने भी ना में जवाब दिया.

हालांकि उसकी ये सैटिंग ज्यादा दिन तक नहीं चली और उन दोनों की आपस में लड़ाई हो गई.

मैंने चुपके से उसकी चूत पर लंड को लगा दिया और उसको बांहों में भर लिया. फिर मैं चाय नाश्ता करने के बाद जाने लगा, तो वो रोने लगी और मुझे जोर से किस किया.

तभी भाभी ने धीरे से कहा- रोहन अपना बॉक्सर उतार दो, ये गंदा हो जाएगा. इसके बाद राधिका ने ब्लैक डॉग के चार पटियाला पैग बनाए और हम सबको अपने अपने गिलास उठा कर चियर्स करने के लिए बोला. मैंने उससे कहा- मेरी जान, मेरे रहते तुम्हें इतना तड़पने की जरूरत नहीं!अब वो मुस्कुराई.

थोड़ी देर चुत चोदने के बाद उसकी गांड का दर्द कम हो जाता, तो वो फिर से मेरा लंड चुत से बाहर निकाल देती. रंग को लेकर काफी दुखी सी महसूस हुई।वह बोली- शायद मैं सबसे काली लड़की थी अपने स्कूल कॉलेज की और हर लड़का गोरी, खूबसूरत लड़की को अपना साथी बनाना चाहता है. शीतल भाभी ने झट से मेरे पूरे कपड़े खोल कर मेरा 7 इंच का लंड बाहर निकाल दिया.

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यह सुनकर पहले तो उसने बोला- बधाई हो बंध्या … अब मैं अकेली नहीं रही, तेरा भी मेरी तरह ब्वॉय फ्रेंड हो गया, तू अब उससे अच्छे से बात कर ले और अगर वह तुझ से शादी करने के लिए तैयार हो, तो तू उसके साथ सो ले, तभी तेरे यह जिस्म की तड़प मिटेगी और तेरी ये प्यास भी तभी मिटेगी. मैंने सरिता का एक पैर उठाकर बेड पर रखा तो सरिता ने अपने दोनों हाथ मेरे गले में डाल दिए. बाप ने बेटी की चुदाईमन में पूजा की चूत में लंड को डाला तो लंड ने नीचे बहते हुए पानी में थूक दिया.

तुम्हारी दीदी तो दे नहीं सकती इस हालत में प्लीज एक बार तुम दे दो, उसके बाद मैं तुमको परेशान नहीं करूंगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा.

मेरे सपनों की रानी के होंठ इतने मस्त हैं कि बस ऐसा लगता है कि उनको चूसता ही रहूं … चूसता ही रहूं. बस कुछ मसाला लगाया है ताकि लड़कों का लन खड़ा हो जाए और लड़कियों फुद्दी गीली हो जाए.

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मैंने उनसे जल्दी आने का कारण पूछा, तो शीतल भाभी ने बताया कि मेरे पति एक बिज़नेसमैन हैं और वो कल रात से बिज़नेस के सिलसिले में 15 दिनों के लिए बाहर गए हैं.

मुझे उस पर तरस आ गया और एक दिन मैंने प्रेक्टिकल में पूछ लिया- तुम हमेशा उदास क्यों रहते हो?उसने ‘नथिंग’ कह के बात उड़ा दी. जागृति मेम ने मेरी जींस का बटन खोला और चड्डी के अन्दर हाथ डाल कर लंड हिलाने लगीं. उसके पापा ने जब सब कुछ सुन लिया तो बोले- बेटी, जाओ आराम से घर जाओ और कल परसो तुम्हें ऑफिस जाय्न करने का लेटर मिल जाएगा क्योंकि यह जॉब मेरे ही नीचे है.

కన్నడ సెక్స్ వీడియో కన్నడ సెక్స్ వీడియోफिर मैंने उनकी चूत को और देर तक चाटा, जिससे वो फिर से चुदासी हो गईं. वो मेरे मम्मों को अब पूरी तरह से दबाता था और जब भी मौक़ा मिलता तो उन पर अपना मुँह भी मारता था.

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पत्नियां घूँघट की आड़ में अपने पतियों के साथ संसर्ग करने जाती थीं और उनके सेक्स करने का अंदाज काफी छुपा छुपा सा रहता था. शीतल- आह … मजा आ रहा है … साले भोसड़ी के खा जा मेरी चूत को … आह अनिल हां ऐसे ही और अच्छे से उफ्फ चाट ले हरामी आह इसे पूरा उफ्फ मजा आ रहा … आई मां मर गई. तभी मुझे अचानक से किसी के आने की आहट हुई तो मैं उधर से हट गया और बाहर आ गया.

सर्दी थी तो मैंने एक शाल ओढ़ लिया ताकि किसी को पता नहीं चले कि कौन है. ‘उपिंदर … वो अजय का दोस्त, उसके डैडी के जन्मदिन के लिए हम क्यों जाएं?’‘मम्मी मुझे सब पता है कामिनी दीदी के बारे में … और जो आपने उपिंदर के साथ किया है, वही मैंने भी किया है. अभी तक ये मेरा पहला मौका था इसलिए मैं कोई जल्दबाजी और रिस्क लेना नहीं चाह रहा था.

मैंने किस कुत्ते की तरह पहले तो उनके पूरे जिस्म को अच्छी तरह से नाक से सूँघा, फिर अपनी जीभ से उनके पूरे जिस्म को चाटने लगा था. अभी तक मैंने अपनी उंगली से वसुन्धरा की योनि को हल्का सा भी कुरेदा नहीं था. मुझे कुछ याद आ गया और मैंने रुई में लेकर सुन्न करने वाली दवा उसकी चुत पर मल दी.

डाक्टर रेखा आ गयी और बैठते हुए बोली- हर्षद, मैं तुम्हें कुछ दवाईयां लिखकर देती हूँ. अब भाई मुझ पर कुछ ज़्यादा ही मेहरबान हो गया तो मुझे मस्त करके चोदा करता था और बोलता था- पुन्नी, तुमने सच में मस्त चूत दिलवाई है.

पटेल का वो दोस्त बोला कि सबसे जल्दी लड़की चुत चाटने से गरम होती है.

रानी ने मुझे प्यार से कई बार चूमा और फिर मूर्छित सी होकर मेरे ऊपर ढेर हो गयी. মারোয়ারি সেক্স ফিল্মकभी अपना लंड पूरा बाहर निकालकर फिर से एक ही धक्के में अपना पूरा लंड चुत में घुसा देता था. एक्स एक्स एक्स वीडियो में हिंदीमैं थोड़ा सा आगे होकर बिस्तर पर बैठ गया और उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया. मैंने सॉरी बोला तो वो बोलीं- कोई बात नहीं … इसका टेस्ट भी अच्छा है.

कुछ दिन बाद सालियों को कहानी सुनाने के बाद मैंने दिल्ली में कुछ जरूरी काम का बहाना बना कर दिल्ली का प्रोग्राम बना लिया और सारा भी मेरे साथ हो ली.

नमस्‍ते प्‍यारे पाठको, मैं स्‍वच्‍छ इंदौर का एक मासूम लड़का हूं जिसे आप मासूम इंदौरी के नाम से जान लीजिये।मैं आज आपको मेरे जीवन की एक सत्‍य घटना से अवगत कराने जा रहा हूं।तो हॉस्पिटल नर्स सेक्स कहानी का मजा लें. मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी एक उंगली डाली और मैंने उसकी ब्रा को भी उतार फैंका. मम्मी-पापा, एक भाई, जो कि मुझसे एक साल छोटा है और एक बहन है, वो मुझसे दो साल छोटी है.

क्योंकि हम दोनों लोग जब भी अकेले में मिलते थे, तो वो मुझे अपने गले से लगा लेता था और मुझसे बात करते करते अपना हाथ मेरी गांड पर फेरने लगता था. एक बार जब सारा मेरे लण्ड को सहला रही थी तो डॉक्टर जूली से उसकी नज़रें मिलीं और दोनों मुस्कुरा दीं. मैंने देखा एक बहुत ही खूबसूरत से अंकल, जिनकी उमर 50-52 साल के आस-पास होगी, पार्क में टहल रहे थे.

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लेकिन जब भी कभी कभार हमारा सामना होता था तो भाभी मुस्कुरा देती थीं. मैं बहुत जोर से चीखी और चिल्लाई- फट गई मेरी चुत … मार डाला रे बहुत दर्द हुआ …मुझसे अब दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था. मेरी उंगली का सिरा तो योनि की दरार के ऊपरी हिस्से पर स्थित चने के दाने के साइज़ के भगनासे पर आ कर ठहर गया लेकिन वसुन्धरा के मुंह से जोर-जोर से कराहें … कराहें क्या एक तरह से चीखें निकलने लगी.

नम्रता- मैं भी बहुत चाहती हूं कि तुम मेरी चूत में अपना लंड डालकर पड़े रहो या अपने मुँह में मेरी चूत लेकर चबाते रहो.

मैं सुबह पिल लेकर दे दूंगा। फिर भी वो नहीं मानी और अपनी जिद पर अड़ी रही.

हमारी जीभें एक दूसरे के मुँह में एक दूसरे के रस का मजा लेने लगी थीं. तुम अपना काम करती रहो तब तक मैं तुमको यहीं किचन में ही थोड़ा मजा दे देता हूँ. विदेशी नंगीमैं नवाज भाई को यह बता नहीं पाया कि उनसे गांड मराए दो महीने हुए हैं, उन्होंने मेरी कसके रगड़ दी थी.

जाते हुए प्राची ने मिनी के होंठ पर किस किया और अच्छे से एन्जॉय करने को बोली. अब आगे गरम भाभी बस सेक्स कहानी:मैंने अपना चेहरा उसके कंधे से हटाकर बिल्कुल उसके गाल के पास अपना गाल कर टच कर दिया. अब वे दोनों एक दूसरे के होंठों को फिर से चूसने चूमने लगे; दोनों ही अपनी अपनी लाज शर्म खो चुके थे.

मुझे राशि पर गर्व होता था कि वह खुले दिल से अपनी मन की इच्छाओं को पूरी करती है. चाची भी मुझसे कुछ भी नहीं बोलीं और मुझे भी उनके मम्मों के स्पर्श को पाकर बहुत मज़ा आ रहा था.

मुझे इन बातों में मजा आ रहा था लेकिन मैं नखरे दिखाती हुई बोली- जीजू कुछ तो शर्म करो, बहुत हो गया … प्लीज छोड़ो मुझे!जीजू- शिवांगी, तुम बहुत सेक्सी हो, तुम्हारी चूची कितनी प्यारी है.

रिया- तुम अभी क्या कर रहे हो?मैं- मैं अभी पढ़ाई के लिए यहां रहता हूं. अजय मुस्कुराते हुए बोला- अब आगे का क्या प्लान है?मैंने अजय को बोला- प्लान क्या होगा, जब वो राजी है. पिंकी ने एक बार फिर अमर को खींचा और उसके गालों व होंठों पर किस कर दिया.

भोजपुरी एक्स एक्स कपिल और शारदा चाची बाहर निकलने ही वाले थे इसलिए तब मैं भी वहीं से भागा, लेकिन भागने के कारण जो आवाज हुई उसकी वजह से शायद शारदा चाची का ध्यान दरवाजे की तरफ गया और दरवाजा हल्का खुला हुआ देख कर वह तुरंत समझ गई होगी कि कोई देख रहा था. वह भी पूरी चुसक्कड़ थी और मेरे लंड को पूरी तरह से अपने गले तक ले जाती थी.

मैंने उसके पीछे से उसकी चूत के अन्दर से अपने लौड़े को डाल दिया और उसकी चूचियों को पकड़ कर पीछे से इंजन स्टार्ट कर झटके मारने लगा. मुझे शर्माता देख कर भाभी बोलीं- क्या हुआ देवर जी … अब तुम रंग नहीं लगाओगे क्या?मैं सकपका कर बोला- भाभी, मैं रंग लाना तो भूल ही गया. मेरे ऐसा करने से वो जोर-जोर से आहें भरने लगी और सिसकारियां भरने लगी.

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मैं झट से नीची दीवार के रास्ते प्लाट में कूद गया और भाभी के पास चला गया. इधर पूजा अपने मम्मों को उठाया और एक हाथ से अपने मम्मे को पकड़ कर रखा और एक हाथ से मेरे सर के पीछे के बाल पकड़कर मेरा चेहरा मम्मे की तरफ ले गई. वसुन्धरा ने तत्काल अपना बायां हाथ मेरे हाथ पर से हटाया और अपने दोनों हाथों से मेरे सर को जकड़ा और मेरे सर को अपने स्तन की ओर दबाने लगी.

वैसे तो मेरा उनके घर पर अक्सर आना-जाना लगा ही रहता था लेकिन मेरी ज्यादा बातें रवि के साथ ही होती थीं. मैं- अरे मेरी रानी वो सुसु नहीं था … जब तुझे बहुत मजा आया था, तेरा भी तो नीचे से निकला था, जिसे मैंने चाट लिया था.

क्या इसी को प्यार कहते हैं?हम दोनों काफी थक चुके थे और एक दूसरे के साथ काफी देर तक लिपटे रहे.

फिर मैंने भी खुद को ढीला छोड़ पैर ऊपर उठा दिए मैं भी उल्टा घूमने लगा. खाना खाने के बाद उसने मुझसे पूछा- तुम कहाँ रहते हो?मैंने कहा- एक हॉस्टल में. आज मुठ मारने में एक अलग ही मज़ा था, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा लौड़ा हाथ में नहीं बल्कि उसकी फ़ुद्दी के अन्दर-बाहर हो रहा हो! दस मिनट के बाद मेरा लंड छूट गया और मेरे लंड से पिचकारी सीधी दीवार पर गिरी.

उस दिन के बाद भी हमें कई मौके मिले जब मेरी चूत की कुटाई हुई, एक दो बार तो सुबह सवेरे मोर्निंग वाक पर पेड़ से टिक कर चुदी मैं!कहानी जारी रहेगी. मैंने कहा- ठीक है लेकिन मैं तुम्हें आईपिल लाकर दूंगा … तुम खाती रहना, वरना तुम प्रेग्नेंट हो जाओगी. उसके बाद में 2010 में मेरी शादी तय हो गई, जून में उसका रिजल्ट आया और वो अच्छे नंबरों से पास हो गई.

अगर आपका घर भी ऊंचाई पर हो, तो अपनी चूत को ऐसे ही खुली हवा में चांदनी रात में झटके मार कर चोदने का मजा लें.

देसी डॉट कॉम बीएफ: मैं भी बहुत जोश में आकर जोरदार धक्के दे देकर उनकी चूत की चुदाई किए जा रहा था. मैंने अनजान बनते हुए कहा- मैं कहां मुँह मार रहा था?कल्पना भी शायद समझ गईं कि मैं उन्हें परेशान कर रहा हूँ, अंत में हार मानते हुए बोलीं- मेरी बुर के आसपास का एरिया दर्द कर रहा है.

मैं उसके कानों में बोला- रिमेम्बर … टूडे यू आर माय स्लट? (तुम्हें याद है न तुम मेरी रखैल हो आज …)वो मुस्करा कर चुप हो गयी और गांड चुदाई का मजा लेने लगी।कुछ देर इसी पोज में चोदने के बाद मैंने उसे डाइनिंग टेबल पर बैठा दिया और उसकी चूत से बह रहे रस को पीने लगा। वो आंख बंद करके चूत चटाई का मजा लेने लगी। मैं उठा और उसी पोज़ में उसकी एक टांग को उठाये एक ही झटके में अपने लण्ड को उसकी चूत में पेल दिया. करीब 5 मिनट तक जीजू अपनी जीभ से ही मेरी चूत को चोदते रहे। मेरी हालत तो बिल्कुल खराब हो चुकी थी पूरी तरह से चुदासी हो चुकी थी बस मन कर रहा था कि जीजू अपना लंड मेरी चूत में एक ही झटके में अंदर डाल दें और जोर से मुझे चोद दें. खैर उस समय रूबी घर से दूर एक चंडीगढ़ में हॉस्टल में रह कर कॉलेज में पढ़ती थी और मैंने अपने 12 वीं की परीक्षा दे रखी थी.

यूं ही दिन बीतते गए और मेरा आकर्षण बढ़ता ही जा रहा था और शायद आग उधर भी लगी थी, क्योंकि जितनी तवज्जो वो मुझे देती थी, किसी और को नहीं देती थी.

रात को करीब एक बजे के लगभग मेरी नींद खुली तो मैं पेशाब करने के लिए बाथरूम में गयी. मैं अपने घुटने उसकी जांघों से लगा कर, अपना हाथ उसकी जांघों पर फेरने लगा. बाद में दोस्तों से जानकारी हुई कि गांव में भी सेक्स का खेल चलता है और वो शौच के बहाने खुले में जाकर लड़कियां अपने जानम से मिलती हैं और उनके बीच खेतों में सेक्स हो जाता है.