बीएफ चोदी चोदा वीडियो में

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तो यहाँ क्या करोगे?वो बातें कर रही थी और मैं कमीना उनके वक्ष पर नज़र गड़ाए बैठा था !मैंने कहा- बस किसी कॉलेज मैं कुछ लेक्चरर बनने की सोच रहा हूँ. पहाड़ के पर्यायवाचीवो कुछ नहीं बस कपड़े समेट रही थी… क्या हुआ?’‘वो भाभी जी आपको खाना खाने शाम को हमारे घर पर आना है और भाभी जी आपके ससुर जी कहाँ हैं?’‘वो ऊपर हैं, कुछ काम कर रहे हैं।’‘अच्छा आप जाओ.

फिर मेरे नोट्स भी तो बनाने हैं।” प्रिया ने मुझसे अलग होते हुए कहा और मेरी तरफ देख कर हंसने लगी…मैं कुर्सी से खड़ा हुआ और उसे अपनी तरफ खींच कर गले से लगा लिया। वो कसमसा कर मुझसे छूटने लगी और इस खींचातानी में मेरे हाथों में फिर से उसकी चूचियाँ आ गई और मैं उन्हें दबाने लगा। उसने ब्रा पहन राखी थी इसलिए चूचियाँ सख्त लग रही थीं। मैं मज़े से दबा रहा था और वो मेरे हाथ हटा रही थी…. सेक्सी आइटममसल दो मुझे !” विनायक मेरे बदन के हर हिस्से को होंठों से चूम रहा था, हाथों से मसल रहा था और मैं आनन्द से उसकी बाँहों में सिसक रही थी, मचल रही थी.

मैंने उसे काफ़ी देर तक अलग-अलग आसनों में चोदा।फिर जब वो थक गई तो बोली- मेरी जान अब कंडोम निकाल कर चोदो मुझे.बीएफ चोदी चोदा वीडियो में: पहले तो नहीं देखा अपने एरिया में इसको?कॉन्स्टेबल- हाँ साब कोई प्राइवेट धंधे वाली लगती है और देखो साब खुले में करने की शौकीन है.

गीली चूत की फचर-पचर, रीटा की मधुर ईस्सऽऽऽऽऽ ईस्सऽऽऽ सिसकारियाँ और बहकी बहकी बेतरतीब साँसें कमरे के वातावरण को रंगीन बनाने लगी.!और मैं हँसने लगी।मेरी हँसी देख कर वो अपने आंसुओं पर काबू करते हुए मुस्कुराने लगी।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।[emailprotected].

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चोदो !यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !तब उसने 3-4 और जोर के धक्के लगाते हुए कहा- आज कुछ धीरे नहीं होगा !उसका इतना जोश में आना, मुझे पागल कर रहा था… उसने जोर-जोर से मुझे चोदना शुरू कर दिया था।मैं इतनी गर्म हो चुकी थी कि कुछ ही देर में मैं झड़ गई।मैंने पूरी ताकत से विजय को पकड़ लिया।तब विजय ने मुझसे कहा- आज इतनी जल्दी झड़ गई तुम !मैंने उसको कहा- तुम्हें इससे कोई परेशानी नहीं होगी.!कहने को तो मैंने कह दिया, पर मेरा दिल इतने ज़ोर से धड़का कि मुझे पसीना आ गया। मैं डर गई कि अकेले पा कर क्या संयम मेरा फायदा उठाना चाहता है.

सरा दूध पी जाओ इनका…मैं भूखे बच्चे की तरह उसके चूचियाँ चूसने लगा।जीत, बड़ा मजा आआअहहह रहा है… आआह…ईईईई”उसने अपनी जांघें चौड़ी कर ली और मैं दनादन धक्के लगाने लगा।ओए जोर से आह्ह…”10-15 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों ही झड़ गए।उस रात हमने 4 बार चुदाई की और फिर एक दूसरे की बाहों में पता नहीं कब नींद आ गई।आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताना।आपका दोस्त जीत शर्मा[emailprotected]. बीएफ चोदी चोदा वीडियो में यह कहानीपुरानी पी डी ऍफ़ कहानियोंमें से पुनर्प्रकाशित की गई है।मेरा नाम पूनम है। मैं 36 वर्षीय गोरे रंग वाली एक शादीशुदा औरत हूं। मेरी हाईट करीब 5.

हम सबने मिल कर तय किया कि जो सबसे ज्यदा पुश अप करेगा वो जीत जायेगा, क्योंकि मुझे अपने आप पर पूरा भरोसा था इसलिए मैं पुशअप के लिए मान गई, साथ ही में सोनिया को उसी के खेल में हराना चाहती थी.

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वो अब मुझसे काफी खुश है और मुझे ही अपना सब कुछ मानती है…दोस्तो, आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बतायें, इस पर भी आपके सुझाव भी भेजें।मुझे आपके मेल का इन्तज़ार रहेगा. मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि मैं हार गयी हूँ कि सायरा खान जो कभी भी किसी भी चीज में नहीं हारी, हमेशा ही जीतने वाली सायरा खान आज एक छोटी सी प्रतियोगिता में अपनी सहेली से हार गई. !वो मेरी बाइक पर आ गईं, तब मैंने देखा कि वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी थीं। करीब 30 साल की होंगी। उसके कपड़े में से उसका जिस्म साफ़ दिखाई दे रहा था।मेरे मन में सेक्स की इच्छा जागृत होने लगी, मैं बाइक चलाते वक्त उसको थोड़ा पीछे को दबाया तो देखा कि वो भी आगे की ओर धक्का दे रही है। मुझे मज़ा आ रहा था।जब उनका घर आया तो वो बोलीं- बस यहीं रोक लो.

और वो मुझे बेरहमी से चोदने लगा और कहने लगा- लो मेरी जान… और लो… मजा आ रहा है ना?काफी देर मेरे जिस्म को बेरहमी से चूसने, चाटने, काटने, मसलने और चोदने के बाद मैं अब दुबारा झड़ने के लिए तैयार थी।उधर विजय भी अपना लावा उगलने को बेताब था।मैंने अपनी कमर उछालना शुरू कर दिया और वो भी जोर के धक्कों से मुझे चोद रहा था। उसका लिंग मेरी योनि में ‘फच. अब की बार लंड धीरे धीरे सरकता हुआ आधे से ज्यादा अन्दर चला गया, अब उसने अपनी गांड ऊपर उठाई जिससे लंड टोपी तक उसकी गांड से बाहर आ गया, उसने एक लम्बी सांस ली और मेरे लंड पर बैठ गई. संता सुपरमार्केट में घूम रहा था…इतने में एक खूबसूरत महिला उसके पास आई और बोली- हैलो !संता हैरान रह गया.

अमर ने झुक कर फिर से मेरे चूचुकों को बारी-बारी से चूसा और मेरे होंठों को चूम कर मुस्कुराते हुए कहा- अब मैं तुम्हारी नथ उतारूँगा. राजू भी झट से रीटा की जुबान को अपने मुँह में सटक कर बुरी तरह चूसने लगा, बीच बीच में रीटा भी राजू की ज़बान को अपने मुँह में खींच कर जवाब दे देती, तो कभी कभी दोनों की जुबानें मिल कर डांस सा करने लगती. मगर ऋज़ू जैसे माल ने उसमें भी संदेह पैदा कर दिया था कि क्या करूँ?मेरा लण्ड अब ऋज़ू की चूत में घुसने के लिए व्याकुल था…- मेरी जान यहाँ कहाँ चोदूँ तुम्हें? मेरा लण्ड तो तुम्हारी इस चुनिया के लिए पागल है.

इतने में पूजा वहाँ आ गई- ओ… तो देवर-भाभी की रास लीला शुरु हो गई, मेरी प्यारी सी चूत का भौंसड़ा बना दिया और अब दोनों मिल कर ऐश कर रहे हो. बस सुहागरात को तेल लगा कर उसकी चूत में लौड़ा घुसाया था, मगर उसकी सील बचपन में खेल-कूद में टूट गई थी, तो खून तो नहीं आया.

ये सब ग़लत है किसी को पता चलेगा, तो बहुत बुरा होगा!तो भाई ने कहा- किसी को कुछ पता नहीं चलेगा और मैं तेरे बिना जी नहीं सकता हूँ.

जैसे ही उसमें से पानी निकला, उसने अपने होंठ वहाँ रख दिए…उसने एक सेक्स की देवी की तरह ही मुझे मजा दिया, मेरे लण्ड को चाट चाट कर पूरा साफ कर दिया।मैं- मधु तूने पहले भी सेक्स किया है न?मधु- क्या भैया?मैं- हा हा.

मेरे लण्ड को बहुत अच्छी तरह से चारों ओर से चूस रही थी…मगर मुझे यकीन था कि इतनी जल्दी लण्ड में ताकत उसके चूसने से नहीं, बल्कि सामने चल रहे नजारे ओर सलोनी की मस्ती देख ही आ रही थी…मेरे लण्ड को ना जाने क्यों?? ये सब बहुत भा रहा था. शादी से पहले मेरे कुछ आशिक थे, मेरे भाईजान को भी पता था, मैं उनसे मिलने भी जाती थी लेकिन भाईजान कुछ नहीं कहते थे क्योंकि उनकी भी गर्लफ़्रेन्ड थी, वो उनसे मिलने जाते! हमें किसी को किसी से कोई मतलब नहीं था. हम अकेले ना रहें, इसके लिए मेरे पति ने मेरे ससुर (यानि पापाजी) को हमारे साथ रहने के लिए गांव से शहर बुला दिया था.

आपको बताना ही भूल गई कि पापा ने जाते समय मुझे कहा था कि वो जल्दी वापस आकर मुझे ले जाएँगे, बस इसी वजह से मैं तैयार हो रही हूँ।करीब 9 बजे तक मैं एकदम तैयार होकर पापा का इंतजार करने लगी। आज मैंने पापा की लाया हुआ गुलाबी टॉप और काला स्कर्ट पहना था, जिसमें मैं एक छोटी बच्ची लग रही थी और वैसे भी अभी मेरी उमर भी क्या थी. अपने कपड़े उतारने के बाद वो मेरे पास आया और फिर एक एक करके मेरे भी कपड़े उतारने लगा, पहले ब्लाऊज, फिर ब्रा उतारी और फिर मेरी चूचियों को मुँह में लेकर चुम्भलाने लगा. !और कहते हुए झड़ गई। अब वो ढीली पड़ चुकी थी और कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया।मस्ती के आलम में हम दोनों शिथिल हो कर एक दूसरे की बाँहों में पड़े रहे फिर कुछ देर बाद उठ कर मैं उसके साथ नहाया और फिर सो गया।उसके बाद तो जैसे हम दोनों जब भी मिलते एक हो जाते और आज भी मैं बिना अपनी बीवी को बताए उसको खुश करता रहता हूँ। तो दोस्तों इसके साथ ही मैं अपनी आपबीती खत्म करता हूँ। अपनी राय जरूर ईमेल करें.

रात तक लौट कर फिर खायेंगे।मैंने कहा- ठीक है जल्दी आना।मुझे पता था मम्मी को मार्केट से आने में कम से कम आधा घंटा तो लगेगा ही। फिर मम्मी के जाने के बाद में प्रीति के पास जाकर बैठ गया और टी.

आप लोग मुझे छक्का या हिजड़ा ना समझें क्यूँकि मेरे पास एक सम्पूर्ण कार्यशील 6 इंच का लंड है और 34-सी आकार के स्तन!मैं 6 महीने पहले लंदन से भारत वापस आई हूँ, वहाँ पर मेरे कई बॉयफ़्रेन्ड्स थे, पर मैं एक ऐसे साथी की तलाश में हूँ जिसे मेरी यौनदशा यानि सेक्सुएलिटी से कोई परेशानी ना हो. ’तभी ससुर जी ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा मुँह ऊपर उठा दिया, मैंने देखा तो होश उड़ गए। उनका लण्ड आज पहली बार मेरी आँखों के सामने था। करीब 7 इंच लंबा और 2 ½ इंच मोटा, एकदम बेसबॉल के बैट की तरह लग रहा था।उसके ऊपर का सुपाड़ा एकदम टमाटर की तरह लाल था।ससुर जी- देख मेरा लण्ड कैसा सूखा पड़ा है बहू और तू बाईब्रेटर के मज़े ले रही है. हम दोनों कॉफी पीने लगे… क्रू मेम्बर बाहर चले गए और स्टूडियो का दरवाज़ा भी बंद हो गया…मोहित सर ने प्रोजेक्टर पर तीस फोटो दिखाए.

हम दोनों साथ ही नीचे आये और वो अपने कमरे में जाकर सो गई और मैं अपने कमरे में सो गया…कहानी जारी रहेगी।[emailprotected]कहानी का दूसरा भाग:एक दूसरे में समाये-2. मेरी नंगी जवानी-1सायरा चिकनी चूत है या नहीं इसका अभी पता चल जायेगा!सोनिया ने मेरी तरफ देखा और कहा- सायरा, अपनी चड्डी उतार!यह सुनकर मेरे तो पैरों तले ज़मीन ही खिसक गई, मैंने कहा- सोनिया, तुम पागल हो गई हो, अब मैं तुम्हारी कोई बात नहीं मानूँगी, मैं यहाँ से जा रही हूँ!और मैं अपनी जींस उठाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ी, अंकुर ने मेरी जींस अपनी तरफ खींच ली और सोनिया को दे दी. !उसे देखते ही मेरा लंड टाइट हो गया था। बस उस दिन से उसे चोदने का मन बना लिया था, पर बदनसीबी से कोई मौका ही नहीं मिल रहा था।एक दिन मैं टीवी देख रहा था, तभी मेरी मम्मी ने आवाज़ लगाई कि काली (उसका नाम) को खेत में से चारा लाने के लिए उसकी मदद करो। मैं उसके पीछे-पीछे चलने लगा उसकी मटकती गाण्ड देख कर मेरा लंड टाइट हो गया और चलते-चलते मेरे पैर से ना जाने क्या टकराया.

नीली शर्ट कैसी लगेगी?मैं क्या बोलता… बस इस बात का गर्व था कि ज्योति के साथ सबसे पहले मैंने सेक्स किया था या इस बात का गर्व कि निताशा कौर जैसे लड़की को मैंने किस किया था… ये दोनों बात कोई नहीं मानता….

राजू रीटा के प्यासे मम्मों को बराबर मसलता रहा और प्यासी मस्ताई हुई रीटा राजू की आँखों में आँखों डाले होंटों में उंगली दबाये शर्माती सी चुच्चे खिंचवाती और दबवाती चली गई. बोल कर, गीता को ‘बाय’ किया। गीता की बस चल दी और मैं अपने घर आ गया और फिर रात में हमने बहुत बातें की।दूसरे दिन मैं कैसे गीता को चोदा और फिर उसकी स्कूल की अकाउंट डिपार्टमेंट की मेमों को चोदा, यह मैं आपको अवश्य ही लिखूँगा।मुझे अपने विचार और संपर्क के लिये नीचे दिए मेल पर संपर्क करें।आपका प्रेम प्रकाश[emailprotected].

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बीएफ चोदी चोदा वीडियो में ?वो शरमा कर एक साइड में बैठ गई। मैं बिना कुछ बोले बाथरूम से तेल लेकर आया और अपने अंडरवियर के अन्दर से ही अपने लण्ड पर लगाना शुरु कर दिया।वो मुझे देख रही थी, मुझसे थोड़ी देर में पूछने लगी- यह तुम क्या कर रहे हो?तो मैंने उसे बताया- जैसे तुम्हारे चूचों की मालिश करनी पड़ती है, वैसे ही इसकी भी करनी पड़ती है।मैंने उससे पूछा- तुम्हारी भी मालिश कर दूँ?तो वो पहले तो मना कर रही थी, फिर बोली- चल कर दे. ऐसे-कैसे जाओगे… जिद मत करो, मैं आपको आपके घर छोड़ दूँगी।”मैंने कहा- मैं घर में नहीं रहता।उसने कहा- व्हाट…!मैंने कहा- मेरा मतलब मैं हॉस्टल में रहता हूँ और इस शहर में बाहर का हूँ।तब भी उसन जिद करके मुझे अपनी स्कूटी पर बिठा लिया। फिर हम स्कूटी पर बैठ कर जा रहे थे, ठंडी का मौसम था।मैंने उससे कहा- गाड़ी जरा धीरे चलाओ.

लेकिन उसके आ जाने से मेरे विभाग के बाकी कर्मचारी उसके चक्कर में बहकने लगे और लडको में आपस में लड़ाइयाँ होने लगी, जो मुझे पसंद नहीं आया।मैंने उससे एक दिन यूँ ही बातों बातों में कहा- देखो अर्चना, तुम काफी सुन्दर भी हो मगर तुम्हारे होने से मेरे ऑफिस का माहौल बिगड़ रहा है जो मुझे पसंद नही है, मुझे अच्छा तो नहीं लगेगा मगर तुम्हें यहाँ नौकरी नहीं करनी चाहिए.

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हेमंत बाज़ार चला गया फिर लौट कर आया तो उसने मुझे पी-नॉट की गोली दी और बोला- रात को प्रीकॉशन नहीं लिया न! मैं शर्म से लाल हो गई पर सोचा कि इसे मेरा इतना तो ख्याल है. फिर मैं बेड से नीचे आकर खड़ा हो गया और दोनों की टांगें फ़ैला कर अम्बिका की चूत में लंड डाला और झटके मारने लगा। मुझे परेशानी हो रही थी फिर भी मजे के चक्कर में सब भूल गया, थोड़ी देर अन्दर बाहर कर मैंने अम्बिका की चूत से लंड निकाला और रोशनी की चूत में डाल दिया और उसकी चुदाई करने लगा. बस हल्का सा सब्र रखो…!फिर मैंने अपने लण्ड का सुपारा उसके चूत के दरवाजे पर सटा कर हल्का सा धक्का दिया। चूत चिकनी होने के कारण मेरा सुपारा ‘गप्प’ करके उसकी चूत के अन्दर चला गया और वो चिहुंक उठी, उसने कहा- निकाल लो.

दिन में न जाने कितनी बार शरारती मोनिका अपने जूतों के फ़ीते बांधती और अलग अलग पोज़ बना बना कर लड़कों को अपनी नन्ही चूत से लिशकारे मार मार कर दीवाना करती रहती थी. जो कुछ मैंने देखा और सुना था उसको जानकर कोई धर्मात्मा भी विश्वास नहीं करता कि यहाँ बंद कमरे में सलोनी और अमित अकेले हों… वो भी ऐसी स्थिति के बाद जिसमे सलोनी को पूरी नंगी देख लिया हो… ना केवल नंगी देखा बल्कि उसको लगभग नंगी ही अपनी गाड़ी में बिठाकर लाया हो… फिर भी कुछ ना हुआ हो. !नारायण ने अपना लवड़ा मधु के चूत में फिर से घुसा दिया और जोर-जोर से ठापें मारने लगा। पूरा कमरा ‘ठप्प-ठप्प’ की आवाज़ से गूँज रहा था।नारायण मधु के लटकते-हिलते दूधों को जोर से पकड़ कर दबा रहा था। बीच-बीच में वो मधु की गाण्ड पर चपत भी लगाता और मधु ‘अया.

दीदी एक शहर में किराए की मकान में रहती थी, 2 कमरों का घर था। जीजाजी दूर एक फ़ैक्टरी में सुपरवाइज़र थे, तो सुबह 7 बजे निकलना और रात में देर 10 बजे तक आते थे। यह मुझे वहाँ रहने के बाद पता चला।मैं अब आराम करने के लिए बगल वाले कमरे में चला गया और यही सोचता रहा कि मेरी बहन आज इतना सजी संवरी क्यूँ है.

तब मैं भी अपने सारे कपड़े उतर कर एकदम बिल्कुल नंगा उनके कमरे में चला गया और बोला- भाभी, यह जिस्म आपके लिए है. बस ऐसे ही साथ देती रहो… आज मैं तुम्हें पूरी औरत बना दूँगा…मैं अपना लण्ड वैसे ही लगातार उसकी चूत पर रगड़ रहा था।वो फिर बोलने लगी- हाय… आआआअहाहह. उम्मीद करता हूँ आपको कहानी पसंद आई होगी।मुझे मेल जरूर लिखें… आपकी प्रतिक्रिया के आधार पर ही मैं आगे की कहानी लिखूँगा।.

मैंने अपनी आँखें बंद कर ली… हहा… डॉन्ट थिंक अदरवाइज़, दिस वाज़ ओन्ली फॉर हेअर तो पुट द ड्रेस ओन मी, और कुछ नहीं…जब महक मुझे ड्रेस पहना रही थी तो मेरी छाती और कमर पर उसके गरम हाथ मुझे अपने ठंडे बदन पर महसूस हो रहे थे. !मैं भी तो यही चाहता था। हम दोनों ने 2-2 पैग पिए। मैं तो नॉर्मल था, पर उसे काफी चढ़ चुकी थी। मेरे मना करने पर भी उसने तीसरा पैग ले ही लिया।फिर उसने मुझे अपने पास बुलाया और कहा- एक बात बताओ. उफ अई आउच उफ़फ्फ़…!रेहान पाँच मिनट तक उसको चूसता रहता है, वो एकदम गर्म हो जाती है। रेहान- जानेमन देखो मेरा लौड़ा कैसे झटके खा रहा है… आ जाओ इसको चूसो न…उस समय तो नशे में थीं.

हेमन्त के साथ कुछ करने की लालसा इतनी प्रबल हो उठी कि मैं विरोध न कर सकी, मैंने हिम्मत कर उसी अंदाज में उसका पैर दबा दिया. मेरी तरफ से अलग से…मैं उनकी बात मान कर बोली- आज तो आप भी मुझे खुश कर दिया है, इस लिए मैं ये पैसे नहीं लूँगी।फिर राज ने जबरन मुझे रूपए दे दिए और अगले दिन आने के लिए कहा फिर वे बाथरूम में चले गए।तब तक मैं कपड़े पहन तैयार हो गई।राज बाथरूम से निकले और तैयार हुए फिर उन्होंने सुनील को फ़ोन लगा कर बोला- यार कहाँ चले गए.

उसने कहा- लेकिन-वेकिन कुछ नहीं, चलो।मैं अन्दर आ गया…उसने कहा- मैं कपड़े बदल कर आपके लिए काफी लाती हूँ, आप बैठो. और फिर लंड का रस पी गई… मुझे बहुत ही अच्छा लगा… मामी ने मेरा जूस पी लिया… मामी भी झड़ गई थी… उसकी भी चड्डी गीली हो चुकी थी. आज इतने उतावले क्यों हो रहे हो?’‘मेरी जान, कितने दिन से तुमने दी नहीं… इतना ज़ुल्म तो ना किया करो मेरी रानी…!’‘चलिए भी, मैंने कब रोका है, आप ही को फ़ुर्सत नहीं मिलती। राजू का कल इम्तिहान है, उसे पढ़ाना ज़रूरी था।’‘अब श्रीमती जी की इज़ाज़त हो तो आपकी बुर का उद्घाटन करूँ?’‘हाय राम.

रीटा की तीन चौथाई गोल गोल गोलाइयाँ तंग शर्ट के खुले गले से बाहर उबल पड़ रही थी और राजू की तरफ तनी हुई थी.

नहा-धो कर तैयार हो जा, या मैं तुझे नहलाऊँ ! मैंने तुझे पहले भी यहाँ नंगी कर बहुत बार नहलाया है !’मैंने रामदीन की बातों पर ध्यान नहीं दिया और रोज की तरह तैयार हो गई।‘चाचा जो तूने कल किया, वो ठीक नहीं किया. 30 से 11 बजे के बीच आ जायेंगे।अमर का कमरा सबसे ऊपर ठीक हमारे घर के ऊपर था। हम छत पर कुछ देर बातें करने लगे।फिर अमर ने कहा- चलो कमरे में चाय पीते हैं. मैं मर जाऊँगी।अमर मेरी बातों से जैसे अनजान सा हो गया था और वो धक्के लगाते जा रहे थे और कुछ देर में उनके धक्के तेज़ होने लगे.

जिसमें कुछ बड़े-बड़े पत्थर थे।मेरी सहेली ने तब अपने बैग में से एक कपड़ा निकाला और मुझसे कहा- पहन लो।मैंने देखा तो वो एक छोटी सी पैन्टी और ब्रा थी।मैंने पूछा- ये क्या है. आधे घंटे तक हम लोग एक-दूसरे को चोदते और चूमते रहे, मेरे लण्ड का पानी दूसरी बार फिर निकल गया और मैं भी थक कर नशे मेंचूर हो चुका था।मैंने चूमते-काटते उसका पूरा बदन लाल कर दिया था।उसके बाद हम लोगों ने कई बार चुदाई की.

!मैंने ब्लाउज के बटन खोल कर ब्रा भी खोल दी। उसके सख्त बोबे देख कर मैं हैरान रह गया था। इतने बड़े बोबे तो मैंने ब्लू-फिल्म में भी नहीं देखे थे।मेरा लंड भी गीला हो गया था। उसने मेरी पैंट को खोल दिया और मेरे लंड को सहलाने लगी।कहने लगी- ज़ोर से दबाओ मज़ा आ रहा है. चल मेरे कुत्ते शुरू हो जा।’फिर मैंने मामी की गाण्ड पर थूक लगाया और गाण्ड में सुपारा फंसा दिया, जिससे मामी उछल पड़ीं।मैं डर गया और लण्ड निकाल कर दुबारा उनकी गाण्ड चाटने लगा।उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ कर कहा- बस अब और नहीं. अन्दर मत छोड़ना।मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुँह में दे दिया, वो मेरा सारा माल पी गई।हमने फिर उसकी चूत पर लगा सारा खून साफ़ किया और अपने-अपने कपड़े पहने और अपनी सीट पर आ गए।उस रात हमने बार-बार वाशरूम जाकर 3 बार चुदाई की। उसने मुझे अपना फ़ोन नम्बर दिया और जब भी हम मिलते हैं, चुदाई जरूर करते हैं।आपको यह कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताना।आपका दोस्त विराट सिंहमुझे मेल करना मत भूलना।[emailprotected].

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तेरा लौड़ा बहुत बड़ा और मोटा है।मैं जरा रुका और मेरा आधा लंड उनकी चूत में फंस चुका था।कुछ देर बाद जब वो शांत हो गई, तब मैंने एक और धक्के के साथ पूरा लौड़ा उसकी चूत में घुसा दिया।इस बार फिर से वो चिल्ला उठी लेकिन मैं नहीं रुका।उनके मुँह से ‘ऊह.

ये सब ग़लत है किसी को पता चलेगा, तो बहुत बुरा होगा!तो भाई ने कहा- किसी को कुछ पता नहीं चलेगा और मैं तेरे बिना जी नहीं सकता हूँ. वो सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में रह गई।मैंने उसे बिस्तर पर बिठाया और अपने कपड़े निकालने लगा और कपड़े निकालते वक्त भी सुमन आगे होकर मेरे होंठों को चूम लेती।फ़िर मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए, वो मेरे लौड़े को देखकर बोली- ह्म्म्म. सल दो इन्हें।”विनायक ने एक ही झटके में मेरा कुरता फाड़ दिया अब मेरी गोल गोल चूचियों और उसके होंठों के बीच सिर्फ मेरी ब्रा थी जिसे मैंने झटपट निकाल दिया.

रीटा अपने चूतड़ों को दायें बायें हिला कर राजू के अकड़े लण्ड को ठीक से चूतडों को बीचो-बीच रख कर राजू के लण्ड की सख्ती का मजा लेने लगी. इस लंड ने मुझे म्मअररर डाला…!’इस चीख में भी वो मधुर सी आवाज़ सुनाई दी जो कि कौमार्य के फटने की आवाज़ थी।अब मैंने लंड को पूरा घुसा लिया था और मेरी जंघाएं उसके चूतड़ से सट गई थीं, हमारी टाँगें गुंथ गईं।अब मैं भी उसकी पीठ पर लेट गया और उसके हाथ पकड़ लिए।‘धन्यवाद डार्लिंग. mia khalifa पोर्नओह…” और चचाजी झड़ गये। जब वे हांफ़ते हांफ़ते मेरी पीठ पर लस्त पड़े थे तो मैं सिर घुमाकर उनके होंठ चूसने लगा। बड़ा मजा आ रहा था, अच्छा लग रहा था कि चचाजी को मैंने इतना सुख दिया।कहानी चलती रहेगी।.

और वो हर बार उसी बारे में बात करते, मैं भी बहुत अच्छी सेक्स चेट कर लेता हूँ, इसलिए उन दोनों पति-पत्नी को मेरी बातें, मेरे सेक्स के आइडिया बहुत ही उत्तेजक लगते थे. प्रेममेरी इस कहानी के पिछले भाग में आप सभी ने पढ़ा कि भाभी की मस्त चुदाई करने के बाद मैं वहीं उस पर ढेर हो गया। थोड़ी देर हम ऐसे ही एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे। कुछ देर सोने के बाद वो उठी, अपनी पैन्टी पहनी और जैसे ही वो नाईटी पहनने लगी, मैं उठा और उसको पकड़ लिया और कहा- आज तुम सिर्फ़ ब्रा और पैन्टी ही पहनोगी मेरे लिए.

ला दिखा मुझे भी कैसी स्टोरी है ये !दोनों कहानी पढ़ने में मग्न हो गईं और दोनों ही गर्म हो गईं मगर राधा ने आकर उनकी मस्ती करने को मिट्टी में मिला दिया।उन दोनों के दिल में था कि आज नंगी होकर मस्ती करेंगे, पर ऐसा कुछ ना हो पाया।दूसरे दिन राधा वापस विमला से मिली और कुछ जरूरी बातें उनसे पूछी।राधा- मगर जवान लड़की को इस तरह अकेले वहाँ छोड़ देना ठीक नहीं लगता. मैंने जब उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके उरोजों को पागलों की तरह दबाने और चूसने एवं चाटने की चेष्टा करने लगा तो रिया ने कहा- ठहरो, इसे अपनी थूक से गीला मत करो, मैं इस भी उतार देती हूँ!इतना कह कर रिया ने दोनों हाथ पीछे करके अपनी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को उरोजों से अलग करते हुए चुनरी और कुरती के ऊपर फेंक दी. करीना और अधनंगी कैटरीना कैफ का शीला वाला ठरकी डाँस देख बहादुर मस्त लण्ड को शहर की येंक्की और नशीली चूतें भी चखने के लिये बेताब हो गया.

!अताउल्ला- क्या कर रही थी?अब मैं उन्हें कैसे बताती कि मैं एकदम नंगी उनके बाप के साथ अपने बेड पर हूँ और ससुर जी मेरी चूत में उंगली डाल रहे थे। मैंने उन्हें बड़ी मुश्किल से रोका हुआ था।मैंने कहा- मैं रसोई में काम कर रही थी. यह मैंने इसलिए किया कि अंकल थोड़ा नार्मल हो जाएँ वरना इस समय अगर मैं जरा ज़ोर से बोल देता तो कसम से वो बेहोश हो जाते. मैं वापस घर आई, मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था, तभी माही को तेज बुखार आने लगा, मेरे पास दवा व डाक्टर के लिए पैसे नहीं थे.

जब भी कोई उचित समय रहेगा तो मैं बता दूँगी क्योंकि नेहा ही एक ऐसी सहेली थी, जिससे वो अपने दिल की सभी बातें साझा करती थी।कहानी जारी रहेगी।आपके ईमेल का इन्तजार रहेगा।[emailprotected].

वो मुझसे बोली- मुझे नशा हो रहा है। मुझसे ठीक से तो नहीं होगा पर फिर भी तुम बैठ जाओ।मैं बैठ गया और आंटी ने फुव्वारा चालू कर दिया. आह…!दोनों एक साथ झड़ जाते हैं।राहुल- वाउ यार जूही की गाण्ड तो देखो कैसे लाल हो गई है और छेद देखो कैसे खुला हुआ है, यार रेहान तेरा लौड़ा बहुत भारी है कसम से मेरी बहनों की तो लॉटरी निकल गई.

!’मुझे उसकी गालियों की कोई परवाह नहीं थी। जब मैंने यह महसूस किया कि अब वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी है तो मैंने नया पैंतरा आज़माया।मैं उठ कर खड़ा हुआ और बोला- पम्मी चल उठ और बेड के बिल्कुल सेंटर में लेट. !एक बात आप सभी को बता दूँ कि माया मेरे घर के पास ही रहती थी, वो भी अपनी कुछ सहेलियों के साथ रूम किराए पर लेकर रह रही थी। मेरा रूम वो जानती ही थी। मैंने दरवाज़ा खोला देखा कि माया आई है।मैंने पूछा- तुम कॉलेज नहीं गईं?उसने कहा- नहीं. कुछ देर तक ज़ोरदार चुदाई करने के बाद वो आदमी जोर से गुर्राया- आआहह… झड़ रहा हूँ…और दीदी की कोख में अपना सारा बीज डाल दिया।कुछ देर ऐसे ही लेटे रहने बाद दीदी उसे फिर से चूमने लगी और बड़ी इठला कर बोली- देखो ना.

!उसके बाद हमने एक साथ बाथरूम में बाथ लिया, नहाते समय हम दोनों ने खड़े-खड़े अपने होंठों से एक-दूसरे को काफी देर तक चूमा और बहुत प्यार किया। सच में वो मेरी लाइफ का एक यादगार लम्हा था।उसके बाद हमने एक साथ लंच किया, फिर कुछ देर आराम करने के बाद चुदाई का दूसरा दौर शुरु किया।इस बार वो खुल चुकी थी, अब वो भी साथ दे रही थी। हमने बहुत चुम्मा-चाटी की।फिर मैंने उससे कहा- अब तुम मेरे ऊपर आकर करो. आ! भाई ने मेरी चूत की दोनों फांकों पर होंठ रख दिए और कसी हुई चूत के होंठों को अपने होंठ से दबा कर बुरी तरह से चूसने लगा और मैं तो बस कसमसाती रह गई, तड़पती. पता नहीं ये सब सही भी है कि नहीं क्योंकि तुम मुझ से छोटे हो।मैंने उनको कहा- मैं आपसे छोटा हूँ पर मैं बच्चा नहीं हूँ.

बीएफ चोदी चोदा वीडियो में क्या हो सकता है!कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।[emailprotected]कहानी का अगला भाग:फुफेरी बहन की सील तोड़ी-2. मगर मैं सलोनी को इतना प्यार करता था कि मुझे उसकी बहुत चिंता हो रही थी…मैंने ऋज़ू को भी साथ ले लिया कि चलो आज इसको वहीँ सलोनी के सामने ही चोदूँगा.

प्यार वाला सेक्स

काफ़ी रोमाँटिक मौसम है।फ़िर बात चलने लगी कि खुले में सेक्स करने का अलग ही मजा होता है।विजय ने कहा- अगर मुझे ऐसी जगह मिले तो मैं घर के बिस्तर पर नहीं बल्कि यहीं खुले में सेक्स करूँगा !तब मेरी सहेली ने कहा- सोचते क्या हो, सारिका तो यहीं है, कर लो इसके साथ !तब मैंने शर्माते हुए कहा- पागल है क्या तू. बाबा आज आपका कंट्रोल कहाँ गया… यह तो एकदम कड़क होकर सलामी दे रहा है?बाबा- साली, तेरे जैसी रंडी सामने होगी तो यह फुंफकार ही मारेगा. फ़िर मैंने उसके कान के पास अपना मुँह ले जाकर कहा- आई लव यू जान!इतना सुनकर उसने अपनी हाथों की पकड़ ढीली की, अपनी आँखें खोलकर मेरी तरफ़ देखा और मेरे होंठों पर अपने होंठों से चूमा और कहा- आई लव यु टू जान!और मुझसे लिपट गई और मेरी छाती और गले को चूमने लगी.

अब रिया मेरे सामने बिल्कुल नग्न खड़ी थी और अगले ही क्षण मैं उसके एक नग्न उरोज को चूस रहा था और अपने हाथों से उसके दूसरे उरोज और उसकी शर्मगाह को मसल भी रहा था. !तो वो मान गई। हमने साथ-साथ चाय पी और फिर से निशा का पल्लू सरक गया, तो वो फिर से शरमाई।मुझे बहुत जोरो की हँसी आई तो वो बोली- हँस क्यों रहे हो. सेक्सी वीडियो में दिखानावहाँ तुम भी अपने ऑफिस फोन कर देना और मैं भी कर दूँगी, फिर बारिश कम होने पर हम ऑफिस चलेंगे।मैंने भी यही ठीक समझा और उनको बाइक पर बिठा कर उनके घर चल दिया।वहाँ तक आंटी मुझ से चिपकी रहीं शायद ठण्ड के कारण.

!उसने मेरी गाण्ड मारी और मुझे जन्नत की सैर कराई। थोड़ी देर में वो भी निढाल हो गया और उसने अपना बाहर निकाला, तो उसका छूट रहा था।उसने कहा- इसे चाट लो, यह स्वादिष्ट होगा.

!मैं भी तो यही चाहता था। हम दोनों ने 2-2 पैग पिए। मैं तो नॉर्मल था, पर उसे काफी चढ़ चुकी थी। मेरे मना करने पर भी उसने तीसरा पैग ले ही लिया।फिर उसने मुझे अपने पास बुलाया और कहा- एक बात बताओ. कॉम को!फेस बुक के अलावा लोगों ने मुझ से याहू मेल पर भी संपर्क किया, उन में से ही एक युगल भी था, उन्हें भी कहानी पसंद आई और उस बारे में काफी बातें भी की और मुझे यह जान कर बहुत ही ताज्जुब हुआ कि उन दोनों पति पत्नी को सबसे ज्यादा उत्तेजक बात यह लगी कि पति की मौजूदगी में दूसरे मर्द के साथ सेक्स.

मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ, हेमंत मुझे नई नई साड़ियाँ देने लगा, सजने संवरने के साधन परफ़्यूम, कभी जेवर भी, आदि, कभी होटल में ले जाकर खाना खिलाना, कभी घुमाने ले जाना. हम दोनों में अब कोई शर्म नहीं थी, ना ही कोई झिझक थी, हम एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे और दूसरे को खेलने दे रहे थे. ज़्यादा अन्दर मत करना… बहुत दु:खता है।’ रूबी ने हाँफते हुए स्वर में कहा।वह बहुत ज़्यादा पस्त हो चुकी थी।‘ठीक है.

!नारायण ने अब जोर-जोर से मधु के दूधों को दबाना शुरू कर दिया उसके निप्पलों भी चूस रहा था। मधु के चूचुकों के सामने एक काले रंग का गोल निशान था जिसे देखने में भी बड़ा मज़ा आ रहा था।थोड़ी देर के बाद नारायण ने बोला- नीचे जाओ ना.

मैंने पैन्टी को सूंघा, बहुत मस्त अहसास था, मैंने अपना लोवर आधा नीचे किया और लण्ड को मुठियाने लगा।मेरा मन इतना मस्त हो गया कि मुझे याद ही नहीं रहा कि मैं कहाँ हूँ।तभी मेरा पानी निकल गया, मैंने पैन्टी को देखा, वो मेरे रस से भीग गई थी। मैं पैन्टी को रख कर पीछे मुड़ा तो देखा कि भाभी बाथरूम निकल कर दरवाजे पर खड़ी थीं।मेरे होश उड़ गए. तक… अरे जीजू आप… वाओ…और बिना किसी औपचारिकता के दरवाज़ा खोल मेरे निकट बैठ गई, मैंने गेट लॉक पहले ही खोल दिया था।गुड्डू ने नीली जीन्स और सफ़ेद टॉप पहना था… दोनों ही कपड़े बहुत कसे थे, उसके चिकने बदन से चिपके थे।मैं- हेलो गुड्डू… यहाँ कैसे. ‘अच्छा, आप जिद्द करते हो तो मैं आपको अपनी दिखा देती हूँ, पर कोई ज्यादा गुण्डी बात मत करना, ओके’? नन्ही रीटा ने पलकों को फड़फड़ाते हुए बहुत ही भोलेपन से कहा.

लैंड बढ़ने की दवाईऔर बताओ, क्या कर रहे थे?रनबीर-तुझे याद कर रहा था मेरी रानी…और बताओ, फ्रेश होने का मूड है?मैं- बिल्कुल जान…पढ़ पढ़ के बोर हो गई हूँ…फ्रेश कर दो न मुझे !रनबीर- तो आ जा… बोल क्या पहना है?मैं- पजामा और टी-शर्ट…रनबीर- और अन्दर?मैं- कुछ भी नहीं यार…रनबीर- उफ्फ्फ्फ़ क्या बात है…. मैंने तो सुना है बहुत दर्द होता है।मैं- वो तो बस पांच मिनट तक ही होता है, उसके बाद जो मज़ा आता है उसके आगे ये मज़ा कुछ नहीं है।मेघा ने एक शरारती अन्दाज में कहा- ऐसा क्या.

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अगली कहानी में बताऊँगा कि कैसे मैंने उसकी गाण्ड मारी।मैं उसका आशिक बन गया था और तभी मैंने अपनी ये ईमेल आईडी बनाई।अब आप मुझे अपने ईमेल लिख कर बताएं कि आपो मेरी यह कहानी जो कि बिलकुल सच्ची घटना है कैसी लगी।[emailprotected]. पढ़े लिखे होने के कारण उनका उठना-बैठना और पहनावा भी शहर वासियों जैसा है, इसलिए मेरे साथ घर में बहुत जल्दी एडजस्ट हो गए हैं. थोड़े पागल किस्म के लोग हैं वो लोग चुदाई की हर हद पार कर चुके हैं मगर पैसे भी खूब देंगे…पापा की बात सुनकर मैं एकदम सन्न रह गई क्योंकि चुदाई के चक्कर में अब ना जाने मेरे साथ क्या-क्या होने वाला था। पापा ने तो मुझे सचमुच की रंडी बना दिया था।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार मेल करें।.

कैसे आना हुआ !” मैंने सिर्फ बनियान और छोटी सी फ्रेंची पहनी हुई थी।वह मेरे चिकने जिस्म का मुआयना करने लगा।मैंने कहा- हाँ. रीटा के फूल से नादान हाथों की गरमी और नरमी पा कर राजू को लण्ड ने कम्पकपा कर झरझरा कर थोड़ा सा पानी छोड़ दिया. बना लो मुझे अपनी!रीना सीधी लेट गई, बाबा की आँखों में चमक आ गई थी, वो उस पर टूट पड़े और उसके मम्मे दबाने लगे, निप्पल चूसने लगे।रीना- आ.

लगता है मैं 2-3 दिन ठीक से चल भी नहीं सकूंगी।”मेरी जान तुम तो मुझे रात को ही कहोगी… एक बार आ जाओ !” वो हँसने लगा। मेरी भी हंसी निकल गई।रात की बात रात को देखेंगे…. इधर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और सिर्फ अंडरवियर में था। उसने अपनी पजामी भी उतार दी और अपने दोनों हाथों से अपने स्तनों को ढक कर मेरी तरफ मुड़ गई. फ़िर शाम 4 बजे उसका मेसेज आया उसमे एक पता था जो मेरे घर से काफ़ी दूर था, मैंने अच्छी तरह से स्नान किया, शेव की और अपने लंड को भी अच्छी तरह से तैयार कर लिया, मुझे पता था कि आज इसकी जरूरत पड़ सकती है.

मैं उसके मुँह में लण्ड अन्दर बाहर करने लगा पर उसकी साँस फूलने लगी, उसने मुँह से लण्ड बाहर निकाल दिया और हांफने लगी. !फिर वो पीछे बैठी और मेरे पैंट में हाथ डाल कर लण्ड पकड़ लिया, बोली- कितने दिनों से सोच रही थी लण्ड पकड़ने को.

मेरा भेजा सटक जाता था और हाथ लौड़े पर चला जाता था।उनका हमारे घर आना-जाना था, तो मुझे बहुत मज़ा आता था। जब मैं घर पर होता और भाभी आतीं, मैं उनको देख कर मुस्कुरा देता था, वो भी मुस्कुरा देती।मैं उनकी ब्लाउज को फाड़ कर बाहर आने को आतुर चूचियों को देखता था, वो भी इस बात जानती थीं।उनके पति कई-कई दिनों तक बाहर रहते थे, ऊपर से उनकी मदमस्त जवानी.

मैंने अपने लंड की तरफ ध्यान किया तो वो अभी भी अपने रंग में था, फिर मैंने सोचा कि पेशाब कर आता हूँ जिससे यह शांत हो जायेगा. स्टार जलसामुझे इतनी शर्म महेसूस हो रही थी कि मैं वहाँ से हिल भी नहीं पा रही थी, शायद वो दोनों लड़के मुझे चोदना चाहते थे पर सोनिया ने उन्हें मना कर रखा था, सोनिया बहुत ही शातिर लड़की है इसलिए वो लोग मेरी नंगी चिकनी व गोरी गुलाबी चूत का नजारा ही कर रहे थे. स्कूल लड़की की चुदाई!तो वो बोली- मेरी शादी को 8 साल हो गए हैं और मुझे एक भी बच्चा नहीं हैं। उनको उस सब में कुछ मन ही नहीं है।तो मैंने कहा- मैं तुम्हें औलाद का तोहफा दे सकता हूँ. ?अब उनके चुच्चे और साफ़ दिखाई दे रहे थे, मेरा लंड भी काबू में नहीं आ रहा था !मैंने कह दिया- मैडम सॉरी ! बुरा नहीं मानियेगा, मैं जबसे आपकी कोचिंग में आ रहा था तब से सिर्फ आप ही के बारे में सोचता था.

वह उस आनन्द अनुभूति में बह गई और उसने मुझे आगे करने का इशारा कर दिया, तब मैंने उसे थोड़ा ढीला छोड़ा और अपने लंड को आगे पीछे करते हुए धीरे धीरे उसे पूरा अन्दर तक घुसा दिया.

हम लोग अपनी शादी के बारे में कुछ विचार करना चाह रहे थे। तुम तो जानते ही हो कि मेरे घर वाले कितने सख्त हैं. मैं उसकी चूचियों को इतनी जोर से दबा रहा था कि उसकी चूचियाँ लाल पड़ गई थी और कई जगह पर तो मेरे दांतों के निशान भी पड़ गये थे. शाम को मेरा बेटा घर आया तब तक मेरी स्थिति कुछ सामान्य हुई।फिर शाम को मैं अमर से फोन पर बात की।मैंने उसे साफ़-साफ़ कड़े शब्दों में कह दिया- तुमने मेरी क्या हालत कर दी.

फच’ करता हुआ अन्दर-बाहर हो रहा था और पसीने से मेरी जाँघों और योनि के किनारे भीग गए थे।जब सुरेश अपना लिंग बाहर निकलता तो हवा से ठंडी लगती, पर जब वापस अन्दर धकेलता तो गर्म लगता। ये एहसास मुझे और भी मजेदार लग रहा था।मैं अब झड़ने को थी, सो बड़बड़ाने लगी- सुरेश चोदो. !’‘बोलो ना मेरी जान, दो-तीन बार क्या?’‘अच्छा बाबा, बोलती हूँ; महीने में दो-तीन बार ही तो चोदते हो… बस. सुलेखा भाभी दरवाज़े के सामने कुर्सी पर बिल्कुल नंगी बैठी हुई थी और अपनी टांगों को फ़ैला कर अपनी चूत को उंगली से चोद रही थी.

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मैंने सलोनी का हाथ पकड़ा और उसको कमरे से बाहर ले गया। बाहर आते हुए श्याम भी मिला पर मैं उससे मिले बिना ही सलोनी को ले पार्किंग में पहुँच गया।बाहर की ठंडी हवा ने मेरी आँखों को थोड़ा सा खोला. बहुतेरी बार रगड़म रगड़ाई और ठरक के मजे से रीटा की भी आँखें मुंद सी जाती थी और सिसकारियाँ भी निकल जाती थी. ’इस यात्रा ने मेरा निश्चय पक्का कर दिया क्योंकि उसके बेइंतहा सौंदर्य ने, उसके साथ की मदहोशी ने, उसके मांसल सीने को.

टीवी ऑन कर लो!फिर उन्होंने अपनी छोटी लड़की को आवाज़ लगाई, वो उनके पड़ोसी के घर में गई थी।तो उन्होंने मुझे बोला- जा मनु.

!और फिर बाथरुम में चली गईं।मैंने जा कर कम्पयूटर ऑन किया और नेट चालू कर दिया और अन्तर्वासना खोल कर पढ़ने लग गया, तभी सोचा क्यों न मैं भी कहानी लिखूँ.

वो अहसास मैं कभी भूल नहीं सकता और शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।थोड़ी देर बाद मैंने उसे लिटाया अब हम 69 की अवस्था में हो गए, एक-दूसरे के गुप्तांग मुँह में लिए चाट रहे थे।अब वो बोली- मेरे राजा. सब गोल घेरा बना कर खड़े हो जाओ, मैंने एक इंग्लिश फिल्म में देखा है, एक लड़की सब के लौड़े कैसे चूसती है।रेहान- अच्छा मेरी रानी को इंग्लिश पोज़ बनाना है… साली अभी जब लौड़ा चूत और गाण्ड में जाएगा न. वासुदेव फोटोउसने हलकी से आवाज की- अह हह!और मैंने भी आँखें खोल दी, वो मेरे लंड की तरफ देखे जा रही थी जो पूरे जोश में था और मेरे हाथ उसे हिला रहे थे.

राजू भी झट से रीटा की जुबान को अपने मुँह में सटक कर बुरी तरह चूसने लगा, बीच बीच में रीटा भी राजू की ज़बान को अपने मुँह में खींच कर जवाब दे देती, तो कभी कभी दोनों की जुबानें मिल कर डांस सा करने लगती. मेरे पास कितनी पैन्टी हैं?मेरा लण्ड खड़ा बेकाबू होता जा रहा था, भाभी तौलिया में थीं, भाभी की गोरी-गोरी जांघें. आज वैसे भी मेरा मन नहीं था… पूरा बदन दुख रहा है लगता है बुखार हो गया लेकिन तेरा इस महीने का कुछ करना पड़ेगा। सोच रहा हूँ तुझसे एक बच्चा पैदा कर लूँ ताकि 9 महीने तक इस खून से पीछा छूटे।रानी- कर लो.

तब भाई साब ने कहा- अमिता अकेली है और बच्चे भी नाना के यहाँ गए हैं एक महीने के लिये, तुम शाम को एक फ़ोन कर लेना घर पर या फ़िर घर जाकर आना।मैंने कहा- जी ठीक है!और मैं वहीं से ऑफ़िस चला गया।शाम को लौटने में देर हो गई, करीब सात बज चुके थे, अचानक सेल पर मेरी बीवी का फ़ोन आया- अरे भाभी का फ़ोन नहीं लग रहा. एक हफ्ते पहले फ़ेसबुक पर मैं आरुष नाम के एक लड़के से मिली थी, मैंने दो दिन तक उससे याहू पर बात की और फिर उसने मिलने के लिए पूछा.

5 या 7 इन्च का लग रहा है।’फ़िर स्नेहा ने बिना कुछ कहे झट से मेरा लण्ड सीधा मुँह में ले लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चाटने लगी।लगभग 5 मिनट तक चूसने के बाद स्नेहा ने कहा- अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है.

अब की बार लंड धीरे धीरे सरकता हुआ आधे से ज्यादा अन्दर चला गया, अब उसने अपनी गांड ऊपर उठाई जिससे लंड टोपी तक उसकी गांड से बाहर आ गया, उसने एक लम्बी सांस ली और मेरे लंड पर बैठ गई. फिर मैंने उसकी पीठ पर किस्सियाँ की और गांड मारने लगा, 15 मिनट बाद उसकी गांड में ही माल गिरा दिया, वो भी झर गई. देसी रोमियो हरमनमैं दो मिनट तक भाभी के ऊपर ही लेटा रहा और भाभी से पूछा- आपकी चूत दो बच्चों की माँ होते हुए भी इतनी टाइट क्यों है.

सोनी मैक्स कुछ खेला खेली हो जाए?रानी और रणजीत अपने काम में लग गए।पहले रणजीत ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और चूमने लगा, साथ ही साथ उसकी गोल चूचियों को भी दबाने लगा।चूची क्या थीं जबरदस्त मस्त संतरे थे।चूची दबाने से रणजीत का काला कोबरा जाग गया।अब रानी को दिक्कत करने लगा यानि उसकी गाण्ड में हलचल होने लगी, उसने अपने नीचे एक हाथ डाल कर उसे पकड़ लिया और कहा- बदमाश. मुझे बिल्कुल पता नहीं था कि वो चुम्मा ले चुके थे या केवल साड़ी ही ऊपर कर पाये थे !मैं एकदम से पीछे को हो गया !तभी मुझे सलोनी के बिस्तर से उठने की झलक भी दिखाई दी, दो सेकंड रूककर जब मुझे लगा कि अब दोनों सही हो गए होंगे, मैंने कमरे में प्रवेश किया …अंकल का चेहरा तो फ़क सफ़ेद था, मगर सलोनी सामान्य तरीके से अपनी साड़ी सही कर रही थी…सलोनी- ओह जानू आप आ गए.

सीडकटिवमैं- मतलब सर… अब तो मैंने पूरी नंगी फोटो खिंचवा दी… अब क्या करूँ?मोहित- मतलब कामवासना से भरी हुई आँखे और सेक्स के दर्द का चेहरा…मैं- ऐसा चेहरा कैसे बनाऊँ कैसे सर ?मोहित- वही तो मुश्किल है. आप फिकर क्यूँ करती हैं, मैं बिटिया का अच्छी तरह से ख्याल रखूँगा ! रात को उसे अच्छे से दूध पिला कर सुला दिया था !’फिर फोन रख उसने मुझ से कहा- मम्मी कह रहीं थी क़ि मैं तेरा ठीक तरह से ‘ख्याल’ रखूं… तू स्कूल से आ जा, तब मैं फिर ठीक तरह से तेरा ‘ख्याल’ रखूँगा. कभी कभी एकांत में भी तो चुदाई होनी चाहिए ना!शेष सातों दिन हम तीनों ने साथ मिल कर चुदाई का तरह तरह का खेल खेला.

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!मैंने गति बढ़ा दी, लण्ड गाण्ड की पूरी गहराई तक जा रहा था, भाभी लम्बी लम्बी साँसें ले रही थीं, मैंने अपने होंठ भाभी के होंठों पर गड़ा दिए।करीब 20 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद मैंने भाभी की गाण्ड को फिर वीर्य से भर दिया। अब शरीर की हालत पतली हो चुकी थी, पता ही नहीं चला कि हमें कब नींद आ गई।जब सुबह मैं उठा तो भाभी मेरे लिए चाय लेकर आईं, कहने लगीं- रात की चुदाई से कमर और गाण्ड में बहुत दर्द है. तू अन्दर से…वो मेरी चूत के दाने को बुरी तरह चाटने लगे।मुझ से रुका नहीं गया और मैं उनके सिर को अपने अन्दर की तरफ दोनों हाथों से दबाने लगी और मेरे मुँह से- ह…! उफ्फ़… नहीं… प्लीज़. घर में बैठे-बैठे मोटी हो गई हूँ।तब उन्होंने कहा- मुझे तुम मोटी नहीं लग रही हो, बल्कि सेक्सी लग रही हो.

वो रोहन को गाली बकने लगी, रोहन भी अब उसे गाली देने लगा- साली रण्डी की बच्ची… आज तो मैं तुझे कुतिया के जैसे ही चोदूँगा…फ़िर रोहन निशा को और भी जोर से चोदने लगा, निशा भी सिसकारियाँ ले रही थी और अपने स्तनों को मसले जा रही थी।फ़िर मैंने भी फ़िर से निशा की चूत को चाटना शुरू कर दिया।निशा मेरे सर को दबा कर अपनी चूत चटवा रही थी।करीब 15 मिनट तक चुदाई के बाद रोहन झड़ने वाला था तो निशा बोली- रुक मेरे राजा. अब तू खुद बुलाएगी अपने यार को कल चुदने के लिए…अगली सुबह हुई और ठीक उस दिन की तरह दीदी आज बड़ी सज रही थी, मैंने पूछा तो बोली- पड़ोस में जाना है, कुछ काम है.

मेरी योनि का पानी और पसीने के दाग दिखाई दे रहे थे।मैं झट से उसे धोने के लिए डाल देना चाहती थी, पर जैसे ही बिस्तर से उठी तो लड़खड़ाते हुए जमीन पर गिर गई। मेरी टांगों में इतनी ताकत नहीं बची थी कि मैं खड़ी हो सकूं।मैंने अमर को फोन कर सब कुछ बताया तो वो छुट्टी ले कर आया और मुझे मदद की खुद को साफ़ करने में.

पर क्या हम लोग ऐसे ही एक-दूसरे के नाम पर ऊँगली करते और मूठ मारते रहेगे?उसने बस एक ‘स्माइली’ के साथ रिप्लाई दी।फिर मैं भी मूठ मार कर हॉल में वापस आ कर सीट पर बैठ गया और चुपके से एक चुम्मी उसके गाल पर कर दी।अब पूजा पट चुकी थी और मुझसे चुदने को राजी थी।आगे के कहानी फ़िर कभी. मिरजापुर जिले के एक गाँव की अनिता जो मेरे दूर के रिश्ते में मुझे भैया कहा करती है, उसके पापा एक राजनीतिज्ञ हैं और जाने-माने नेता हैं. ! शरीर पर एक भी बाल नहीं, चूत तो जैसे पूरी दुनिया को समा लेने को बैचेन।वो नहाते वक़्त अपनी चूत के आस-पास खूब उंगली कर रही थी और एकदम से मदहोश हो रही थी।मैं समझ गया कि उसे भी चुदाई का बुखार चढ़ चुका है। ऐसा हसीन मौका कहाँ मिलेगा मूठ मारने को, सो मैंने बाथरूम से उसे देख-देख कर ही मूठ मार ली।फिर मैंने आवाज़ लगाई- शालिनी… शालिनी… तुम्हारे पापा हैं क्या?वो बोली- कौन सुशील.

!’ बोल रही थी, पर अपनी कमर हिला रही थी। उसको मज़ा आ रहा था।मैं 69 की स्थिति में उसकी चूत चाट रहा था। अचानक मुझे ऐसे लगा जैसे मेरा लण्ड उसके मुँह के पास था। मैंने अपने लण्ड को उसके मुँह में महसूस किया वो मेरा लवड़ा चूस रही थी।यह मेरा पहला अनुभव था बहुत मज़ा आ रहा था। फिर दस मिनट के बाद मैं अपने लंड को उसकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा और साथ-साथ उसकी टी-शर्ट और ब्रा एक साथ निकाल दिए।अय हय. तभी मेरे दिमाग में योजना आई कि अगर मैं पापाजी को अपने यौवन की झलक दिखाऊँ तो शायद कुछ बात बन जाए और मेरी लण्ड महाराज से चुदने की इच्छा भी पूरी हो जाए. वहीं पास में पार्क था, दोनों वहीं चल दिए और एक कोने में झाड़ियों के पीछे छुप कर बैठ गए, जाते ही मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए और हाथों से उसके चूचे दबाने लगा.

उह्ह… !अब मैं पूरी मस्ती से उसकी गाण्ड को चाट रहा था। मेरे थूक से उसकी गोरी चिकनी गांड का छेद भीग गया था। मेरी जीभ लिप-लिप की आवाज़ करती हुई उसकी गांड के मुलायम होटों को सहला रही थी।मैं बीच बीच में उसकी गोलियों और गांड के बीच के भाग को भी चाट लेता था। ऐसे में वरुण के मुँह से एक नई सिसकारी निकल जाती, उफ़…हह.

बीएफ चोदी चोदा वीडियो में: पूरा तना हुआ… काला ओर लण्ड का अगला भाग लाल सुर्ख हो रहा था।वो जल्दी से हमारे पास आया, और उसने ऋज़ू के चेहरे के पास अपना लण्ड कर दिया. आखिर मेरी जिंदगी में वो खास दिन आ ही गया, मैं सोनू को स्कूल भेज चुकी थी, हेमंत भी ऑफिस जा चुके थे, माही सो रही थी.

!उनका पानी छूट गया लेकिन अनिल उनको झटके दिए ही जा रहा था।ये देख कर मैं अब अपने आपको भी काबू नहीं कर सकती थी। मैंने अपने सिर को पीछे मोड़ कर हिमेश की तरफ देखा। वो समझ गया कि मैं क्या चाहती हूँ।हिमेश ने पीछे जाकर अपनी पैन्ट और अंडरवियर को घुटनों तक निकाल दिया। फिर उसने मेरे तौलिया वाले गाउन को ऊपर कर दिया। मैंने नीचे कुछ नहीं पहना था।वो मेरे चूतड़ों को देख कर बोला- अनिल. मैं उसके कानों को चूमता चाटता हुआ उसकी गरदन तक आया और अपने पूरे होशोहवास खोकर उसकी गरदन को चूमने लगा. छोटी सी चूत बड़े से बड़े आदमी को कुत्ता बना देती है, अब ये तीनों बाप बेटे मेरे गुलाम बनने वाले थे।कहानी जारी रहेगी।मुझे आप अपने विचार यहाँ मेल करें।.

!मैं काँप गई।उन्होंने कहा- हिलना मत !!और एक उंगली मेरी गाण्ड में डाल दी, बोले- वाह बहू… तेरी गाण्ड तो बड़ी ही मस्त है.

कंपनी के सारे लड़के उस पर मरते थे।अब इसे संजोग कहो या मेरी किस्मत कंपनी के मैनेजर ने उसे मेरे विभाग में ट्रान्सफर कर दिया… वो मेरे विभाग में काम करने लगी…हालांकि मुझे तो काम से मतलब था तो मैं उसे एक कर्मचारी की तरह से ही देखता था. बस ऐसे ही साथ देती रहो… आज मैं तुम्हें पूरी औरत बना दूँगा…मैं अपना लण्ड वैसे ही लगातार उसकी चूत पर रगड़ रहा था।वो फिर बोलने लगी- हाय… आआआअहाहह. इस्स्स्सस ……”मेरी मैना, मैंने कहा था ना मेरे मेरे कि मैं तुम्हें प्रेम की उन ऊँचाइयों (बुलंदियों) पर ले जाऊँगा जिसे ब्रह्मानंद कहा जाता है !”ओह … श्याम ऐसे ही करते रहो ….